Bihar Flood Control Plan: बिहार के सीएम सम्राट चौधरी ने कोसी नदी में आने वाली बाढ़ से निपटने के लिए एक लॉन्ग-टर्म प्लान बनाने का निर्देश दिया है। इसमें गाद प्रबंधन और नए बैराज के निर्माण पर फोकस रहेगा। इसके अलावा उन्होंने सड़क और ऊर्जा से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट्स का भी रिव्यू किया।
Bihar Flood Control: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को अधिकारियों को कोसी नदी के लिए एक लॉन्ग-टर्म बाढ़ नियंत्रण प्लान बनाने का निर्देश दिया। जल संसाधन, सड़क और ऊर्जा सेक्टर से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स की समीक्षा करते हुए उन्होंने गाद (सिल्ट) प्रबंधन और एक नया बैराज बनाने पर खास जोर दिया।
मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के मुताबिक, सीएम ने गंगा, गंडक और कोसी नदी से जुड़े प्रोजेक्ट्स की समीक्षा बैठक की। इस दौरान बक्सर-भागलपुर 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, 2400 मेगावाट (3x800 मेगावाट) के पीरपैंती थर्मल पावर प्रोजेक्ट और पीएम-कुसुम (PM-KUSUM) योजना पर भी चर्चा हुई। सीएम ने कृषि फीडरों के सोलराइजेशन में तेजी लाने और सरकारी ट्यूबवेल को सौर ऊर्जा से चलाने के निर्देश दिए।
कोसी के लिए लॉन्ग-टर्म बाढ़ नियंत्रण प्लान
कोसी नदी के प्रोजेक्ट्स का रिव्यू करते हुए सीएम चौधरी ने कहा कि यह नदी एक "डायनेमिक और इंटरकनेक्टेड सिस्टम" है। उन्होंने कहा कि हमें सिर्फ हर साल आने वाली बाढ़ से निपटने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि एक लॉन्ग-टर्म प्लान पर काम करना होगा। उन्होंने अधिकारियों से कोसी इलाके को एक मल्टी-डिस्ट्रिक्ट रिवर कॉरिडोर मानकर काम करने को कहा, जिसमें लोग, संपत्ति और कनेक्टिविटी सब शामिल हों। सीएमओ के अनुसार, मुख्यमंत्री ने गाद प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने और नया बैराज बनाने के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
गंडक नदी प्रोजेक्ट की समीक्षा के दौरान सीएम ने तटबंधों (embankments) पर सोलर प्लांट लगाने की दिशा में काम करने को कहा।
बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का रिव्यू
सड़क कनेक्टिविटी
मुख्यमंत्री ने बक्सर-भागलपुर 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के काम का भी जायजा लिया। इस प्रोजेक्ट की कुल लंबाई 348.196 किलोमीटर है, जिसमें से 336.205 किलोमीटर हिस्सा बिहार में और करीब 12 किलोमीटर यूपी में आता है। इसके अलावा उन्होंने गंगा-अंबिका पथ (बिदुपुर-दिघवारा), नारायणी पथ (दरिहारा-डुमरिया घाट) और विश्वामित्र पथ (बक्सर-आरा-मनेर) की प्रोग्रेस भी जांची। उन्होंने अधिकारियों को तय समय के अंदर इन प्रोजेक्ट्स को पूरा करने का निर्देश दिया।
ऊर्जा और कृषि
सीएमओ के मुताबिक, ऊर्जा विभाग की समीक्षा के दौरान 3x800 मेगावाट क्षमता वाले पीरपैंती थर्मल पावर प्रोजेक्ट पर चर्चा हुई। बांका थर्मल पावर प्लांट के काम का भी स्टेटस चेक किया गया। सीएम ने पीएम-कुसुम योजना के तहत कृषि फीडरों को सोलर से जोड़ने के काम का जायजा लिया और इसे जल्द से जल्द पूरा करने को कहा। उन्होंने कृषि सेक्टर में बिना रुकावट बिजली सप्लाई सुनिश्चित करने के साथ-साथ सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने की अहमियत पर जोर दिया। सरकारी ट्यूबवेल को भी सोलर एनर्जी से चलाने के काम में तेजी लाने को कहा गया है।
स्थायी समाधान की जरूरत
सीएमओ के अनुसार, सीएम चौधरी ने कहा कि बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए एक पक्का एक्शन प्लान बनना चाहिए। उन्होंने गंगा, कोसी और गंडक नदियों के व्यवस्थित प्रबंधन की बात कही। इसमें दोनों तरफ के तटबंधों को मजबूत करना और उन पर फोर-लेन सड़क बनाना शामिल है।
मुख्यमंत्री ने कहा, "हमारा मकसद इन नदी घाटियों में बाढ़ से प्रभावित लोगों को स्थायी राहत देना और इस इलाके को एक समृद्ध क्षेत्र में बदलना है।" उन्होंने कोसी क्षेत्र के शुरुआती 100 किलोमीटर के हिस्से में 'डबल शीट पाइलिंग' की जरूरत पर भी जोर दिया, जिसे हाई-रिस्क जोन माना गया है। उन्होंने बताया कि नदियों से गाद निकालने से पानी के स्टोरेज और बहाव को कंट्रोल करने में मदद मिलेगी।
काम में तेजी लाने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि वे जल संसाधन, सड़क और ऊर्जा सेक्टर के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए रेगुलर मॉनिटरिंग करें। साथ ही, विभागों के बीच आपसी तालमेल बनाकर प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करें।
इस बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल, ऊर्जा विभाग के सचिव अजय यादव, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह और बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक सौरभ जोरवाल मौजूद रहे।