August 22, 2026

Bihar Police : AK-47, INSAS और SLR के इस्तेमाल पर बिहार पुलिस का नया नियम, छात्र प्रदर्शन में भारी हथियारों के इस्तेमाल पर बड़ा फैसला!

Bihar Police : बिहार में छात्र प्रदर्शन के दौरान AK-47 के इस्तेमाल को लेकर उठे विवाद के बाद बिहार पुलिस ने भारी हथियारों के इस्तेमाल को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट कर दिया है कि अब AK-47, INSAS और SLR जैसी असॉल्ट राइफलों का इस्तेमाल प्रदर्शनकारियों या सामान्य भीड़ को नियंत्रित करने के लिए नियमित रूप से नहीं किया जाएगा। इन हथियारों को केवल अत्यंत गंभीर और असाधारण परिस्थितियों में ही अंतिम विकल्प के तौर पर इस्तेमाल करने की अनुमति होगी।

पुलिस मुख्यालय के इस फैसले को सीवान में हुए छात्र आंदोलन के दौरान सामने आए विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रश्नपत्र लीक के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान एक पुलिसकर्मी के AK-47 से फायरिंग करने का वीडियो सामने आने के बाद पूरे मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक तूल पकड़ लिया था। विपक्ष ने सरकार और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे।

भीड़ नियंत्रण के लिए पहले अपनाने होंगे दूसरे तरीके

नए नियमों के तहत पुलिस को किसी भी प्रदर्शन या उग्र भीड़ की स्थिति में बल प्रयोग से पहले परिस्थितियों का आकलन करना होगा। पुलिसकर्मियों को पहले कम घातक और वैकल्पिक तरीकों से भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश करनी होगी। AK-47, INSAS और SLR जैसी राइफलों को अब सामान्य भीड़ नियंत्रण के साधन के रूप में नहीं देखा जाएगा। इनका इस्तेमाल तभी किया जा सकेगा, जब स्थिति बेहद गंभीर हो और लोगों या पुलिसकर्मियों की जान को तत्काल गंभीर खतरा पैदा हो गया हो। पुलिस मुख्यालय ने यह भी संकेत दिया है कि कार्रवाई के दौरान परिस्थितियों के अनुरूप और जरूरत के हिसाब से ही बल का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। यानी किसी भी स्थिति में जरूरत से अधिक शक्ति का प्रयोग नहीं किया जाएगा।

सीवान में छात्र प्रदर्शन के बाद बढ़ा था विवाद

जुलाई में सीवान में प्रश्नपत्र लीक के विरोध में छात्रों का प्रदर्शन हुआ था। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बन गई थी। इसी घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें एक पुलिस कांस्टेबल कथित तौर पर AK-47 चलाते हुए दिखाई दिया। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने यह मुद्दा उठाया कि आखिर छात्र प्रदर्शन और भीड़ नियंत्रण जैसी स्थिति में असॉल्ट राइफल का इस्तेमाल क्यों किया गया। मामले ने राजनीतिक रूप से भी तूल पकड़ लिया। इसके बाद सरकार की ओर से प्रशासनिक कार्रवाई की गई और सीवान के तत्कालीन एसपी पूरण कुमार झा को उनके पद से हटा दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट में बिहार सरकार ने क्या कहा?

इस पूरे मामले को लेकर बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने भी अपना पक्ष रखा था। राज्य सरकार ने बताया था कि प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी और भीड़ ने एक पुलिस कांस्टेबल को घेर लिया था। सरकार के अनुसार, कांस्टेबल ने अपनी असॉल्ट राइफल से चार राउंड फायर किए थे। हालांकि राज्य सरकार ने यह स्पष्ट किया था कि फायरिंग हवा में की गई थी और इस घटना में किसी व्यक्ति को गोली लगने या चोट पहुंचने की जानकारी नहीं थी।सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में यह भी कहा था कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ संयम से कार्रवाई की और आवश्यकता से अधिक बल का इस्तेमाल नहीं किया गया।

तेजस्वी यादव ने भी उठाया था मामला

सीवान की घटना के बाद बिहार की राजनीति में भी यह मामला चर्चा का बड़ा विषय बन गया था। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई के मुद्दे को लेकर पटना में विरोध मार्च निकाला था। प्रदर्शन के दौरान तेजस्वी यादव को हिरासत में भी लिया गया था। उन्होंने कहा था कि छात्रों को न्याय मिलने तक विपक्ष का आंदोलन जारी रहेगा। तेजस्वी यादव ने छात्र हित, बेरोजगारी, प्रश्नपत्र लीक और परीक्षाओं में पारदर्शिता जैसे मुद्दों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए थे। विपक्ष का कहना था कि छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुनने के बजाय उनके आंदोलन को दबाने की कोशिश की गई। वहीं सरकार की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस कार्रवाई को जरूरी बताया गया।

पुलिस कार्रवाई में जवाबदेही पर बढ़ा जोर

बिहार पुलिस के नए दिशा-निर्देशों के बाद अब प्रदर्शन और भीड़ नियंत्रण के दौरान पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी। पुलिसकर्मियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी हथियार का इस्तेमाल परिस्थितियों की गंभीरता के अनुसार किया जाए।

भारी हथियारों को अंतिम विकल्प बनाए जाने का फैसला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि छात्र आंदोलन, राजनीतिक प्रदर्शन और सामाजिक विरोध के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में नए नियमों का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ प्रदर्शनकारियों और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। अब देखना होगा कि बिहार पुलिस इन नए निर्देशों को जमीनी स्तर पर किस तरह लागू करती है और भविष्य में किसी भी बड़े प्रदर्शन या हिंसक स्थिति के दौरान बल प्रयोग की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी रहती है।