August 16, 2026

Asish Banerjee: कौन थे आशीष बनर्जी? TMC ऑफिस में फंदे से लटका मिला शव, 5 बार के विधायक की कैसे हुई मौत?

Time Published: Sunday, August 16, 2026, 10:08 [IST]

Asish Banerjee: पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले की रामपुरहाट सीट से लंबे समय तक राजनीति करने वाले तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आशीष बनर्जी का रविवार सुबह निधन हो गया। उनका शव उनके घर के पास स्थित पार्टी कार्यालय में फंदे से लटका मिला। इस खबर के सामने आते ही बंगाल की राजनीति में हलचल मच गई।

75 वर्षीय आशीष बनर्जी रामपुरहाट से लगातार पांच बार विधायक चुने गए थे। उन्होंने ममता बनर्जी सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी संभाली और बाद में विधानसभा के उपाध्यक्ष भी बने। हालांकि, 2026 के विधानसभा चुनाव में उन्हें भाजपा के ध्रुव साहा से हार का सामना करना पड़ा। उनके निधन के बाद पुलिस को मौके से एक पन्ने का कथित सुसाइड नोट भी मिला है, जिसकी जांच की जा रही है।

Asish Banerjee
File Photo

कौन थे आशीष बनर्जी? कैसा रहा उनका जीवन?

आशीष बनर्जी का जन्म 3 नवंबर 1951 को रामपुरहाट, बीरभूम, पश्चिम बंगाल में हुआ था। उनके पिता का नाम असित बरन बनर्जी है। उन्होंने बर्धमान विश्वविद्यालय से बंगाली विषय में स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई की और इसी विश्वविद्यालय से पीएचडी भी पूरी की। पढ़ाई के बाद उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में करियर बनाया और रामपुरहाट कॉलेज में बंगाली के एसोसिएट प्रोफेसर के तौर पर काम किया।

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आशीष बनर्जी का राजनीति में आने से पहले शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ाव रहा। वह पेशे से शिक्षक थे और अपने राजनीतिक जीवन के दौरान भी शिक्षा से जुड़े रहने के लिए जाने जाते थे। उन्होंने 2001 में रामपुरहाट विधानसभा सीट से पहली बार चुनाव जीता। इसके बाद 2006, 2011, 2016 और 2021 में भी इसी सीट से जीत दर्ज की। इस तरह वह लगातार पांच चुनाव जीतकर रामपुरहाट की राजनीति में मजबूत पहचान बनाने में सफल रहे।

ममता सरकार में संभाली बड़ी जिम्मेदारियां

आशीष बनर्जी सिर्फ विधायक ही नहीं रहे, बल्कि ममता बनर्जी की सरकार में भी उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं। उन्होंने शिक्षा और कृषि विभाग से जुड़ी मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद उन्हें पश्चिम बंगाल विधानसभा का उपाध्यक्ष बनाया गया। इस पद पर रहते हुए उन्होंने विधानसभा की कार्यवाही में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लंबे राजनीतिक अनुभव और रामपुरहाट में लगातार चुनाव जीतने के कारण उन्हें तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में गिना जाता था।

2026 में भाजपा से मिली हार

आशीष बनर्जी के लंबे चुनावी सफर का अंत 2026 के विधानसभा चुनाव में हुआ। इस बार रामपुरहाट सीट पर भाजपा के ध्रुव साहा ने उन्हें हरा दिया। इस चुनाव में हार के बाद उनकी राजनीतिक स्थिति पहले के मुकाबले बदल गई थी। हाल में उन्होंने बीरभूम जिला तृणमूल अध्यक्ष का पद भी छोड़ दिया था।

पार्टी कार्यालय में मिला शव

रविवार, 16 अगस्त की सुबह आशीष बनर्जी का शव उनके आवास के पास स्थित पार्टी कार्यालय में फंदे से लटका मिला। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। शव के पास पुलिस को एक पन्ने का कथित सुसाइड नोट भी मिला। इसमें लिखा था कि उनकी मौत के लिए कोई जिम्मेदार नहीं है। पत्र में राजनीति में आने के फैसले को लेकर भी निराशा जताई गई थी।

नोट में क्या लिखा था?

कथित पत्र में आशीष बनर्जी ने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन और अपनी साफ छवि का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने कभी गलत तरीके से पैसा नहीं लिया और छात्रों को बिना फीस पढ़ाया। उन्होंने तारापीठ-रामपुरहाट विकास प्राधिकरण से जुड़े मामले में खुद को किनारे किए जाने और उनकी छवि खराब करने की कोशिश का भी जिक्र किया। उन्होंने भ्रष्टाचार में शामिल होने के आरोपों से इनकार किया और कहा कि इसके बावजूद उन्हें अपमानित किया गया। पत्र में उन्होंने अपने परिवार की आने वाली पीढ़ियों को राजनीति से दूर रहने की सलाह भी दी है।

पुलिस कर रही लेटर की जांच

रामपुरहाट थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस कथित सुसाइड नोट की फोरेंसिक जांच कराने की तैयारी में है। जांच के बाद ही पत्र की वास्तविकता और उसमें लिखी बातों के बारे में स्थिति साफ होगी। आशीष बनर्जी के अचानक निधन की खबर के बाद तृणमूल कांग्रेस समेत अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं ने शोक जताया है।

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