September 3, 2026

Bihar NCL Certificate : बिहार में क्रीमीलेयर पर सियासी घमासान के बीच सरकार का बड़ा पत्र, NCL प्रमाण पत्र को लेकर जिलाधिकारियों को दिए साफ निर्देश

Patna News: बिहार में आरक्षण और क्रीमीलेयर को लेकर सियासी बहस के बीच सरकार ने क्रीमीलेयर रहित यानी Non-Creamy Layer (NCL) Certificate को लेकर बड़ा प्रशासनिक निर्देश जारी किया है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से सभी जिलाधिकारियों को भेजे गए पत्र में NCL प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को लेकर पहले से लागू नियमों का सख्ती से पालन कराने को कहा गया है। खास बात यह है कि विभाग ने स्पष्ट किया है कि NCL प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदकों को पहले अलग-अलग जाति, आवास और आय प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अनिवार्य रूप से कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है।

सरकार के इस पत्र को ऐसे समय में अहम माना जा रहा है, जब बिहार में पिछड़ा वर्ग (BC) और अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) के आरक्षण तथा क्रीमीलेयर को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। हालांकि, पत्र में आरक्षण की सीमा या क्रीमीलेयर की आय सीमा में कोई नया बदलाव घोषित नहीं किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य NCL प्रमाण पत्र जारी करने की मौजूदा प्रक्रिया को स्पष्ट करना और अधिकारियों को पुराने विभागीय निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराना है।

NCL प्रमाण पत्र के लिए पहले तीन प्रमाण पत्र बनवाना जरूरी नहीं

सामान्य प्रशासन विभाग के सरकार के अवर सचिव दिवाकर मणि की ओर से जारी पत्र में पूर्व में जारी विभागीय परिपत्रों का हवाला दिया गया है। इनमें खास तौर पर 16 अगस्त 2012 के परिपत्र संख्या 11490 के प्रावधानों का उल्लेख किया गया है।इस व्यवस्था के मुताबिक NCL प्रमाण पत्र जारी करने के लिए जाति, आवास और आय से संबंधित जानकारी जरूरी है, लेकिन आवेदक के लिए यह अनिवार्य नहीं है कि वह पहले इन तीनों के अलग-अलग प्रमाण पत्र बनवाए और फिर NCL प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करे।यानी प्रशासनिक स्तर पर सीधे क्रीमीलेयर रहित प्रमाण पत्र जारी किया जा सकता है। यह निर्देश उन अभ्यर्थियों के लिए राहत भरा है, जिन्हें सरकारी नौकरी, प्रतियोगी परीक्षा या अन्य सरकारी प्रयोजन के लिए NCL प्रमाण पत्र की जरूरत पड़ती है।

एक ही NCL प्रमाण पत्र में जाति और आवास की जानकारी

सरकार के पत्र में 16 अगस्त 2012 के परिपत्र की कंडिका-6 का भी उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार क्रीमीलेयर रहित प्रमाण पत्र में आवेदक की जाति और आवास का विवरण भी दर्ज रहता है। ऐसे में NCL प्रमाण पत्र को जाति प्रमाण पत्र और आवास प्रमाण पत्र के रूप में भी मान्य किए जाने की व्यवस्था है। इसका सीधा मतलब है कि आवेदक को एक ही जानकारी के लिए अलग-अलग दस्तावेज तैयार कराने और बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। सरकार ने अधिकारियों को इसी प्रक्रिया का पालन कराने का निर्देश दिया है, ताकि प्रमाण पत्र बनवाने वाले लोगों को अनावश्यक कागजी प्रक्रिया से परेशान न होना पड़े।

पुराने NCL प्रमाण पत्र वालों को भी बड़ी राहत

सरकार के निर्देश में पुराने NCL प्रमाण पत्र को लेकर भी महत्वपूर्ण व्यवस्था दोहराई गई है। विभाग ने 5 दिसंबर 2017 के परिपत्र संख्या 15440 का हवाला देते हुए कहा है कि क्रीमीलेयर रहित प्रमाण पत्र को बार-बार जारी करने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।यदि किसी व्यक्ति के पास पहले से NCL प्रमाण पत्र है और वर्तमान परिस्थितियों में भी वह क्रीमीलेयर की श्रेणी में नहीं आता है, तो निर्धारित स्वयं शपथ पत्र (फॉर्म-XVIII B) के आधार पर पहले जारी प्रमाण पत्र को वैध माना जा सकता है। इससे उन आवेदकों को राहत मिल सकती है जिन्हें हर बार नई भर्ती या परीक्षा के आवेदन के समय पुराने प्रमाण पत्र को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ता है।

माता-पिता की आय की गणना पर भी स्पष्ट निर्देश

NCL प्रमाण पत्र को लेकर सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक आय की गणना है। सरकार के पत्र में इस संबंध में भी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने कहा है कि केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाए। विशेष रूप से माता-पिता के वेतन से होने वाली आय और कृषि से होने वाली आय को जोड़कर वार्षिक आय निर्धारित नहीं करने से संबंधित प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।

यानी NCL प्रमाण पत्र जारी करते समय अधिकारियों को निर्धारित नियमों के अनुसार ही आय का आकलन करना होगा। किसी आवेदक की पात्रता तय करते समय नियमों से अलग जाकर मनमाने तरीके से आय जोड़ने या घटाने की प्रक्रिया नहीं अपनाई जानी चाहिए।

सरकारी नौकरी और प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहद जरूरी है NCL

बिहार में BC और EBC वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए NCL प्रमाण पत्र कई सरकारी नौकरियों और प्रतियोगी परीक्षाओं में महत्वपूर्ण दस्तावेज है। विभिन्न भर्ती विज्ञापनों में बिहार सरकार के प्रयोजनार्थ क्रीमीलेयर रहित प्रमाण पत्र की मांग की जाती है।ऐसे में प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया सरल होने से हजारों अभ्यर्थियों को फायदा मिल सकता है। खासकर वे उम्मीदवार जो भर्ती आवेदन की अंतिम तारीख के करीब प्रमाण पत्र बनवाने की कोशिश करते हैं, उनके लिए अलग-अलग दस्तावेज बनवाने की प्रक्रिया कम होने से समय की बचत हो सकती है।

ऑनलाइन भी उपलब्ध है आवेदन की सुविधा

बिहार सरकार की मौजूदा ऑनलाइन सेवा व्यवस्था में भी बिहार सरकार के प्रयोजनार्थ NCL प्रमाण पत्र के लिए आवेदन की सुविधा उपलब्ध है। प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया अंचल, अनुमंडल और जिला स्तर पर संचालित होती है।ऑनलाइन व्यवस्था के तहत प्रमाण पत्र को पोर्टल के अलावा SMS, ईमेल, DigiLocker और RTPS/CSC जैसे माध्यमों से उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी बताई गई है।इससे सरकार का उद्देश्य प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक और पारदर्शी बनाना है।

अधिकारियों को 100 फीसदी पालन का आदेश

सामान्य प्रशासन विभाग ने पत्र में कहा है कि उसे कुछ स्रोतों से जानकारी मिली है कि NCL प्रमाण पत्र जारी करने के संबंध में विभाग की ओर से पहले जारी किए गए निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं हो रहा है। इसी वजह से सभी जिलाधिकारियों और संबंधित अधीनस्थ अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि विभागीय परिपत्रों में दिए गए प्रावधानों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए।सरकार के इस निर्देश का सबसे बड़ा संदेश यही है कि NCL प्रमाण पत्र बनवाने वाले आम लोगों को अनावश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया में नहीं उलझाया जाए और पहले से निर्धारित नियमों के मुताबिक प्रमाण पत्र जारी किया जाए।

आरक्षण की राजनीति के बीच क्यों महत्वपूर्ण है यह पत्र?

बिहार में आरक्षण और क्रीमीलेयर को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच सरकार का यह पत्र इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें NCL प्रमाण पत्र की प्रक्रिया से जुड़े कई पुराने नियमों को एक बार फिर स्पष्ट किया गया है। हालांकि, इस पत्र को क्रीमीलेयर की नई सीमा या आरक्षण नीति में बदलाव का आदेश नहीं माना जाना चाहिए। पत्र का फोकस मुख्य रूप से प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर है। सरकार ने अधिकारियों को बताया है कि पहले से लागू नियमों के मुताबिक NCL प्रमाण पत्र जारी किया जाए और आवेदकों से अनावश्यक रूप से अतिरिक्त प्रमाण पत्र या दस्तावेज नहीं मांगे जाएं।

ऐसे में बिहार के BC/EBC अभ्यर्थियों के लिए इस पत्र का सीधा मतलब है—NCL प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया में नियमों के नाम पर अतिरिक्त परेशानी नहीं होनी चाहिए। अब जिलों में संबंधित अधिकारियों को इन्हीं निर्देशों के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।