Ashwin Maas 2026 Vrat Tyohar: आज यानी 27 सितंबर, रविवार से आश्विन मास का आरंभ हो रहा है. आश्विन मास के पहले दिन प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध है. शास्त्रों के अनुसार, आश्विन का महीना पितृ देव और मां दुर्गा और धन की देवी मां लक्ष्मी की समर्पित है. आश्विन के 15 दिन पितरों की समर्पित माना गया है. इसलिए कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से अमावस्या तिथि तक पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध (तर्पण, पिंडदान) किए जाते हैं. जबकि शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तिथि तक मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है. इसके अलावा इस महीने की आखिरी तिथि यानी आश्विन पूर्णिमा पर धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की जाती है. आइए, जानते हैं कि आश्विन मास के प्रमुख व्रत-त्योहारों की पूरी लिस्ट.
आश्विन मास के व्रत-त्योहार
27 सितंबर- पितृ पक्ष में प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध
इस दिन उन पूर्वजों के लिए श्राद्ध (तर्पण, पिंडदान) करने की परंपरा है, जिनकी मृत्यु शुक्ल या कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर हुई हो.
29 सितंबर- विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी व्रत
यह व्रत भगवान गणेश की कृपा पाने, जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति और संकटों को दूर करने के लिए किया जाता है. इस महिलाएं संतान की रक्षा के लिए व्रत रखती हैं.
3 अक्टूबर- जीवित्पुत्रिका व्रत (जितिया)
यह व्रत संतान की लंबी उम्र और अच्छी सेहत के लिए रखा जाता है. इस व्रत को मुख्य रूप से महिलाएं रखती हैं. महिलाएं बिना पानी पिए व्रत रखती हैं.
6 अक्टूबर- इंदिरा एकादशी
मान्यतानुसार, पितृ पक्ष में पड़ने वाली इस एकादशी का व्रत रखने से पाप कर्म नष्ट होते हैं. साथ ही पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. मान्यता है कि इस दिन दान करने से सात पीढ़ियों का पितृ दोष दूर होता है.
8 अक्टूबर, गुरुवार- गुरु प्रदोष व्रत
यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए रखा जाता है. प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा की जाती है.
10 अक्टूबर,शनिवार- दर्श अमावस्या, आश्विन अमावस्या, सर्वपितृ अमावस्या
इस दिन पितृ पक्ष का समापन होता है. साथ ही इस दिन उन पूर्वजों के लिए श्राद्ध (तर्पण, पिंडदान) किया जाता है जिनकी मृत्यु की तिथि पता न हो. इसके अलावा इस दिन अमावस्या तिथि के श्राद्ध का भी विधान है.
11 अक्टूबर, रविवार- शारदीय नवरात्र आरंभ, कलश स्थापन
मां दुर्गा की उपासना के लिए इस दिन से शारदीय नवरात्र आरंभ होगा. साथ ही इसी दिन कलश स्थापन के साथ-साथ देवी शैलपुत्री का पूजन किया जाएगा. शारदीय नवरात्र के दौरान क्रमशः शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और मां सिद्धिदात्री की उपासना की जाती है.
17 अक्टूबर, शनिवार तुला संक्रांति
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, तुला संक्रांति पर ग्रहों के राजा सूर्य कन्या राशि से निकलकर तुला राशि में प्रवेश करते हैं. शास्त्रों के अनुसार, इस दिन दान करने से पुण्य प्राप्त होता है.
19 अक्टूबर, सोमवार- महा अष्टमी, महा नवमी
शारदीय नवरात्र में महा अष्टमी और महा नवमी के दिन क्रमशः माता महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है. इस दिन कन्या पूजन और हवन करने की परंपरा भी है.
20 अक्टूबर, मंगलवार- दुर्गा प्रतिमा विसर्जन, कलश विसर्जन, दशहरा
इस दिन मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन, कलश विसर्जन होगा. इसके अलावा इस दिन दशहरा भी है. दशहरा पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत के तौर पर मनाया जाता है.
22 अक्टूबर, गुरुवार- पापांकुशा एकादशी
मान्यतानुसार, पापांकुशा एकादशी का व्रत रखने से हर प्रकार के पाप कर्म नष्ट हो जाते हैं. इस दिन व्रत रखने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है.
23 अक्टूबर, शुक्रवार- शुक्र प्रदोष व्रत
शास्त्रों के अनुसार, शुक्र प्रदोष व्रत पर माता पार्वती के साथ भगवान शिव की पूजा की जाती है. इस व्रत के प्रभाव से जीवन में सुख-समृद्धि आती है. साथ ही भगवान शिव और मां पार्वती की कृपा प्राप्त होती है.
25 अक्टूबर आश्विन पूर्णिमा, कोजागरा, शरद पूर्णिमा
आश्विन पूर्णिमा की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है. इस अवसर पर चंद्र देव 16 कलाओं से पूर्ण होकर उदित होते हैं. इस दिन चंद्र देव को अर्घ्य देने की परंपरा है. मिथिला में इस दिन कोजागरा मनाया जाता है. शरद पूर्णिमा के अवसर पर मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना विशेष फलदायी मानी गई है.
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