August 28, 2026

B Nagendra Resigns Reason: दूसरी बार क्यों छोड़ा कर्नाटक मंत्रिमंडल? फूट-फूटकर रोए, बोले- मुझे टारगेट किया गया

Time Published: Friday, August 28, 2026, 20:20 [IST]

B Nagendra Resigns Reason: कर्नाटक के मंत्री बी नागेंद्र ने शुक्रवार (28 अगस्त) को राज्य मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम से जुड़े कथित 89 करोड़ रुपये के घोटाले में नाम आने के बाद विपक्ष लगातार उनके इस्तीफे की मांग कर रहा था।

खास बात यह है कि इसी मामले को लेकर नागेंद्र इससे पहले भी जून 2024 में मंत्री पद छोड़ चुके हैं। अगस्त 2026 में दोबारा मंत्री बनने के महज 25 दिन बाद उन्होंने फिर इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे का ऐलान करते समय नागेंद्र भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े। उन्होंने आरोप लगाया कि दलित होने के कारण उन्हें राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है। आइए विस्तार से जानते हैं...

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आखिर दूसरी बार क्यों दिया इस्तीफा?

बी नागेंद्र का इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब वाल्मीकि निगम से जुड़े मामले में उनके खिलाफ जांच और राजनीतिक दबाव दोनों बढ़ रहे थे। जून 2026 में CBI ने मामले में चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें नागेंद्र समेत 30 लोगों को आरोपी बनाया गया। एजेंसी ने आरोप लगाया कि निगम के करीब 89.63 करोड़ रुपये फर्जी चेक और RTGS लेनदेन के जरिए दूसरे खातों में ट्रांसफर किए गए।

इसके बाद BJP और JD(S) ने नागेंद्र को दोबारा मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने का लगातार विरोध किया। विपक्ष ने विधानसभा में हंगामा किया और उनके इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन भी किए। 24 अगस्त को BJP नेताओं ने नागेंद्र के खिलाफ अभियान तेज करते हुए रायचूर से बल्लारी तक पदयात्रा का ऐलान किया था।

इसके अलावा CBI की ओर से नागेंद्र के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी को लेकर राज्यपाल स्तर पर भी प्रक्रिया आगे बढ़ने की खबरें सामने आई थीं। ऐसे में सरकार पर राजनीतिक दबाव और बढ़ गया।

25 दिन पहले ही दोबारा बने थे मंत्री

बी नागेंद्र ने 3 अगस्त 2026 को डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में दोबारा जगह बनाई थी। उन्हें योजना एवं सांख्यिकी विभाग की जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन दोबारा मंत्री बनने के बाद भी वाल्मीकि निगम का विवाद उनका पीछा नहीं छोड़ पाया। BJP और JD(S) ने सवाल उठाया कि जिस मामले के चलते उन्हें 2024 में मंत्री पद छोड़ना पड़ा था, उसी मामले की जांच के बीच उन्हें फिर कैबिनेट में क्यों शामिल किया गया। लगातार बढ़ते दबाव के बीच 28 अगस्त को नागेंद्र ने स्वेच्छा से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया।

इस्तीफा देते वक्त भावुक हुए नागेंद्र

इस्तीफे का ऐलान करते समय नागेंद्र बेहद भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि वह अपनी इच्छा से मंत्री पद छोड़ रहे हैं ताकि कांग्रेस सरकार को उनके कारण किसी तरह की राजनीतिक परेशानी न हो। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने विधानसभा से लेकर दिल्ली तक उनका बचाव किया और कहा कि उन्होंने कोई गलती नहीं की है। इसके बावजूद उन्होंने पार्टी और सरकार को किसी तरह की परेशानी से बचाने के लिए इस्तीफा देने का फैसला किया। नागेंद्र ने कहा कि उनके खिलाफ लगातार झूठ फैलाए जा रहे हैं और कर्नाटक की जनता सब देख रही है।

'दलित होने के कारण मुझे निशाना बनाया गया'

नागेंद्र ने अपने इस्तीफे को सिर्फ भ्रष्टाचार के आरोपों का मामला नहीं बताया, बल्कि इसे सामाजिक और राजनीतिक निशाने से भी जोड़ दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि 'मनुवादी' ताकतें उन्हें निशाना बना रही हैं क्योंकि वे देश में किसी आदिवासी व्यक्ति को आगे बढ़ते हुए नहीं देखना चाहतीं। नागेंद्र ने सवाल उठाया कि वाल्मीकि निगम से जुड़े लेनदेन में उनके हस्ताक्षर कहां हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि अगर बैंकिंग सिस्टम के जरिए लेनदेन हुए तो केवल उन्हें ही इसके लिए जिम्मेदार क्यों ठहराया जा रहा है।

क्या है वाल्मीकि निगम घोटाला?

पूरा विवाद कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम के फंड में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। मई 2024 में निगम के लेखा अधीक्षक पी. चंद्रशेखरन की आत्महत्या के बाद यह मामला सामने आया। उन्होंने एक नोट में निगम के फंड में कथित अनियमितताओं और अनधिकृत ट्रांसफर का आरोप लगाया था। जांच एजेंसियों के मुताबिक, करीब 89.63 करोड़ रुपये कथित तौर पर फर्जी चेक और RTGS लेनदेन के जरिए निगम के खाते से दूसरे खातों में ट्रांसफर किए गए। CBI की चार्जशीट के मुताबिक, रकम को करीब 600 बैंक खातों के जरिए आगे ट्रांसफर किया गया और बाद में कथित तौर पर नकदी, सोने और महंगी गाड़ियों में बदला गया। हालांकि, ये जांच एजेंसियों के आरोप हैं और मामले में आरोपियों के खिलाफ अंतिम न्यायिक फैसला अभी नहीं आया है।

2024 में भी इसी विवाद के कारण छोड़ा था मंत्री पद

जब वाल्मीकि निगम का मामला सामने आया था, उस समय बी नागेंद्र सिद्धारमैया सरकार में जनजातीय कल्याण मंत्री थे। विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने जून 2024 में मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।

इसके बाद CBI, ED और कर्नाटक SIT ने मामले की अलग-अलग पहलुओं से जांच की। CBI ने जून 2026 में दाखिल अपनी चार्जशीट में नागेंद्र समेत 30 लोगों को आरोपी बनाया। एजेंसी ने 89.63 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी का आरोप लगाया।

प्रियांक खरगे ने विपक्ष से पूछा था- क्या दोषी ठहराए गए हैं?

नागेंद्र के खिलाफ BJP के प्रदर्शन पर कांग्रेस नेता और मंत्री प्रियांक खरगे ने भी विपक्ष के आरोपों पर सवाल उठाए थे। उन्होंने पूछा था कि क्या नागेंद्र को मामले में दोषी ठहराया गया है और क्या उनका नाम CBI या SIT की किसी कार्रवाई में है। हालांकि, इसके बाद जून 2026 में दाखिल CBI चार्जशीट में नागेंद्र को आरोपी बनाए जाने की जानकारी सामने आई।