Updated: Friday, August 21, 2026, 11:13 [IST]
Kangana Ranaut Slams Sharmila Tagore: 'वंदे मातरम' को लेकर देश में जारी सियासी और वैचारिक बहस के बीच अब बॉलीवुड की दो दिग्गज एक्ट्रेसेस के बयान चर्चा में हैं। लिजेंड्री एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर ने हाल ही में राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' को लेकर अपनी राय लोगों के सामने रखी थी। उन्होंने कहा था कि गीत के शुरुआती दो छंद सभी लोगों के लिए स्वीकार करना आसान हैं जबकि आगे के कुछ हिस्सों में देवी-देवताओं का उल्लेख होने की वजह से एकेश्वरवाद में विश्वास रखने वाले लोगों के लिए उन्हें गाना मुश्किल हो सकता है। अब एक्ट्रेस और बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने शर्मिला टैगोर के इस बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
कंगना रनौत ने शर्मिला टैगोर के बयान पर जताई हैरानी
कंगना रनौत ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर शर्मिला टैगोर का वो वीडियो शेयर किया है, जिसमें वह 'वंदे मातरम' को लेकर अपनी बात रख रही थीं। वीडियो के साथ कंगना ने कहा है कि वह शर्मिला टैगोर की ओर से अपनी आपत्ति जाहिर किए जाने की सराहना करती हैं लेकिन एक कलाकार के तौर पर उन्हें ये देखकर हैरानी हुई कि कविता और कला को लेकर उनकी सोच इतनी सीमित नजर आ रही है।
कंगना ने समझाया कविता में रूपकों की अहमियत
-कंगना रनौत ने अपनी पोस्ट में लिखा है कि कविता या गीत में इस्तेमाल होने वाले शब्दों को हमेशा शाब्दिक अर्थ में नहीं देखा जाना चाहिए। कवि अपनी रचना के जरिए किसी भावना या विचार को प्रभावशाली तरीके से सामने रखने के लिए अलग-अलग रूपकों और कल्पनाओं का सहारा लेते हैं।
-कंगना रनौत ने 'वंदे मातरम' को सिर्फ एक गीत नहीं बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन की भावना से जोड़ते हुए कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने इस रचना के जरिए देश के भीतर शक्ति और आत्मविश्वास जगाने की कोशिश की थी। कंगना रनौत ने स्वामी विवेकानंद के उस मशहूर विचार का भी उदाहरण दिया, जिसमें उन्होंने मजबूत और ऊर्जावान युवाओं की जरूरत की बात कही थी। कंगना के मुताबिक ऐसे बयानों का उद्देश्य किसी शाब्दिक स्थिति का वर्णन करना नहीं बल्कि लोगों के भीतर जोश और शक्ति पैदा करना होता है।
'हिंदू-मुस्लिम वाली सोच से बाहर आओ'
-कंगना रनौत ने अपनी पोस्ट में शर्मिला टैगोर से ये भी कहा कि उन्हें हिंदू-मुस्लिम के नजरिए से इस मुद्दे को देखने से आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने लिखा कि भले ही लोग ईश्वर को मानने के तरीके में अलग-अलग विचार रखते हों लेकिन 'वंदे मातरम' को स्वतंत्रता संग्राम की भावना और उसके ऐतिहासिक संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए।
-हालांकि कंगना का ये मैसेज पूरी तरह आक्रामक नहीं था। उन्होंने शर्मिला टैगोर के प्रति स्नेह जताते हुए कहा कि वह उनसे बहुत प्यार करती हैं और उन्हें गले लगाना भी पसंद करेंगी। इस तरह कंगना ने असहमति के बावजूद उनके प्रति अपना सम्मान और अपनापन जाहिर किया।

'वंदे मातरम' को लेकर शर्मिला टैगोर ने क्या कहा था?
दरअसल 'वंदे मातरम' को लेकर चल रही बहस के बीच शर्मिला टैगोर ने आईएएनएस से बातचीत में अपनी राय रखी थी। उन्होंने कहा था कि भारत में ऐसे कई धार्मिक लोग हैं, जो एक ईश्वर में विश्वास करते हैं। ऐसे लोगों के लिए गीत के उन हिस्सों को गाना सहज नहीं हो सकता, जिनमें देवी-देवताओं का उल्लेख किया गया है। शर्मिला टैगोर ने इसी आधार पर कहा था कि अगर देश के अलग-अलग धार्मिक समुदायों को साथ लेकर चलना है, तो 'वंदे मातरम' के शुरुआती दो छंदों को प्राथमिकता देना बेहतर हो सकता है। उनके मुताबिक ये शुरुआती हिस्से सभी के लिए अधिक स्वीकार्य हैं।
15 अगस्त 2026 के बाद शुरू हुआ था विवाद
'वंदे मातरम' को लेकर ये बहस ऐसे समय में तेज हुई है, जब स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिली। बीजेपी की ओर से कांग्रेस पर आरोप लगाए गए कि पार्टी मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान 'वंदे मातरम' के पूरे पाठ को लेकर आपत्ति जताई गई थी। इसी राजनीतिक विवाद के बीच शर्मिला टैगोर की टिप्पणी सामने आई और अब कंगना रनौत के जवाब ने इस बहस को और चर्चा में ला दिया है। फिलहाल दोनों एक्ट्रेसेस के बयानों के बाद सोशल मीडिया पर 'वंदे मातरम' के अर्थ, इतिहास और इसके धार्मिक संदर्भ को लेकर बहस जारी है।