Shishir Priyadarshi On News24 Bharat Nirman Summit 2026: वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन के पूर्व डायरेक्टर शिशिर प्रियदर्शी ने सवाल उठाया कि क्या भारत सब्सिडी बढ़ाते हुए भी वित्तीय अनुशासन बनाए रख सकता है. उन्होंने न्यूज 24 के ‘भारत निर्माण समिट 2026’ में कहा कि नीति-निर्माताओं को समस्याओं को नजरअंदाज करके ‘शुतुरमुर्ग जैसा रवैया’ अपनाने के बजाय मुश्किल सवालों का सामना करना चाहिए. स्विट्जरलैंड में बिताए अपने 25 सालों के अनुभव के आधार पर उन्होंने कहा कि भारत की मिक्स्ड इकॉनमी को एक ऐसे सफर के तौर पर देखा जाना चाहिए जिसके लिए सभी जुड़े पक्षों की तरफ से लगातार और ईमानदार कोशिशों की जरूरत है.
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‘नीतिगत सोच बेहद जरूरी’
न्यूज 24 के एंकर अखिलेश आनंद के साथ बातचीत में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत के आर्थिक मॉडल को सिर्फ राजनीतिक पार्टियों के नजरिए तक सीमित नहीं किया जा सकता; इसके लिए लगातार नीतिगत सोच और उसे लागू करने की जरूरत है. प्रियदर्शी ने हाल ही में वित्तीय समझदारी, खास लक्ष्यों और समय-सीमा वाली औद्योगिक नीति, और सरकारी मदद को कुछ समय बाद खत्म करने के लिए स्पष्ट योजनाओं की वकालत भी की है.
सरकार मदद की आदत पर उठाए सवाल
शिशिर प्रियदर्शी ने कहा कि अगर लोग सरकारी मदद पाने के आदी हो जाते हैं, तो सब्सिडी और मुफ्त चीजें लंबे समय तक डिपेंडेंसी पैदा कर सकती हैं. उन्होंने इसकी तुलना शुरुआती दौर के उद्योगों को संरक्षण से की, जिसका इस्तेमाल भारत ने अपने शुरुआती सालों में घरेलू उद्योगों को विकसित करने में मदद के लिए किया था. उन्होंने कहा कि ऐसा संरक्षण शुरू में जरूरी था, लेकिन इसे हमेशा के लिए जारी नहीं रखा जा सकता, क्योंकि स्थायी संरक्षण से उद्योग इनएफिशिएंट और कॉम्पिटीशन में पिछड़ सकते हैं.
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‘बिजली उत्पादन में तरक्की’
प्रियदर्शी ने कहा कि भारत ने बिजली उत्पादन क्षमता में काफी तरक्की की है और अब तकरीबन 500 गिगावॉट क्षमता उपलब्ध है. उन्होंने कहा कि उद्योग, कृषि और शहरी इलाकों के लिए बिजली की कमी अब बड़ी चुनौती नहीं है, इसलिए नीति का ध्यान अब कुशल वितरण की ओर शिफ्ट हो गया है.
‘प्राइवेट पार्टनरशिप की जरूरत’
शिशिर प्रियदर्शी ने कहा कि भारत के बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए अब निजी क्षेत्र की काफी ज्यादा भागीदारी की जरूरत है. उनके मुताबिक, सार्वजनिक क्षेत्र का बुनियादी ढांचे में निवेश लगभग 15.5 लाख करोड़ रुपये है, जो GDP का लगभग 4-4.5% है. उन्होंने कहा कि सार्वजनिक खर्च के बड़े पैमाने के बावजूद, बुनियादी ढांचे में निजी क्षेत्र का निवेश जरूरी स्तर से काफी कम है. प्रियदर्शी ने तर्क दिया कि भारत सिर्फ सरकारी खर्च के जरिए अपने बुनियादी ढांचे के लॉन्ग टर्म गोल्स को पूरा नहीं कर सकता.
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‘निजी नवेश को मिले बढ़ावा’
शिशिर प्रियदर्शी ने कहा कि नीति को मौजूदा परियोजनाओं में निजी पूंजी के आने के बजाय निजी निवेशकों के लिए ग्रीनफील्ड बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट को ज्यादा आकर्षक बनाने की जरूरत है. उन्होंने जोखिम के बंटवारे और विवाद के समाधान को मेन मुद्दों के तौर पर अंडरलाइन किया, जिन पर ध्यान देने की जरूरत है ताकि बुनियादी ढांचे में निजी निवेश को बढ़ावा मिल सके.