बिहार में साल 2026 में पंचायत चुनाव होने की संभावना नहीं है। परिसीमन, आरक्षण और वोटर लिस्ट की प्रक्रिया में वक्त लगने के कारण अब चुनाव 2027 में होने के आसार हैं।
बिहार में साल 2026 में पंचायत चुनाव होने की संभावना नहीं है। (Ai Image)
- Published: 12 Aug 2026, 06:51 PM IST
- Last Updated: 12 Aug 2026, 06:51 PM IST
Bihar Panchayat Elections 2026: बिहार के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का इंतजार कर रहे लोगों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। इस साल यानी 2026 में बिहार में पंचायत चुनाव होने की कोई संभावना नहीं है। राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनावों के परिसीमन (Delimitation) की तैयारियां शुरू कर दी हैं, जिसके चलते पूरी चुनावी प्रक्रिया में लंबा समय लगने वाला है।
जानकारों के मुताबिक, परिसीमन, नया आरक्षण रोस्टर और मतदाता सूची तैयार करने जैसे चरणों को पूरा करने में लगभग एक साल का वक्त लग सकता है, जिस वजह से अब चुनाव साल 2027 में ही आयोजित किए जाने के आसार हैं।
परिसीमन और अन्य प्रक्रियाओं में लगेगा समय
बिहार पंचायत चुनाव के परिसीमन को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग के स्तर पर बैठकों का सिलसिला शुरू हो चुका है। आधिकारिक अनुमानों के अनुसार, त्रिस्तरीय पंचायत आम चुनाव के वास्ते परिसीमन का काम पूरा होने में ही 6 महीने से ज्यादा का समय लग सकता है।
इसके बाद पदवार आरक्षण तय करने, नई मतदाता सूची तैयार करने और मतदान केंद्रों का निर्धारण जैसी अन्य जरूरी प्रक्रियाओं को पूरा करने में लगभग 6 महीने का अतिरिक्त समय और लगेगा।
उल्लेखनीय है कि राज्य में पंचायती राज संस्थाओं का मौजूदा कार्यकाल इसी साल नवंबर-दिसंबर के दौरान समाप्त हो रहा है। इससे पहले आखिरी बार पंचायत चुनाव सितंबर से दिसंबर 2021 के बीच संपन्न कराए गए थे।
2011 की जनगणना के आधार पर होगा परिसीमन
राज्य निर्वाचन आयोग नए मानकों के तहत वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाकर गांवों की जनसंख्या और भौगोलिक स्थिति का आकलन करेगा। इसके बाद 'बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006' के प्रावधानों के तहत ग्राम पंचायत क्षेत्र, प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र, पंचायत समिति और जिला परिषद क्षेत्रों की सीमाओं का निर्धारण किया जाएगा।
परिसीमन शुरू करने से पूर्व आयोग को स्पष्ट दिशा-निर्देश (गाइडलाइन) तैयार करने होंगे, जिनके आधार पर सभी जिलों में जिला निर्वाचन पदाधिकारी यानी डीएम के माध्यम से यह काम पूरा कराया जाएगा।
मानचित्र तैयार करने और आपत्तियां मांगने की प्रक्रिया
सीमांकन के इस चरण के बाद मैपिंग (मानचित्र तैयार करने) और गणना का काम किया जाएगा। इसमें ग्रामीण इलाकों के वास्ते सीईबी ले-आउट मैप तैयार करने के साथ-साथ प्रखंडवार जनसंख्या और मतदाताओं की गिनती की जाएगी।
परिसीमन का काम पूरा होने के बाद इसका अंतिम रूप से गजट प्रकाशन किया जाएगा, ताकि आम जनता से आपत्तियां और सुझाव मांगे जा सकें। उन आपत्तियों का विधिवत निराकरण करने के बाद ही परिसीमन की पूरी प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।
परिसीमन के बाद तय होगा नया आरक्षण रोस्टर
पंचायत चुनाव क्षेत्रों के परिसीमन में जिलाधिकारियों की भूमिका बेहद अहम होगी। आयोग के दिशा-निर्देशों और देखरेख में सभी जिलों के जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह डीएम नए पंचायत क्षेत्रों की घोषणा और सीमांकन का जिम्मा संभालेंगे। परिसीमन का कार्य संपन्न होने के पश्चात ही नया आरक्षण रोस्टर तैयार किया जाएगा, जिसमें अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) और महिलाओं के लिए सीटों का अनुपात तय किया जाएगा।