Bhopal AQI: केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के वायु प्रदूषण सर्वे में भोपाल को कोई रैंक नहीं मिली है। हालांकि, वार्ड-60 ने बेहतर प्रदर्शन कर 40 लाख रुपये का अवार्ड जीता है।
bhopal air-pollution-survey
- Published: 07 Sep 2026, 08:29 PM IST
- Last Updated: 07 Sep 2026, 08:29 PM IST
हरिभूमि,न्यूज भोपाल। राजधानी भोपाल में वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने और हवा की गुणवत्ता को बेहतर करने के तमाम दावों के बीच एक निराशाजनक तस्वीर सामने आई है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की ओर से देशभर के शहरों में वायु प्रदूषण के हालात और उसे नियंत्रित करने की दिशा में किए गए प्रयासों का जायजा लेने के लिए एक राष्ट्रव्यापी सर्वे आयोजित किया गया था। इस सर्वे में बेहतर प्रदर्शन करने वाले शहरों को रैंकिंग प्रदान की गई, लेकिन मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल इसमें कोई भी स्थान हासिल करने में नाकाम रही।
शहर में सड़कों की धूल, गाड़ियों से निकलने वाला धुआं, खुले में कचरा जलाए जाने और अन्य प्रदूषण फैलाने वाले कारकों पर रोक लगाने के लिए नगर निगम स्तर पर लगातार कोशिशें की जा रही हैं। इसके बावजूद देशव्यापी सर्वे में शहर को रैंक नहीं मिलना प्रशासन की कार्यक्षमता और प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि, जहां एक ओर पूरे शहर का प्रदर्शन कमजोर रहा, वहीं स्थानीय स्तर पर कुछ वार्डों ने राहत भरी खबर भी दी है।
वार्ड-60 को मिला 40 लाख रुपये का प्रतिष्ठित पुरस्कार
समग्र शहर की निराशाजनक स्थिति के विपरीत, भोपाल के वार्ड-60 ने पर्यावरण सुधार और वायु प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में बेहतरीन काम करते हुए दूसरा स्थान प्राप्त किया है। इस शानदार उपलब्धि के तहत इस वार्ड को 40 लाख रुपये की पुरस्कार राशि से नवाजा गया है। नगर निगम की ओर से एमआईसी (MIC) मेंबर आर.के. सिंह बघेल ने नई दिल्ली में यह अवार्ड प्राप्त किया। उन्होंने जानकारी दी कि वार्ड-60 को इस तरह का सम्मान पहले भी मिल चुका है, जो यहां किए जा रहे निरंतर प्रयासों को दर्शाता है।
वार्ड-32 का प्रदर्शन भी रहा बेहतर
राजधानी के अन्य वार्डों की तुलना में वार्ड-32 की स्थिति भी काफी संतोषजनक और बेहतर बताई गई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि जमीनी स्तर पर किए जा रहे कुछ स्थानीय प्रयास सकारात्मक परिणाम दे रहे हैं। हालांकि, एक तरफ जहां कुछ वार्ड पर्यावरण संरक्षण के लिए सम्मानित हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पूरे शहर की समग्र रैंकिंग में भोपाल का नाम न आना चिंता का विषय बना हुआ है।
धूल और वाहनों का प्रदूषण बनी बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि भोपाल में हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए सड़कों की धूल, खुले में कचरा जलाने की प्रवृत्ति, गाड़ियों का धुआं और निर्माण स्थलों से उड़ने वाले धूल कणों पर कड़ाई से अंकुश लगाना बेहद जरूरी है। बारिश का मौसम बीत जाने के बाद भी शहर की कई सड़कों पर मिट्टी और गंदगी के ढेर होने से धूल उड़ने की समस्या लगातार बनी हुई है। ऐसे में केवल कागजी अभियान चलाने के बजाय मैदानी स्तर पर नियमित निगरानी और सख्त कार्रवाई किए जाने की सख्त आवश्यकता है।