Aug 07, 2026 04:19 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
JDU सांसद ने कहा कि कोई भी निर्णय लेने से पहले बिहार के हितों की पर्याप्त रूप से रक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि 1996 के बाद से बिहार की आबादी दोगुनी हो गई है, जिसके कारण पीने के पानी, सिंचाई और स्थानीय उद्योगों की मांग बढ़ गई है।

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी से हाथ मिलाते जेडीयू के अध्यक्ष नीतीश कुमार। साथ में (सबसे बाएं) जेडीयू सांसद संजय झा।
भारत और बांग्लादेश के बीच 1996 में हुई गंगा जल संधि की अवधि इस साल दिसंबर में समाप्त हो रही है। इसके मद्देनजर एक संसदीय समिति ने जहां सरकार से ढाका के साथ 'बिना किसी और देरी के' बातचीत शुरू करने और इस संधि को रिन्यू करने का आग्रह किया है। वहीं, केंद्र सरकार में शामिल भाजपा के साथी दल जनता दल (यूनाइटेड) (JDU) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय झा ने इसका विरोध कर इसमें अड़ंगा लगा दिया है। संजय झा ने राज्यसभा में बृहस्पतिवार को बांग्लादेश के साथ 1996 की फरक्का जल-बंटवारा संधि को नवीनीकृत नहीं करने का सरकार से आग्रह किया है।
JDU सांसद ने कहा कि किसी भी नई व्यवस्था को अंतिम रूप देने से पहले बिहार की दीर्घकालिक जल सुरक्षा और विकास जरूरतों पर गौर किया जाना चाहिए। राज्यसभा में विशेष उल्लेख के जरिए यह मुद्दा उठाते हुए संजय कुमार झा ने कहा कि 1996 में हस्ताक्षरित फरक्का जल संधि की वैधता इस साल के आखिर में समाप्त होने वाली है और इसका नवीनीकरण गंगा नदी के किनारे बसे राज्यों, विशेष रूप से बिहार की जल की आवश्यकताओं के व्यापक वैज्ञानिक मूल्यांकन के बिना नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि 1996 के बाद से बिहार की आबादी लगभग दोगुनी हो गई है, जिसके कारण पीने के पानी, सिंचाई और स्थानीय उद्योगों की मांग बढ़ गई है।
बिहार के हितों की पर्याप्त रूप से रक्षा हो
JDU सांसद ने इसे 'राष्ट्रीय हित का मुद्दा' बताते हुए कहा कि संधि के बारे में कोई भी निर्णय लेने से पहले बिहार के हितों की पर्याप्त रूप से रक्षा की जानी चाहिए। झा ने कहा कि फरक्का बराज का निर्माण हुगली नदी में पर्याप्त जल प्रवाह सुनिश्चित करने और कोलकाता बंदरगाह की जरूरतों के लिए किया गया था, लेकिन बिहार पिछले कई दशकों से गंगा जल की अपर्याप्त उपलब्धता से प्रभावित है। उन्होंने कहा कि दक्षिण बिहार के कई जिलों के भूजल स्तर में लगातार गिरावट देखी जा रही है, जिससे पेयजल, और सिंचाई के लिए पानी की कमी हो रही है।
संधि का नवीनीकरण राज्य के दीर्घकालिक हित में नहीं
झा ने कहा कि राज्य की वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त गंगा जल आवश्यक है। उन्होंने कहा कि 2050 तक बिहार को अतिरिक्त 2,000 क्यूसेक पानी की आवश्यकता होगी। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि संधि का उसके मौजूदा स्वरूप में नवीनीकरण नहीं किया जाए और नई व्यवस्था विकसित करने से पहले सभी संबंधित राज्यों की जरूरतों का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जाए। उन्होंने कहा, ''जब तक बिहार के हितों को पूरी तरह से सुनिश्चित नहीं किया जाता, संधि का नवीनीकरण राज्य के दीर्घकालिक हित में नहीं होगा।''
12 दिसंबर 1996 को हुई थी संधि
बता दें कि गंगा जल संधि भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा नदी के पानी को आपस में बांटने का एक समझौता है। इस पर 12 दिसंबर 1996 को नई दिल्ली में तत्कालीन प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा और बांग्लादेश की तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना ने हस्ताक्षर किए थे। यह संधि 30 साल के लिए बनाई गई थी जो इसी साल दिसंबर 2026 में पूरी होने वाली है। इस समझौते के मुताबिक, गर्मी के दिनों में गंगा के जल का बंटवारा होता है। इस संधि के तहत दोनों देशों के बीच पानी बांटने का फार्मुला यह है कि अगर फरक्का बैराज पर पानी 70,000 क्यूसेक से अधिक है, तो भारत और बांग्लादेश को तय कोटे (जैसे भारत को 35,000 से 40,000 क्यूसेक) के तहत पानी मिलता है। और पानी 70,000 क्यूसेक से कम होने पर दोनों देश इसे आधा-आधा (50-50%) बांटते हैं।
