August 12, 2026

देश की सबसे अमीर महानगरपालिका BMC में टैबलेट पर क्यों मचा बवाल? विपक्ष ने उठाए सवाल

देश की सबसे अमीर महानगरपालिका BMC में अब डिजिटल कामकाज को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. मुंबई महानगरपालिका (BMC) की ओर से नगरसेवकों को टैबलेट उपलब्ध कराने के प्रस्ताव पर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है. प्रस्तावित खर्च करीब 5 से 6 करोड़ रुपये बताया जा रहा है. विपक्ष ने इसे अनावश्यक खर्च बताते हुए सवाल उठाए हैं.

BMC रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी योजना सभी निर्वाचित नगरसेवकों को करीब 13 इंच के टैबलेट उपलब्ध कराने की है. बीएमसी का प्रस्ताव ऐसे तकरीबन 300 टेबलेट मनवाने का है जो ब्रांडेड कंपनियों के होंगे. इन टैबलेट के जरिए नवनिर्वाचित नगरसेवकों को बैठकों के एजेंडे, प्रस्ताव और अन्य आधिकारिक दस्तावेज डिजिटल रूप से उपलब्ध कराने का उद्देश्य है. इससे कागज के इस्तेमाल को कम करने और BMC के कामकाज को पेपरलेस बनाने की दलील दी जा रही है.

जब मोबाइल और लैपटॉप हैं तो टैबलेट क्यों?

विपक्षी नेताओं ने प्रस्ताव की जरूरत और खर्च पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जब नगरसेवकों के पास पहले से मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साधन मौजूद हैं, तो BMC के पैसों से अलग से महंगे टैबलेट उपलब्ध कराने की क्या जरूरत है. विपक्ष का तर्क है कि करोड़ों रुपये की यह राशि सड़क, नालों की सफाई, स्वास्थ्य सेवाओं, कचरा प्रबंधन और अन्य नागरिक सुविधाओं पर खर्च की जा सकती है. इसलिए इस प्रस्ताव को मंजूरी देने से पहले BMC प्रशासन को खर्च की उपयोगिता और आवश्यकता स्पष्ट करनी चाहिए.

BMC की दलील- डिजिटल और पेपरलेस कामकाज

दूसरी ओर, BMC डिप्टी मेयर संजय घाडी ने कहा कि प्रस्ताव के पीछे तर्क यह है कि नगरसेवकों को बैठकों के दौरान बड़ी मात्रा में कागजी दस्तावेज उपलब्ध कराने की जरूरत पड़ती है. टैबलेट मिलने से एजेंडा, प्रस्ताव और अन्य दस्तावेज डिजिटल रूप में उपलब्ध कराए जा सकेंगे. इससे कागज, प्रिंटिंग और दस्तावेजों के वितरण पर होने वाला खर्च कम करने के साथ-साथ BMC के कामकाज को अधिक डिजिटल और व्यवस्थित बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है. बीएमसी के उपमहापौर संजय घाड़ी का कहना है कि जब यूबीटी की सत्ता थी तब भी टैब दिए गए थे इससे कामकाज में आसानी होगी कामकाज पेपर लेस होगा जो कि अच्छी बात है.

BMC के विकास फंड के वितरण पर बवाल

दरअसल, यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब BMC के फंड आवंटन और निर्वाचित प्रतिनिधियों पर होने वाले खर्च को लेकर पहले भी राजनीतिक बहस हो चुकी है. इस साल BMC के विकास फंड के वितरण को लेकर भी विपक्ष ने सवाल उठाए थे. अप्रैल में BMC की स्टैंडिंग कमेटी ने 15 नगरसेवकों के लिए 58.5 करोड़ रुपये के अतिरिक्त फंड को मंजूरी दी थी। इसके बाद फंड के असमान वितरण को लेकर विवाद हुआ.

इसी तरह BMC के करीब 80 हजार करोड़ रुपये के बजट में स्टैंडिंग कमेटी के स्तर पर विकास कार्यों के लिए बड़ी राशि रखे जाने और अलग-अलग नगरसेवकों को फंड आवंटन को लेकर भी विवाद सामने आया था. कुछ ही समय पहले निर्वाचित पदाधिकारियों के लिए नई गाड़ियों की खरीद का करीब 1.5 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भी सामने आया था. उस प्रस्ताव में प्रमुख पदाधिकारियों के लिए छह नई Toyota Innova Crysta गाड़ियां खरीदने की योजना बताई गई थी.

टैबलेट से ज्यादा बड़ा सवाल खर्च की प्राथमिकता का

ऐसे में अब टैबलेट का प्रस्ताव सिर्फ डिजिटलाइजेशन का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह BMC के पैसों की प्राथमिकता और जनप्रतिनिधियों पर होने वाले खर्च को लेकर राजनीतिक बहस बन गया है. यूबीटी के प्रवक्ता आनंद दुबे ने कहा कि ये आम मुंबई कर के टैक्स के पैसो की बर्बादी है. कॉरपोरेट्स को टैब का क्या काम. पहले ही मेयर बंगलो के रिनोवेशन में लाखों का खर्च बीएमसी कर चुकी है. नई गाड़िया ली गई और अब ये इलेक्ट्रॉनिक गजट लिए जा रहे हैं.

एक तरफ प्रशासन पेपरलेस और डिजिटल BMC की दिशा में कदम बढ़ाने की बात कर रहा है, तो दूसरी तरफ विपक्ष सवाल उठा रहा है कि करोड़ों रुपये खर्च करके टैबलेट देने से आम मुंबईकर को कितना सीधा फायदा होगा. कांग्रेस के बीएमसी हाउस लीडर अशरफ आजमी ने भी साफ कहा कि बीएमसी सत्ताधारी नगरसेवकों को 15 से 20 करोड़ रुपये फंड अलॉट कर रही है जबकि विपक्षी पार्षदों की कोई सुनवाई नहीं और अब ये टैब मैं पैसे खर्च कर फिजूलखर्ची की जा रही है?

आदित्य ठाकरे ने लगाए गंभीर आरोप

आदित्य ठाकरे भी ये आरोप लगा चुके है कि जब से ये सरकार बीएमसी की सत्ता में आई है ये बस आम टैक्स पेयर के पैसों की बर्बादी ही करने में जुटी है. मेयर के बंगले पर लाखों खर्च किए गए,नई गाड़ियों का प्रस्ताव लाया गया. मेयर बंगले के कॉरिडोर को संवारने के लिए करोड़ो के टेंडर निकले जिसका विरोध होने पर उसे रद्द किया गया. ये बीएमसी की सत्ताधारी पार्टियां खेलकूद की जमीनों को बीजेपी के नेताओं को बांट रही है.

शिवसेना यूबीटी के नगरसेवक नहीं लेंगे टैब

विधानसभा में शिवसेना यूबीटी से विपक्ष के नेता किशोरी पेडनेकर ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस कहते हैं कि हमें एक्स्ट्रा खर्च नहीं करना है. जब से बीएमसी में बीजेपी की सत्ता आई है तब से आप खुद ही देख लीजिए कितने खर्च हो रहे हैं. इनोवा क्रिस्टा लाने वाले थे हमने इसका विरोध किया. अब सबके लिए टैब लेकर आ रहे हैं हमको नहीं चाहिए टैब. हमारे सारे नगरसेवल टैब का इस्तेमाल नहीं करेंगे. हम लोग मैन्युअल जैसे काम हो रहा है वैसे ही करेंगे.

(इनपुट शुभम पांडेय)

जयप्रकाश सिंह

जयप्रकाश सिंह

जयप्रकाश सिंह का नाम देश के चुनिंदा क्राइम रिपोर्टर में आता है. लंबे समय से टीवी जर्नलिस्ट के तौर पर सेवाएं जारीं. करीब तीन दशकों से सक्रिय पत्रकारिता का हिस्सा. प्रोड्यूसर, एंकर और क्राइम रिपोर्टर की भूमिका. फिलहाल टीवी9 भारतवर्ष में एसोसिएट एडिटर के रूप में मुंबई से कार्यरत. इसके पहले 2012 से 2022 तक मुंबई में इंडिया टीवी के ब्यूरो चीफ रहे. 2005 से 2012 तक नेटवर्क18 ग्रुप के आईबीएन7 चैनल में डिप्टी ब्यूरो चीफ की जिम्मेदारी संभाली. 2004 से 2005 तक सहारा समय मुंबई में बतौर सीनियर स्पेशल कॉरस्पॉन्डेंट काम किया. 2002 से 2004 तक मुंबई ब्यूरो में बीएजी फिल्म्स के चीफ रहे. नवभारत टाइम्स मुंबई में 1997 में जॉइन किया और यहां 2 साल काम किया. इससे पहले भी चार संस्थानों में काम किया.

Read More

google button