पटना में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में लेफ्ट संगठनों (AISA और RYA) ने 25 जुलाई को बिहार बंद का आह्वान किया है। नीट पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर छात्र आंदोलन पूरे राज्य में फैल गया है।
पटना में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में लेफ्ट संगठनों (AISA और RYA) ने 25 जुलाई को बिहार बंद का आह्वान किया है।
- Published: 24 Jul 2026, 03:53 PM IST
- Last Updated: 24 Jul 2026, 03:53 PM IST
Bihar Bandh 25 July: बिहार में नीट पेपर लीक मामले को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब काफी तेज हो गया है। पटना में बुधवार को प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं पर हुए पुलिसिया लाठीचार्ज के कड़े विरोध में अब लेफ्ट संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। इसके तहत आगामी 25 जुलाई को संपूर्ण बिहार बंद का आधिकारिक ऐलान किया गया है।
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और राष्ट्रीय युवा आंदोलन (RYA) ने मिलकर इस बंद की घोषणा की है।
इस बंद की घोषणा काराकाट से सीपीआई माले के विधायक अरुण सिंह कुशवाहा के पटना स्थित सरकारी आवास पर गुरुवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान की गई। आइसा (AISA) बिहार के अध्यक्ष धनंजय और आरवाईए (RYA) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत कुशवाहा ने बताया कि यह फैसला पटना में लोकभवन मार्च के दौरान हुए बर्बर पुलिसिया दमन और छात्रों की अंधाधुंध गिरफ्तारी के विरोध में लिया गया है।
इसके साथ ही, आइसा ने शुक्रवार को पूरे राज्य में 'प्रतिरोध दिवस' के रूप में मनाने की भी अपील की है।
क्या हैं मुख्य आरोप?
इस पूरे घटनाक्रम पर रोष व्यक्त करने वालों में आइसा के राज्य सचिव दीपांकर, राज्य उपाध्यक्ष सबा आफरीन, पालीगंज के विधायक संदीप सौरभ और आरवाईए के राज्य सचिव शिवप्रकाश रंजन शामिल रहे।
इन सभी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं पर पुलिस ने क्रूरतापूर्वक लाठीचार्ज किया। इस हिंसक कार्रवाई में सैकड़ों प्रदर्शनकारी घायल हो गए और कई छात्राओं को थानों में बिठाकर रखा गया, जिसकी वे कड़ी निंदा करते हैं।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे समेत आइसा की 9 सूत्री प्रमुख मांगें
आंदोलनकारी छात्र संगठन आइसा ने सरकार के सामने कुल 9 सूत्री मांगें रखी हैं। इन प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को पूरी तरह रद्द करना, नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 को वापस लेना, गिरफ्तार किए गए सभी छात्रों की बिना शर्त रिहाई, परीक्षाओं में 7.5 सीजीपीए की अनिवार्यता को समाप्त करना तथा प्रस्तावित उच्च शिक्षा विधेयक को वापस लेना शामिल है।
छात्र संगठनों ने अपील की है कि आम जनता और छात्र 25 जुलाई के इस बंद को पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से सफल बनाएं।
बिहार के शहर-शहर पहुंचा छात्र आंदोलन, कई जगहों पर हिंसक झड़प
राजधानी पटना में बुधवार को हुए उग्र प्रदर्शन की आग अब गुरुवार को बिहार के अन्य जिलों और शहरों तक भी पहुंच गई है। राज्य लगभग सभी प्रमुख शहरों में छात्र-छात्राओं ने सड़कों पर उतरकर मार्च निकाला और जोरदार प्रदर्शन किया।
दरभंगा, जहानाबाद और मुजफ्फरपुर जैसी जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प देखने को मिली।
कुछ स्थानों पर असामाजिक तत्वों द्वारा पथराव और तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आईं, जिसके बाद पुलिस ने कड़ा रुख अपनाते हुए लाठीचार्ज कर भीड़ को खदेड़ा।
राजधानी पटना में भी गुरुवार को साइंस कॉलेज के पास प्रदर्शन कर रहे स्टूडेंट्स पर पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा।
प्रशासन की बढ़ी बेचैनी, पुलिसकर्मियों की छुट्टियां रद्द
राज्यभर में तेजी से फैल रहे इस उग्र छात्र आंदोलन ने पुलिस और प्रशासन की नींद उड़ा दी है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बिहार के सभी पुलिसकर्मियों की छुट्टियां तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई हैं।
बुधवार देर रात ही राज्य के सभी जिलों के एसपी को पूरी तरह सतर्क रहने और हाई अलर्ट पर रहने का सख्त फरमान जारी कर दिया गया है।
प्रशासनिक हलकों में आशंका जताई जा रही है कि शुक्रवार और शनिवार को भी विरोध प्रदर्शन और अधिक उग्र रूप ले सकते हैं।