Updated On: Jul 11, 2026 | 08:28 PM IST
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सार
Ashadha Amavasya 2026: आषाढ़ अमावस्या की रात इस दिन 4 विशेष स्थानों पर दीप जलाने से पितृ दोष से राहत मिलने और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त है। जानें इन स्थानों का धार्मिक महत्व और सही विधि।

आषाढ़ अमावस्या पर दीप दान (सौ.जैमिनी)
विस्तार
Ashadha Amavasya Deep Daan: 14 जुलाई 2026 को आषाढ़ अमावस्या मनाई जाएगी। सनातन धर्म में आषाढ़ अमावस्या को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी तिथि माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किए गए स्नान, दान, जप, तर्पण, श्राद्ध और पूजा का कई गुना शुभ फल प्राप्त होता है। विशेष रूप से यह तिथि पितरों के स्मरण, तर्पण और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, आषाढ़ अमावस्या की संध्या पर कुछ विशेष स्थानों पर दीपक जलाने से पितृ प्रसन्न होते हैं। मान्यता है कि इससे पितृ दोष के अशुभ प्रभाव कम होते हैं तथा परिवार में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
जानिए कब है आषाढ़ अमावस्या?
वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ कृष्ण अमावस्या तिथि का प्रारंभ 13 जुलाई 2026, सोमवार को शाम लगभग 6 बजकर 49 मिनट पर होगा। यह तिथि 14 जुलाई 2026, मंगलवार को दोपहर लगभग 3 बजकर 12 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर 14 जुलाई को ही आषाढ़ अमावस्या का व्रत, स्नान, दान, तर्पण और श्राद्ध कर्म किए जाएंगे।
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आषाढ़ अमावस्या पर इन 4 स्थानों पर दीपक जलाना माना जाता है अत्यंत शुभ:
1. मुख्य द्वार पर दीपक: कहते हैं यहीं से आती है शुभता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घर का मुख्य द्वार सकारात्मक ऊर्जा और माता लक्ष्मी के आगमन का प्रतीक माना जाता है। आषाढ़ अमावस्या की संध्या पर मुख्य द्वार पर घी या सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सुख-समृद्धि का वातावरण बनता है।
2. दक्षिण दिशा में दीपक – पितरों की कृपा प्राप्त करने का विशेष उपाय
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, आषाढ़ अमावस्या की शाम घर के बाहर दक्षिण दिशा में सरसों के तेल का दीपक अवश्य जलाना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि दक्षिण दिशा का संबंध पितृलोक से माना गया है। दीपक का प्रकाश पितरों के प्रति सम्मान और स्मरण का प्रतीक माना जाता है, जिससे वे प्रसन्न होकर परिवार को आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
3. पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक – माना जाता है अत्यंत पुण्यदायी
शास्त्रों में पीपल के वृक्ष को देवताओं और पितरों दोनों का प्रिय बताया गया है। आषाढ़ अमावस्या के दिन पीपल की पूजा कर उसके नीचे दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि देवताओं के निमित्त तिल के तेल का दीपक तथा पितरों के निमित्त सरसों के तेल का दीपक अर्पित करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और पितृ दोष शांत होने की कामना की जाती है।
4. तर्पण स्थल या पूजा स्थान पर दीपक – पूर्वजों के प्रति श्रद्धा का प्रतीक
यदि आप घर पर पितरों का तर्पण या श्राद्ध कर रहे हैं, तो पूजा स्थल या तर्पण के स्थान पर घी का दीपक अवश्य जलाएं। धार्मिक मान्यता है कि यह दीपक पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और सम्मान का प्रतीक होता है। कहा जाता है कि श्रद्धापूर्वक किया गया यह छोटा-सा उपाय भी पितरों की कृपा प्राप्त करने का माध्यम बन सकता है।
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पितृ दोष से राहत के लिए करें ये उपाय
यदि आपकी कुंडली में पितृ दोष बताया गया है, तो आषाढ़ अमावस्या के दिन स्नान, तर्पण, पिंडदान (जहां परंपरा हो), दान, पीपल पूजन और दीपदान करना शुभ माना जाता है। हालांकि, पितृ दोष के संबंध में अलग-अलग ज्योतिषीय मत हो सकते हैं, इसलिए व्यक्तिगत उपायों के लिए योग्य विद्वान से परामर्श लेना उचित रहता है।
धार्मिक मान्यता है कि आषाढ़ अमावस्या पर श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए दीपदान, तर्पण और पूजा से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है तथा परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
