तूमड़ा में शुरू हुआ फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट, 12 ग्राम पंचायतों के 40 गांवों का अपशिष्ट होगा वैज्ञानिक तरीके से ट्रीट; रुनाहा और डोब में भी बन रहे नए प्लांट
Bhopal News
- Published: 27 Jul 2026, 08:15 PM IST
- Last Updated: 27 Jul 2026, 08:15 PM IST
(वहीद खान) भोपाल। जिले के ग्रामीण इलाकों में अब सेप्टिक टैंक की सफाई के बाद निकलने वाले अपशिष्ट को खुले में फेंकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ग्राम पंचायत तूमड़ा में शुरू किए गए फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (FSTP) में 12 ग्राम पंचायतों के लगभग 40 गांवों से एकत्र किए जा रहे मलीय अपशिष्ट का वैज्ञानिक तरीके से उपचार किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के बाद तैयार होने वाली जैविक खाद और उपचारित पानी का उपयोग पौधों और हरित क्षेत्र के विकास में किया जाएगा।
जिला पंचायत के अनुसार, यह व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। पहले गांवों के लोगों को सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए नगर निगम या निजी वाहनों पर निर्भर रहना पड़ता था, जबकि कई मामलों में अपशिष्ट को खुले स्थानों पर फेंक दिया जाता था, जिससे प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी खतरे बढ़ जाते थे।
प्रदेश का दूसरा फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत तूमड़ा में स्थापित यह प्लांट मध्य प्रदेश का दूसरा फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट है। ग्रामीण क्षेत्रों में घरों के सेप्टिक टैंक आमतौर पर तीन से चार साल में भर जाते हैं। अब इनका अपशिष्ट सीधे प्लांट तक पहुंचाकर सुरक्षित तरीके से ट्रीट किया जाएगा, जिससे पर्यावरण को नुकसान नहीं होगा और उपयोगी संसाधन भी तैयार होंगे।
रुनाहा और डोब में भी बन रहे नए प्लांट
जिले के सभी ग्रामीण क्षेत्रों को इस सुविधा से जोड़ने की तैयारी भी शुरू हो गई है। भोपाल के 629 गांवों से निकलने वाले अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए रुनाहा और डोब में भी नए फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जा रहे हैं। इनके शुरू होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।
ग्रामीणों को मिलेगा सीधा लाभ
नई व्यवस्था लागू होने से ग्रामीणों को सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। साथ ही खुले में अपशिष्ट फेंकने की समस्या कम होगी, जिससे स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक स्वास्थ्य को भी बड़ा लाभ मिलेगा। जैविक खाद और उपचारित पानी का उपयोग कृषि एवं पौधारोपण में किया जा सकेगा, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा।