October 18, 2026

Bokaro News : आंदोलन के बीच खुला BSL का मुख्य गेट, सुरक्षा में तैनात किए गए 150 जवान

Bokaro News : बोकारो स्टील प्लांट (बीएसएल) में नियोजन की मांग को लेकर जारी आंदोलन के बीच जिला प्रशासन ने रविवार सुबह पहल करते हुए प्लांट का मुख्य गेट खुलवा दिया. पिछले दो दिनों से बंद मुख्य गेट के खुलने के बाद ए शिफ्ट के कर्मचारियों की आवाजाही फिर शुरू हो गई. वहीं, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए जगुआर, होमगार्ड और जिला बल के करीब 150 जवानों को तैनात किया गया है.

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जानकारी के अनुसार, बीएसएल के सभी गेट पिछले दो दिनों से बंद रहने के कारण कर्मचारियों के प्लांट में प्रवेश और निकासी पर असर पड़ रहा था. रविवार सुबह चास एसडीएम प्रांजल ढांडा और एएसपी वेदांत शंकर मौके पर पहुंचे.

अधिकारियों ने आंदोलनकारियों से बातचीत की, जिसके बाद मुख्य गेट खुलवाया गया. इसके बाद कर्मचारी प्लांट के अंदर जाने लगे और ए शिफ्ट का कामकाज शुरू हुआ. हालांकि, प्लांट के 11 अन्य गेट अब भी बंद हैं और वहां आंदोलनकारी धरने पर बैठे हुए हैं.

चास एसडीएम प्रांजल ढांडा ने बताया कि प्लांट में जहरीली गैसों की मौजूदगी को देखते हुए संभावित गैस रिसाव की स्थिति में सुरक्षा को लेकर चिंता थी. इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्य गेट खुलवाने की पहल की गई. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर अन्य गेट भी खुलवाए जाएंगे. फिलहाल स्थिति शांतिपूर्ण है और कर्मचारियों की आवाजाही सामान्य करने का प्रयास किया जा रहा है.

एएसपी वेदांत शंकर ने बताया कि प्लांट की सुरक्षा के लिए जगुआर, होमगार्ड और जिला बल के करीब 150 जवान तैनात किए गए हैं. उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी धरना स्थल पर अपना आंदोलन जारी रख सकते हैं, लेकिन प्लांट का संचालन बाधित नहीं होना चाहिए. प्रशासन की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ कर्मचारियों की सुरक्षा और सामान्य आवाजाही सुनिश्चित करना है.

बीएसएल में नियोजन की मांग को लेकर विस्थापित अप्रेंटिस संघ का आंदोलन रविवार को नौवें दिन भी जारी रहा. बोकारो विधायक श्वेता सिंह भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठी हैं. संघ की मांग है कि अप्रेंटिस का प्रशिक्षण पूरा कर चुके विस्थापित युवाओं को नियोजन दिया जाए. इसी मांग को लेकर आंदोलनकारी धरना और भूख हड़ताल कर रहे हैं.

प्लांट में उत्पादन प्रभावित होने से आर्थिक नुकसान की बात भी सामने आई है. प्रबंधन ने प्रतिदिन करीब 30 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान जताया है. ऐसे में एक ओर विस्थापितों का नियोजन आंदोलन जारी है, तो दूसरी ओर प्लांट का संचालन सामान्य करने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती जिला प्रशासन के सामने है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि नियोजन के मुद्दे पर आंदोलनकारियों और प्रबंधन के बीच कोई ठोस समाधान निकल पाता है या नहीं.

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