October 26, 2026

BHU और ऑस्ट्रेलिया की ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी के बीच समझौता: मानव उत्पत्ति के रहस्य सुलझाएंगे, जनवरी 2027 से अंतरराष्ट्रीय शोध शुरू होगा - Varanasi News

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) और ऑस्ट्रेलिया की ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी मिलकर मानव विकास और उसकी उत्पत्ति से जुड़े रहस्यों को समझने के लिए शोध करेंगे। दोनों विश्वविद्यालयों के बीच औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर हो गए हैं। 22 अक्टूबर को हस्ताक्षर प्रक्रिया

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इस अंतरराष्ट्रीय शोध परियोजना पर जनवरी 2027 से काम शुरू होने की तैयारी है। समझौते पर BHU की ओर से कुलसचिव राजन श्रीवास्तव और ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी की ओर से रिसर्च सर्विसेज की डिप्टी डायरेक्टर लिनेट फरकुहर ने ई-हस्ताक्षर किए। इससे इस परियोजना में BHU की भागीदारी का रास्ता साफ हो गया है।

प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे करेंगे बीएचयू टीम का लीड।

प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे करेंगे बीएचयू टीम का लीड।

मानव विकास के इतिहास को समझने पर होगा शोध

यह परियोजना ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी के प्रो. माइकल पेट्राग्लिया के नेतृत्व में चल रहे ‘एआरसी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ट्रांसफॉर्मिंग ह्यूमन ओरिजिन्स रिसर्च’ के तहत संचालित होगी। BHU के जंतु विज्ञान विभाग के प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे को इसमें पार्टनर इन्वेस्टिगेटर बनाया गया है।

प्रो. चौबे की अगुवाई में ग्लोबल साउथ यानी एशिया, अफ्रीका और अन्य विकासशील क्षेत्रों से जुड़े आंकड़े जुटाए जाएंगे। इनका वैज्ञानिक विश्लेषण कर मानव विकास के इतिहास को बेहतर तरीके से समझने की कोशिश होगी।

इस शोध का उद्देश्य मानव उत्पत्ति से जुड़े अध्ययनों में मौजूद कमियों और पुराने पूर्वाग्रहों को दूर करना तथा शोध की नई पद्धतियां विकसित करना है।

7 साल में खर्च होंगे 85 मिलियन डॉलर

इस शोध केंद्र को ऑस्ट्रेलियन रिसर्च काउंसिल से सात वर्षों के लिए 85 मिलियन डॉलर का अनुदान मिला है। परियोजना में ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी, मोनाश यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड और यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया समेत कई प्रमुख संस्थान भी शामिल हैं।

प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे के मुताबिक, शुरुआत में BHU के जंतु विज्ञान विभाग और प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग (AIHC एवं आर्कियोलॉजी) के शोधकर्ता परियोजना से जुड़ेंगे। आगे दूसरे विभागों को भी शामिल करने की योजना है।

शोध के निष्कर्ष अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित किए जाएंगे, जिससे मानव विकास से संबंधित अध्ययन को व्यापक वैज्ञानिक आधार मिल सकेगा।

स्वदेशी डेटा के अधिकारों का भी होगा ध्यान

परियोजना के तहत मानव उत्पत्ति से जुड़े आंकड़ों को सुरक्षित रखने और शोध में इस्तेमाल करने के लिए विशेष डेटाबेस बनाया जाएगा। इसके लिए अलग से समझौता तैयार किया जाएगा।

शोध के दौरान जुटाए जाने वाले स्वदेशी डेटा के प्रबंधन और स्वामित्व का अधिकार संबंधित मूल समुदायों के पास रहेगा। इसका उद्देश्य शोध को आगे बढ़ाने के साथ-साथ समुदायों के डेटा अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है।