September 11, 2026

हुनर और हौसलों की नई उड़ान- धमतरी की तीन बेटियों ने तोड़ीं बंदिशें...

हुनर और हौसलों की नई उड़ान- धमतरी की तीन बेटियों ने तोड़ीं बंदिशें...अब बेंगलुरु में असेंबल करेंगी Apple iPhone

रायपुर, 11 सितंबर 2026 : छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले की तीन बेटियां-संजना साहू, रंजना साहू और निकिता ने अपनी अटूट लगन, कड़ी मेहनत और हुनर के दम पर यह साबित कर दिया है कि अगर सही अवसर और प्रशिक्षण मिले, तो बेटियां किसी भी क्षेत्र में सफलता का नया इतिहास रच सकती हैं। जिस इलेक्ट्रीशियन ट्रेड को बरसों से पुरुष-प्रधान माना जाता रहा, उसी में तकनीकी महारत हासिल कर इन बेटियों ने वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स दिग्गज कंपनी फॉक्सकॉन (बेंगलुरु) में अपना परचम लहराया है।

​अब धमतरी की ये बेटियां बेंगलुरु के हाई-टेक औद्योगिक माहौल में दिग्गज टेक ब्रांड Apple के iPhone और अन्य आधुनिक उपकरणों की असेंबली करती नजर आएंगी। अपनी इस पहली बड़ी सफलता के साथ तीनों प्रशिक्षुओं को 20 हजार रुपए प्रतिमाह CTC का रोजगार ऑफर मिला है।

कठिन प्रशिक्षण से निखरा हुनर

​जिला प्रशासन और अंबुजा फाउंडेशन के सहयोग से संचालित मधुरिमा गुरुकुल SEDI (धमतरी) में प्रशिक्षण के दौरान इन तीनों बेटियों ने इलेक्ट्रिकल सिस्टम, व्यावहारिक वायरिंग, मशीनरी के संचालन और औद्योगिक सुरक्षा मानकों की गहरी समझ विकसित की। इस प्रशिक्षण ने न केवल उन्हें तकनीकी रूप से सक्षम बनाया, बल्कि बड़े औद्योगिक संस्थानों में काम करने का आत्मविश्वास भी दिया। यही आत्मविश्वास आज उन्हें धमतरी के ग्रामीण अंचल से निकालकर देश की टेक-कैपिटल बेंगलुरु तक ले गया है।

​प्रशासन और जन प्रतिनिधियों ने सराहा

​इस ऐतिहासिक उपलब्धि की जमीनी हकीकत जानने और युवाओं का उत्साहवर्धन करने कलेक्टर और नगर निगम धमतरी के महापौर रामू रोहरा ने मधुरिमा गुरुकुल SEDI का दौरा किया। ​महापौर ने बेटियों की सराहना करते हुए कहा कि इलेक्ट्रीशियन जैसे ट्रेड में प्रशिक्षण लेकर फॉक्सकॉन जैसी प्रतिष्ठित कंपनी तक पहुंचना पूरे जिले के लिए बेहद गर्व की बात है। यह सफलता साबित करती है कि हमारे युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, बस उन्हें सही दिशा और अवसर की जरूरत है।

​वहीं कलेक्टर धमतरी ने कहा कि धमतरी की बेटियों ने अपनी मेहनत से एक नई मिसाल कायम की है। जिला प्रशासन का लगातार यह प्रयास है कि युवाओं को केवल कागजी प्रशिक्षण न देकर, उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के हिसाब से तैयार किया जाए ताकि उन्हें सीधे रोजगार से जोड़ा जा सके।

​आत्मनिर्भरता और बदलाव का प्रतीक

​मधुरिमा गुरुकुल SEDI के जरिए अब तक 100 से ज्यादा युवा आत्मनिर्भर बन चुके हैं। इस साल 200 और आगामी चरणों में करीब 1,000 युवाओं को रोजगार तथा स्वरोजगार से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। धमतरी की इन तीन बेटियों का धमतरी से बेंगलुरु तक का यह सफर सिर्फ एक नौकरी पाने की कहानी नहीं है, बल्कि यह बदलते छत्तीसगढ़, बेटियों की तकनीकी दक्षता और नए भारत के बढ़ते आत्मविश्वास की एक बुलंद तस्वीर है।