
टोमन कुमार ने एशियन पैरा गेम्स में मिक्स्ड पैरा आर्चरी का गोल्ड मेडल जीताImage Credit source: World Archery
भारतीय पैरा एथलीटों की कहानी से बढ़कर एक है. कोई जन्मजात ही दिव्यांग था, तो किसी ने दूसरे को बचाने की कोशिश में अपना हाथ या पैर गंवाया. कुछ अलग-अलग हादसों के शिकार होकर दिव्यांग बने. मगर कुछ ऐसे भी हैं, जिन्होंने देश की रक्षा में अपने शरीर को छलनी किया और अब खेलों की दुनिया में तिरंगा लहरा रहे हैं. तोमन कुमार ऐसे ही एक भारतीय हैं, जो कभी नक्सलियों से लड़ते थे. अब उन्होंने एशियन पैरा गेम्स में आर्चरी का गोल्ड मेडल जीत लिया है. तोमन ने शीतल देवी के साथ मिलकर मिक्स्ड इवेंट का गोल्ड मेडल जीता.
पहले वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया, फिर गोल्ड जीता
जापान के आइची-नागोया में चल रहे पैरा गेम्स के पांचवें दिन गुरुवार 22 अक्टूबर को तोमन कुमार और शीतल देवी कीभारतीय जोड़ी ने इंडोनेशिया के तेओडोरा ऑडी आयुडिया फेरेली और केन स्वागुमिलंग को 151-148 के स्कोर से हराया. टॉप सीड भारतीय टीम ने मुकाबले की शुरुआत से ही बढ़त बनाए रखी और कड़े मुकाबले में 3 पॉइंट्स से जीत हासिल की.
यह गोल्ड मेडल शीतल और तोमन के शानदार प्रदर्शन की सिर्फ एक झलक है. इस जोड़ी ने क्वालिफिकेशन राउंड में भी कमाल कर दिखाया था. उन्होंने 1,402 अंक बटोरकर एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाया, जो पिछले रिकॉर्ड से दो अंक ज़्यादा था.
मगर तोमन और शीतल की कहानी सिर्फ गोल्ड मेडल जीतने और वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि संघर्ष, जज्बे और गिरकर उठने की कहानी है. जम्मू-कश्मीर से आने वाली शीतल देवी का जन्म बिना हाथों के हुआ था. वह अपने पैरों और टांगों का इस्तेमाल करके कंपाउंड धनुष को साधती हैं. फिर कंधे और जबड़े का उपयोग कर के धनुष की डोरी को खींचती और छोड़ती हैं.
राइफल चलाने वाले कमांडो तोमन बने आर्चर
शीतल की कहानी से देश और दुनिया वाकिफ हो चुकी है. मगर तोमन की कहानी अभी भी कम ही लोगों तक पहुंच पाई है और ये भी कम प्रेरणादायक नहीं है. तोमन कुमार छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं और वहीं उन्होंने उस जंग के खिलाफ मोर्चा संभाला, जिसने राज्य समेत देश के कई हिस्सों को सालों से त्रस्त किया हुआ था. छत्तीसगढ़ में नक्सलियों से लड़ रही सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) की कोबरा (CoBRA) कमांडो बटालियन में ही 2017 में तोमन कुमार भर्ती हुए और फिर खुद मैदान-ए-जंग में उतर गए, ताकि उनका राज्य सुरक्षित और स्थिरता हासिल कर सके.
मगर नक्सलियों से लड़ने की उन्हें कीमत भी चुकानी पड़ी. 2021 में ऐसे ही एक ऑपरेशन के दौरान तोमन IED धमाके की चपेट में आ गए. इस हादसे में उनका एक पैर बुरी तरह जख्मी हो गया. आखिरकार तोमन को अपना ये पैर गंवाना पड़ा. मगर इस हादसे ने उन्हें एक नई दिशा दी. कुछ वक्त तक वो डिप्रेशन में रहे लेकिन जब हैदराबाद में वो आर्टिफिशल पैर लगाने पहुंचे तो यहां उन्होंने अपने जैसे अन्य लोगों को देखा और फिर नया जीवन शुरू करने की प्रेरणा मिली. राइफल चलाने में माहिर कमांडो ने धनुष और बाण उठाया और तीरंदाजी को अपना जुनून बना लिया. यही जुनून उन्हें पैरा आर्चरी में नए मुकाम तक ले गया, जहां उन्होंने न सिर्फ नंबर-1 रैंक हासिल की, बल्कि वर्ल्ड चैंपियन भी बने और अब गोल्ड मेडलिस्ट भी बन गए हैं.

सुमित सुन्द्रियाल
इस वक्त TV9 हिंदी (स्पोर्ट्स 9) में असिस्टेंट न्यूज एडिटर (स्पोर्ट्स) की भूमिका में हूं. यहां तक पहुंचने की शुरुआत 2009 से हुई, जब जामिया मिल्लिया इस्लामिया में मास मीडिया ऑनर्स कोर्स (2009-12) में एडमिशन लिया. फिर 2013 में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से हिंदी पत्रकारिता में पोस्ट-ग्रेजुएशन डिप्लोमा पूरा किया. यहीं से 2013 में पहली बार पेशेवर पत्रकारिता में कदम रखे और सबसे पहले न्यूज 18 इंडिया टीवी चैनल में जगह बनाई. डिजिटल पत्रकारिता में एंट्री लेने से पहले करीब 6 साल टीवी इंडस्ट्री में ही गुजरे, जहां असानमेंट डेस्क पर काम किया. असाइनमेंट डेस्क पर रहते हुए जानकारी जुटाना सबसे अहम काम होता है और उस खबर के हर पहलू को जांचना और उसे आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होती है. यही काम न्यूज 18 इंडिया में रहते हुए किया. इसके बाद खेल और खेल की खबरों के मोह ने डिजिटल जर्नलिज्म की ओर मोड़ा और एक नया सफर शुरू हुआ. इसकी शुरुआत IPL 2019 के दौरान हुई, जब क्विंट हिंदी का दामन थामा. एक साल क्विंट के साथ खेल की खबरें लिखने के बाद इसी काम में नया मुकाम हासिल करने के लिए TV9 हिंदी से रिश्ता जुड़ा. पिछले 3 साल से यहीं पर खेल की हर छोटी-बड़ी, गंभीर और मजेदार खबरें आप तक पहुंचा रहां हूं और लगातार बेहतर तरीके से पेश करने का प्रयास कर रहा हूं.
Read More