July 28, 2026

Bihar News: बिहार में बनने जा रही है नई फोर लेन सड़क और पुल, 1564 करोड़ की परियोजना का टेंडर जारी, 30 किमी में सिमटेगी 100 किमी की दूरी

PATNA: गंगा नदी के दोनों किनारों पर बसे बिहार और उत्तर प्रदेश के लाखों लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। वर्षों से सड़क और स्थायी पुल की मांग कर रहे लोगों का इंतजार अब खत्म होने की उम्मीद जगी है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने नई फोर लेन सड़क के साथ साथ गंगा नदी पर पुल निर्माण के लिए टेंडर जारी कर दिया है। 

ये नई सड़क बिहार के आरा से उत्तर प्रदेश के बैरिया को जोड़ेगी। इस परियोजना के तहत महुली गंगा घाट पर चार लेन का स्थायी पुल बनाया जाएगा, जिससे बिहार के भोजपुर जिले के आरा और उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के बैरिया के बीच सीधा सड़क संपर्क स्थापित हो जाएगा। 

NHAI ने जारी किया टेंडर

करीब 1,564 करोड़ रुपये की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना की कुल लंबाई 27.062 किलोमीटर होगी। एनएचएआई ने इसके निर्माण के लिए 3 जुलाई को निविदा जारी कर दी है। संभावना है कि 20 अगस्त को टेंडर खोले जाएंगे, जिसके बाद निर्माण एजेंसी का चयन किया जाएगा।

गंगा की वजह से बढ़ जाती है 100 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी

आरा और बैरिया के बीच सीधी दूरी महज 30 किलोमीटर है, लेकिन गंगा नदी के कारण दोनों शहरों के बीच कोई स्थायी पुल नहीं होने से लोगों को लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। वर्तमान में आरा से बैरिया जाने के लिए लोगों को या तो छपरा के रास्ते करीब 115 किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती है या फिर बक्सर होकर लगभग 100 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है।

महुली गंगा पुल बनने के बाद दोनों शहरों के बीच की दूरी फिर से करीब 30 किलोमीटर रह जाएगी। वहीं पटना से बैरिया की दूरी भी घटकर लगभग 90 किलोमीटर हो जाएगी। इससे यात्रा का समय कम होगा, ईंधन की बचत होगी और परिवहन की लागत भी घटेगी।

चार लेन सड़क और आधुनिक पुल से जुड़ेगा बिहार-यूपी

यह परियोजना इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (EPC) मोड पर बनाई जाएगी। प्रस्तावित फोरलेन सड़क राष्ट्रीय राजमार्ग-31 और ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के जीन बाबा स्थान (बैरिया) से शुरू होगी। इसके बाद यह खवासपुर, महुली गंगा घाट होते हुए आरा के निकट राष्ट्रीय राजमार्ग-922 से जुड़ जाएगी। इस परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा महुली गंगा घाट पर बनने वाला स्थायी चार लेन पुल होगा, जो दशकों से चली आ रही आवागमन की समस्या का स्थायी समाधान बनेगा।

छह महीने ही मिलता है पीपा पुल का सहारा

वर्तमान में महुली गंगा घाट पर हर वर्ष केवल छह महीने के लिए पीपा पुल बनाया जाता है। बरसात शुरू होने से पहले इस पुल को हटा दिया जाता है क्योंकि गंगा का जलस्तर बढ़ जाता है। इसके बाद लाखों लोगों को कई जिलों का चक्कर लगाकर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ता है। कई ग्रामीण आज भी नाव के सहारे गंगा पार करने को मजबूर हैं, जिससे हर साल हादसों का खतरा बना रहता है। स्थायी पुल बनने के बाद लोगों को सालभर निर्बाध आवागमन की सुविधा मिलेगी।

व्यापार, शिक्षा और रोजगार को मिलेगा बड़ा लाभ

महुली गंगा पुल केवल एक सड़क परियोजना नहीं है, बल्कि यह बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ी उपलब्धि साबित होगी। पुल बनने के बाद कृषि उत्पादों का परिवहन आसान होगा। वहीं, व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। छात्रों को भी शिक्षा संस्थानों तक पहुंचने में सुविधा होगी। मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं तक जल्दी पहुंच मिलेगी और रोजगार और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे। बिहार और उत्तर प्रदेश के बीच औद्योगिक और व्यावसायिक संपर्क मजबूत होगा। इसके साथ ही सदियों पुराने सामाजिक और पारिवारिक रिश्ते और मजबूत होंगे। 

आरा और बलिया के बीच वर्षों से रोटी-बेटी का रिश्ता रहा है। दोनों क्षेत्रों के लोग सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक रूप से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। शादी-विवाह, धार्मिक आयोजनों, व्यापार और पारिवारिक संबंधों के कारण दोनों जिलों के बीच लगातार आवाजाही होती है। लेकिन स्थायी पुल नहीं होने के कारण लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। पुल बनने के बाद इन रिश्तों को नई मजबूती मिलेगी और दोनों क्षेत्रों के बीच संपर्क पहले से कहीं अधिक आसान हो जाएगा।

पूर्व पीएम चंद्रशेखर ने भी की थी मांग

महुली गंगा घाट पर स्थायी पुल की मांग कई दशकों से उठती रही है। स्थानीय लोगों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने समय-समय पर इस मुद्दे को उठाया है। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने भी वर्ष 2006 में जयप्रकाश नगर में आयोजित एक सभा के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने इस पुल के निर्माण की मांग रखी थी। अब एनएचएआई द्वारा टेंडर जारी किए जाने के बाद लोगों को उम्मीद है कि वर्षों से लंबित यह परियोजना जल्द धरातल पर उतरेगी और बिहार-उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास को नई दिशा मिलेगी।

क्षेत्र के विकास में साबित होगी मील का पत्थर

विशेषज्ञों का मानना है कि महुली गंगा पुल बनने के बाद न केवल आवागमन आसान होगा, बल्कि पर्यटन, व्यापार, कृषि और उद्योग को भी नई रफ्तार मिलेगी। लंबे समय से अलग-थलग पड़े सीमावर्ती क्षेत्रों को बेहतर सड़क संपर्क मिलेगा और दोनों राज्यों के बीच आर्थिक गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यदि निर्धारित समय पर टेंडर प्रक्रिया पूरी होती है और निर्माण कार्य शुरू होता है, तो आने वाले वर्षों में यह पुल बिहार और उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाली सबसे महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना परियोजनाओं में से एक साबित हो सकता है।