
भारत को एक और ब्रॉन्ज मिला (Photo: X)
एशियन गेम्स 2026 में भारत ने अपना 8वां मेडल जीत लिया है. भारत की झोली ये मेडल शूटिंग के महिला स्कीट इवेंट में आया, जहां राइजा ढिल्लन, माहेश्वरी चौहान और पारिनाज धालीवाल की तिकड़ी का कमाल का प्रदर्शन देखने को मिला. इन तीनों के लगाए अचूक निशाने से भारत ब्रॉन्ज मेडल जीतने में कामयाब रहा. आइची नगोया में चल रहे एशियन गेम्स में भारत को शूटिंग में अब तक मिला ये छठा मेडल है. यानी, भारत को 8 में से 6 मेडल भारतीय शूटर्स ने दिलाए हैं.
भारत की विमेंस स्कीट टीम ने जीता ब्रॉन्ज मेडल
अब सवाल है कि राइजा ढिल्लन, माहेश्वरी चौहान और पारिनाज धालीवाल की तिकड़ी ने कमाल किया कैसे? आइची नगोया में इस भारतीय तिकड़ी ने मिलकर 331 अंक स्कोर किए, तब जाकर इनका ब्रॉन्ज मेडल पर कब्जा हो सका. पारिनाज धालीवाल और राइजा ढिल्लन ने 111-111 अंक स्कोर किए जबकि माहेश्वरी चौहान ने 109 अंक हासिल किए.
भारत को ब्रॉन्ज, चीन ने जीता गोल्ड
भारतीय टीम 331 अंक हासिल कर जहां तीसरे नंबर यानी ब्रॉन्ज मेडल पोजिशन पर रही. वहीं चीन की टीम ने 357 अंक स्कोर कर गोल्ड मेडल जीता और कजाख्स्तान की टीम 337 पॉइंट के साथ सिल्वर मेडल जीता.
विमेंस स्कीट इंडिविजुअल इवेंट के फाइनल में बनाई जगह
पारिनाज धालीवाल और राइजा ढिल्लन ने विमेंस स्कीट के इंडिविजुअल इवेंट के फाइनल में भी जगह बना ली है. टीम इवेंट के टॉप 8 शूटर्स को इंडिविजुअल फाइनल खेलने का मौका मिलता है. पारिनाज तो 8वें नंबर पर थीं. मगर राइजा ढिल्लन को 9वें नंबर पर रहकर भी फाइनल खेलने का मौका मिल गया. इसके पीछे है वो वजह, जिसके मुताबिक एक देश से सिर्फ 2 शूटर ही टॉप 8 में हो सकते हैं. चीन के 3 शूटर थे. ऐसे में भारतीय शूटर राइजा को फायदा मिला और वो 9वें नंबर पर रहने के बाद भी फाइनल के लिए क्वालिफाई कर गईं.
शूटिंग में आए भारत के मेडल
भारत ने इससे पहले महिलाओं और पुरुषों के 10 मीटर एयर राइफल टीम और इंडिविजुअल इवेंट में सिल्वर मेडल जीता था. वहीं 10 मीटर एयर राइफल के इंडिविजुअल इवेंट का ब्रॉन्ज मेडल भी भारत की झोली में गिरा था.

साकेत शर्मा
'कौन बनेगा करोड़पति' गेम शो से शुरू हुआ सफर न्यूज नेशन, इंडिया न्यूज, इंडिया डॉट कॉम और Editorji जैसे पड़ावों से गुजरा. इसी कड़ी में पिछले 5 सालों से मैं TV9 हिंदी के साथ जुड़ा हूं. यहां भी खेल की खबरों को बताना मेरा काम है. TV, डिजिटल और प्रोडक्शन हाउस, तीनों ही दुनिया की समझ और कुल मिलाकर एक दशक से भी ज्यादा का मेरे पास अनुभव है. हर रोज कुछ नया सीखने और नई क्रिएटिव चीज करने की कोशिश करता हूं. असफलता से घबराता नहीं और सफलता पर इतराता नहीं. बस कोशिश यही करता हूं कि हमेशा अपना बेस्ट दे सकूं. आज तक यही करता आया हूं और आगे भी इरादा ऐसा ही है. फिर चाहे काम डेस्क पर बैठकर खेल की खबरों को अपने शब्दों में पिरोने का हो या फिर फील्ड में उतरकर उसे कैमरे पर उतारने का. सीधी भाषा में कहें तो मैं खेल के मैदान पर होने वाली हर हलचल को आपतक पहुंचाने वाला एक खिलाड़ी हूं.
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