एएमयू में छात्रसंघ बहाली की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब कैंपस से बाहर निकलकर ALIG बिरादरी और राजनीतिक गलियारों तक पहुंच गया है। दसवें दिन भी निलंबित छात्र यासिर फहद की भूख हड़ताल जारी है। सोमवार रात की मारपीट और इसके बाद प्रदर्शनकारी छात्रों पर ह
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मंगलवार को पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष अब्दुल हफीज गांधी धरना स्थल पहुंचे। बुधवार को कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के भतीजे ने पहुंचकर छात्रों को समर्थन दिया। शाम को एएमयू छात्रसंघ के चर्चित पूर्व अध्यक्ष और आजमगढ़ की गोपालपुर सीट से सपा विधायक नफीस अहमद ने अपनी मेटा आईडी से पोस्ट कर छात्रों के समर्थन में बयान जारी किया।
यानी जिस मुद्दे की शुरुआत छात्रों की मांग से हुई थी, वह अब ALIG यानि पूर्व छात्र बिरादरी और राजनेताओं की आवाज से भी जुड़ने लगा है। अगले कुछ दिनों में बिहार और पूर्वांचल के कुछ अन्य सांसदों, विधायकों और राजनेताओं के समर्थन में यहां पहुंचने की अपुष्ट चर्चाएं भी हैं। इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

अब्दुल हफीज गांधी, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष
दो एफआईआर के बाद और गरमाया मामला
सोमवार रात धरना स्थल पर हुई मारपीट के बाद यासिर ने आरोप लगाया कि धरना खत्म कराने के लिए इंतजामिया मारपीट तक करा रही है। इसके बाद प्रदर्शन में शामिल छात्रों पर दो एफआईआर हुईं।
छात्रों की ओर से इसे दबाव की कार्रवाई बताया जा रहा है, जबकि मामले में पुलिस स्तर से जांच की जा रही है। यासिर पिछले 10 दिन से भूख हड़ताल पर हैं। छात्रों की प्रमुख मांगें स्टूडेंट यूनियन की बहाली, छात्रसंघ चुनाव की घोषणा और यासिर का निलंबन वापस लेना हैं।

नफीस अहमद, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष व सपा विधायक।
नफीस बोले- छात्रों की आवाज सुनी जाए पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष नफीस अहमद ने अपने संदेश में कहा कि एएमयू से उनका रिश्ता सिर्फ एक इदारे का नहीं, बल्कि वहां के तलबा, उनकी उम्मीदों और आवाज से जुड़ा है। उन्होंने छात्रसंघ चुनाव की बहाली की मांग को जायज और लोकतांत्रिक मांग बताते हुए इंतजामिया से बातचीत के जरिए रास्ता निकालने की अपील की।
उन्होंने यासिर की 10 दिन से जारी भूख हड़ताल पर चिंता जताई और कहा कि छात्रों की मांग का सम्मान भी हो तथा उनकी सेहत को नुकसान भी न पहुंचे। छात्रों से उन्होंने लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण और संविधानसम्मत तरीके से अपनी मांग उठाते रहने की अपील की।

नफीस अहमद की पोस्ट।
सोशल मीडिया पर भी तेज हुई मुहिम आंदोलन अब सोशल मीडिया पर भी तेजी से फैल रहा है। प्रदर्शनकारी छात्र वीडियो और पोस्ट के जरिए समर्थन जुटा रहे हैं। अलीगों और राजनीतिक लोगों के समर्थन के बाद सोशल मीडिया पर भी पक्ष-विपक्ष में बहस तेज हुई है। बुधवार को कुछ छात्र जिले के आला पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से मिलने भी पहुंचे थे। मकसद जिला प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप की मांग करना था, लेकिन अलग-अलग कारणों से मुलाकात नहीं हो सकी। पुलिस-प्रशासन फिलहाल मामले पर नजर रखे हुए है। चूंकि विवाद एएमयू परिसर के अंदर का है, इसलिए अभी सीधे हस्तक्षेप नहीं किया गया है।

एएमयू प्रॉक्टर प्रो. नवेद खां ने बताया-छात्रों को बार-बार समझाया जा रहा है।
इंतजामिया कह रही- प्रतिनिधिमंडल बनाकर कुलपति से मिलें
एएमयू प्रॉक्टर प्रो. नवेद खां का कहना है कि छात्रों को बार-बार समझाया जा रहा है कि वे एक प्रतिनिधिमंडल बना लें। प्रॉक्टर कार्यालय के जरिये कुलपति से मुलाकात का समय तय कराया जा सकता है। प्रतिनिधिमंडल जाकर अपनी बात रख सकता है। उनके मुताबिक छात्र अभी इस पर निर्णय नहीं ले पा रहे हैं।
छात्रसंघ चुनाव का मुद्दा एएमयू में नया नहीं है। अंतिम छात्रसंघ चुनाव 2018 में हुआ था। इससे पहले भी कई बार चुनाव नहीं हो सके हैं। 2023 में चुनाव की मांग को लेकर छात्रों ने बाब-ए-सैयद पर करीब 50 दिन तक धरना दिया था। यानी मौजूदा आंदोलन अचानक खड़ा हुआ मामला नहीं है। छात्रसंघ चुनाव की मांग कई वर्षों से उठती रही है। 2026 के मौजूदा आंदोलन में भी यही मुद्दा फिर केंद्र में है।
पिछला इतिहास भी बढ़ा रहा चिंता
हालिया रिपोर्टों के मुताबिक छात्रों की मांग चुनाव की प्रक्रिया शुरू करने, चुनाव अधिकारी नियुक्त करने और चुनाव कार्यक्रम घोषित करने तक है। अब दसवें दिन आंदोलन में छात्रों के साथ ALIG यानि पूर्व छात्र बिरादरी और राजनीतिक चेहरों की आवाज जुड़ने से यह सवाल अहम हो गया है कि क्या इस बार भी आंदोलन लंबा खिंचेगा या इंतजामिया और छात्रों के बीच बातचीत से जल्द रास्ता निकलेगा?