September 17, 2026

Balaghat Children Death: 30 से ज्यादा आदिवासी बच्चों की मौत पर गरमाई सियासत, राहुल गांधी ने सरकार पर उठाए सवाल, कहा- दीये जलाने से फुर्सत मिले तो..

Balaghat Children Death: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बालाघाट जिले (Balaghat District) के दूर-दराज आदिवासी इलाकों में बच्चों की मौत और बड़ी संख्या में बीमार बच्चों (Sick Children) के अस्पताल पहुंचने का मामला लगातार चर्चा में है। पिछले कुछ महीनों में प्रभावित इलाके में 30 से ज्यादा बच्चों की मौत की खबर सामने आई है। वहीं, बड़ी संख्या में बच्चों को इलाज के लिए अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक चार गांवों में किए गए स्वास्थ्य सर्वे के बाद 486 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिनमें से कुछ मरीज का अब भी इलाज किया जा रहा है।  मामले को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भी राज्य सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट में दायर जनहित याचिका में बच्चों की मौत के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं, दूषित पेयजल और पोषण से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं।

राहुल गांधी ने X पर सरकार को घेरा

बालाघाट में 30 से ज़्यादा आदिवासी बच्चों की बीमारी, कुपोषण और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के बीच मौत हो चुकी है।

संवेदनहीनता का आलम यह है मासूमों की मौतें होती रहीं, लेकिन कार्रवाई सुस्त रही, सरकार सोती रही।

मुख्यमंत्री जी, दीये जलाने और उत्सव मनाने से फुर्सत मिल गई हो…

— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) September 17, 2026

बालाघाट में बच्चों की मौत के मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Congress Leader Rahul Gandhi) ने सोशल मीडिया (Social Media) प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर राज्य सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि बालाघाट में 30 से ज्यादा आदिवासी बच्चों की बीमारी, कुपोषण और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के बीच मौत हुई है।राहुल गांधी ने पोस्ट में बीमारी, पोषण, साफ पानी और स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े मुद्दे उठाते हुए सरकार से जमीनी स्थिति पर ध्यान देने की अपील की।

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उन्होंने मध्य प्रदेश में मिलावटी दवाओं और अवैध शराब से जुड़े मामलों का भी जिक्र किया। राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में मध्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और छात्रों, युवाओं, गरीबों, दलितों, आदिवासियों और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि वह इंदौर आ रहे हैं और प्रदेश के छात्रों, युवाओं तथा आम लोगों से फीडबैक ले रहे हैं।

अभिजीत दीपके ने प्रभावित गांवों का किया दौरा

इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संयोजक अभिजीत दीपके (Abhijit Deepke)  ने 12 सितंबर को बालाघाट के प्रभावित आदिवासी गांवों का दौरा किया। उन्होंने अदोरी, कोरका और बोंडारी समेत आसपास के इलाकों में जाकर उन परिवारों से मुलाकात की, जिन्होंने अपने बच्चों को खोया है। उन्होंने स्थानीय स्वास्थ्य सुविधाओं और पेयजल की स्थिति की जानकारी भी ली। दीपके ने प्रशासन से बच्चों की मौत के मामले में जिम्मेदारी तय करने और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं और पीने के पानी की स्थिति पर भी सवाल उठाए।

दूषित पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं पर सवाल

प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य सुविधाओं और पेयजल को लेकर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं। दीपके ने अपनी यात्रा के दौरान स्थानीय स्कूल और स्वास्थ्य व्यवस्था का जायजा लेने के साथ पानी की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए। रिपोर्ट्स के मुताबिक क्षेत्र में बड़ी संख्या में बच्चे बीमार हुए हैं और अस्पतालों में भर्ती कराने का सिलसिला भी जारी रहा है। हालांकि, बच्चों की मौत के पीछे किसी एक बीमारी या एक ही संक्रमण को जिम्मेदार ठहराने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। रिपोर्ट्स में अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याओं का उल्लेख किया गया है, जिनमें खसरा, मलेरिया, श्वसन संबंधी परेशानी, डिहाइड्रेशन, कुपोषण, एनीमिया और अन्य जटिलताएं शामिल हैं।

हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

मामला अब अदालत तक भी पहुंच चुका है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ( Madhya Pradesh High Court) ने राज्य सरकार से बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत से जुड़े दस्तावेज और स्थिति पर जवाब मांगा है। इसके बाद मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी गतिविधियां तेज हुई हैं। इस पूरे मामले में अब नजर इस बात पर है कि बच्चों की मौत के वास्तविक कारणों, स्वास्थ्य सुविधाओं, पोषण और पेयजल से जुड़े सवालों पर जांच और सरकारी कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है।

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