Bihar News: पटना हाईकोर्ट ने एक्साइज डिपार्टमेंट से लेकर परिवहन विभाग के अधिकारियों-कर्मियों के कार्यशैली की पोल खोल दी. न्यायालय ने उक्त मामले में आर्थिक अपराध इकाई को केस दर्ज कर जांच के आदेश दिए. इसके बाद अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. चार सरकारी सेवक जेल चले गए, अब बारी वरीय अधिकारियों की है. पूरे मामले में गोपालगंज जिले के तत्कालीन उत्पाद अधीक्षक और तत्कालीन जिला परिवहन पदाधिकारी पर भी तलवार लटक रही है. आर्थिक अपराध इकाई ने स्पष्ट किया है कि, इस मामले में शामिल अन्य की भूमिका का सत्यापन एवं आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है.
हाईकोर्ट के आदेश पर ईओयू कर रही जांच
बता दें, पटना हाईकोर्ट 4 नवंबर 2025 को आदेश पारित किया. इसके बाद आर्थिक अपराध इकाई ने याचिकाकर्ता राधे श्याम की याचिका के आधार पर केस सं- 42/2025 दर्ज किया. जिसमें तत्कालीन उत्पाद अधीक्षक गोपालगंज एवं नीलामी समिति के सभी सदस्यों को अभियुक्त बनाया गया. साथ बीडर रियाजुल आलम के खिलाफ भी केस दर्ज की गई।
बदले हुए नंबर से गाड़ी की कर दी गई नीलामी
मामला यह है कि स्कॉर्पियो गाड़ी BR 06PD 9070 गोपालगंज के सिधवलिया थाना क्षेत्र में 19 जून 2020 को 340 लीटर शराब से साथ जब्त किया गया था. इस संबंध में सिधवलिया थाने में केस दर्ज किया गया. अनुसंधानकर्ता पुलिस अवर निरीक्षक राजेंद्र राम को बनाया गया. वो वाहन बदले हुए रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट- BR06PD 9070 के साथ पकड़ा गया, जबकि इंजन और चेचिस नंबर के आधार पर उसका रजिस्ट्रेशन नंबर JH 01CJ 7840 होना चाहिए था .
कहां हुई चूक....
दरअसल, उक्त वाहन को रजिस्ट्रेशन नंबर BR 06PD 9070 मानते हुए नीलाम कर दिया गया. इससे वाहन संख्या JH 01CJ 7840 के असली मालिक राधे श्याम को अपना पक्ष रखने का मौका नहीं मिला. वहीं राधेश्याम सिंह द्वारा इस नंबर के स्कॉर्पियो वाहन के चोरी हो जाने को लेकर दिनारा थाना में 349/ 2019 केस दर्ज कराया गया था .
नीलामी मामले में चौथी गिरफ्तारी एमवीआई की हुई
आर्थिक अपराध इकाई द्वारा कांड के अनुसंधान में अप्राथमिक अभियुक्त (नीलामी समिति के सदस्य) गोपालगंज के तत्कालीन मोटर यान निरीक्षक सुनील कुमार सिंह को गिरफ्तार किया गया है. जप्त स्कॉर्पियो की नीलामी प्रक्रिया के दौरान वाहन की नीलामी से पूर्व भौतिक सत्यापन नहीं करने के प्रमाण मिले हैं. इनके द्वारा बिना जांचे ही गाड़ी का मूल्यांकन प्रतिवेदन समर्पित करने के आरोप हैं. साथ ही, इनके द्वारा उक्त वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर BR 06pd 9070 एवं न्यूनतम निर्धारित मूल्य अंकित किया गया, लेकिन इन्होंने इंजन एवं चेचिस नंबर का उल्लेख नहीं किया था. इंजन और चेचिस नंबर के आधार पर उक्त गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर JH 01CJ 7840 होना चाहिए था. नतीजा यह हुआ कि उक्त वाहन को रजिस्ट्रेशन नंबर BR 06pd 9070 मानते हुए नीलाम कर दिया गया.
क्या तत्कालीन उत्पाद अधीक्षक और डीटीओ भी आएंगे लपेटे में ?
इस मामले में आर्थिक अपराध इकाई ने तत्कालीन पुलिस अवर निरीक्षक राजेंद्र राम, जिला परिवहन कार्यालय गोपालगंज के तत्कालीन लिपिक कन्हैया लाल एवं तत्कालीन डाटा एंट्री ऑपरेटर गोपालगंज हैदर अली अंसारी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. अब एमवीआई सुनील कुमार सिंह भी ईओयू के हत्थे चढ़ गए हैं. आर्थिक अपराध इकाई ने बताया है कि इस कांड के अन्य पहलू की भी जांच की जा रही है. साथ ही इस मामले में सम्मिलित अन्य व्यक्तियों की भूमिका का सत्यापन एवं आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है.