Updated: Friday, October 23, 2026, 20:03 [IST]
Bihar Siwan Firecracker Factory Blast: बिहार के सीवान में पटाखे बनाने के दौरान हुए भीषण धमाके में 7 लोगों की मौत हो गई। हादसा जामो थाना क्षेत्र के अलमापुर गांव में एक मकान के अंदर हुआ, जहां पटाखे बनाए जा रहे थे। धमाके इतने तेज थे कि पूरा मकान ढह गया और आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, करीब डेढ़ घंटे तक रुक-रुककर धमाके होते रहे। हादसे में पति-पत्नी और उनकी बेटी की भी मौत होने की जानकारी सामने आई है। सूचना मिलने के बाद पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं। दमकल की गाड़ियों की मदद से आग बुझाने का प्रयास किया गया। पुलिस अब हादसे की वजह और पटाखा निर्माण के लिए जारी लाइसेंस की वैधता की जांच कर रही है। आइए जानते हैं कि कैसे हुआ विस्फोट?
Bihar Siwan Firecracker Factory Blast Reason: कैसे हुआ हादसा?
घटना सीवान जिले के जामो थाना क्षेत्र के अलमापुर गांव की है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, एक मकान में पटाखे बनाए जा रहे थे। इसी दौरान अचानक धमाका हुआ और देखते ही देखते आग फैल गई। इसके बाद लगातार कई धमाके होने लगे। धमाकों की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि करीब डेढ़ घंटे तक रुक-रुककर विस्फोट होते रहे। हादसे के बाद घटनास्थल और आसपास के इलाके में मलबा बिखर गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना में 7 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। इनमें एक दंपती और उनकी बेटी भी शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि, पुलिस के मुताबिक, शुरुआती चरण में शवों की पहचान नहीं हो सकी थी।
मौके पर पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीम
धमाके की सूचना मिलते ही सदर एसडीओ आशुतोष गुप्ता, महाराजगंज एसडीपीओ अमन और बड़हरिया, जामो तथा गोरेयाकोठी समेत कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची। दमकल की गाड़ियों की मदद से आग पर काबू पाने की कोशिश की गई। अधिकारियों ने घटनास्थल का जायजा लिया और हादसे से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटानी शुरू की। एसडीपीओ के मुताबिक, आग बुझाने के बाद घटनास्थल की विस्तृत जांच की जाएगी। जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि धमाका किस वजह से हुआ और मकान में पटाखा बनाने के लिए किस तरह की सामग्री रखी गई थी।
20 साल पहले लिया था पटाखा बनाने का लाइसेंस
सीवान के एसपी भारत सोनी ने बताया कि संबंधित व्यक्ति ने करीब 20 साल पहले पटाखे बनाने का लाइसेंस लिया था। हालांकि, हादसे के समय लाइसेंस वैध था या नहीं, इसकी जांच की जा रही है। यह पहलू इसलिए अहम है, क्योंकि पटाखों के निर्माण और भंडारण में विस्फोटक सामग्री का इस्तेमाल होता है। ऐसे काम के लिए निर्धारित नियमों, सुरक्षा मानकों और लाइसेंस की शर्तों का पालन जरूरी है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि पटाखे बनाने की जगह पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम थे या नहीं और घनी आबादी वाले क्षेत्र में इस तरह का काम किन शर्तों के तहत किया जा रहा था।
घनी आबादी के बीच चल रहा था पटाखा निर्माण
जिस मकान में धमाका हुआ, वह घनी आबादी वाले इलाके में स्थित बताया जा रहा है। ऐसे क्षेत्र में पटाखे बनाने या बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री रखने से हादसे का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि मकान में कितनी मात्रा में बारूद या अन्य ज्वलनशील सामग्री रखी गई थी। विस्फोट का सटीक कारण भी जांच के बाद ही सामने आएगा।
दिवाली से पहले हादसे ने बढ़ाई चिंता
दिवाली से पहले पटाखों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे समय में पटाखों के निर्माण, भंडारण और बिक्री से जुड़े सुरक्षा नियमों का पालन बेहद जरूरी हो जाता है। सीवान की घटना ने पटाखा निर्माण इकाइयों की सुरक्षा व्यवस्था और लाइसेंस की जांच की जरूरत को फिर सामने ला दिया है। हालांकि, बिहार में इस इकाई से कितने पटाखों की सप्लाई होती थी और इसका कारोबार किन इलाकों तक फैला था, इसकी जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है। प्रशासन की जांच से ही स्पष्ट होगा कि हादसे के पीछे तकनीकी चूक, सुरक्षा नियमों का उल्लंघन या कोई अन्य कारण जिम्मेदार था।
अब जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे?
- धमाका किस वजह से हुआ और क्या पटाखे बनाने के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा था?
- पटाखा निर्माण का लाइसेंस हादसे के समय वैध था या नहीं?
- घनी आबादी वाले इलाके में पटाखे बनाने और सामग्री रखने की अनुमति किन शर्तों पर दी गई थी?
- मकान में कितनी विस्फोटक सामग्री रखी गई थी और उसकी निगरानी कैसे हो रही थी?
- क्या इस इकाई से स्थानीय बाजारों या दूसरे जिलों में पटाखों की सप्लाई होती थी?