September 15, 2026

लोकभवन का AKU कुलपति पर बड़ा एक्शन: नीतिगत और वित्तीय फैसलों पर रोक, मुख्यालय छोड़ने पर भी लगी पाबंदी - Patna News

राज्यपाल-सह-कुलाधिपति सचिवालय ने आर्यभट्ट नॉलेज यूनिवर्सिटी (एकेयू) के कुलपति पर बड़ी कार्रवाई की है। लोकभवन ने कुलपति के नीतिगत और वित्तीय अधिकारों पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। इसके साथ ही उन्हें कुलाधिपति की पूर्व अनुमति के बिना मुख्या

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राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह की ओर से 15 सितंबर 2026 को जारी आदेश में कुलपति को तीन निर्देश दिए गए हैं। आदेश के अनुसार, इनका तत्काल प्रभाव से पालन करना अनिवार्य होगा।

कुलाधिपति की अनुमति के बिना नहीं ले सकेंगे नीतिगत फैसले

आदेश में कहा गया है कि अगले निर्देश तक कुलपति कुलाधिपति की पूर्व अनुमति के बिना कोई भी नीतिगत निर्णय नहीं ले सकेंगे। विश्वविद्यालय से जुड़े महत्वपूर्ण प्रशासनिक और नीतिगत मामलों में निर्णय लेने से पहले लोकभवन की अनुमति आवश्यक होगी।

रोजमर्रा के खर्च को छोड़कर वित्तीय स्वीकृति पर रोक

कुलपति रोजमर्रा के प्रशासनिक खर्च को छोड़कर कोई भी वित्तीय निर्णय या वित्तीय स्वीकृति कुलाधिपति की अनुमति के बिना जारी नहीं कर सकेंगे। इससे विश्वविद्यालय के बड़े वित्तीय और नीतिगत फैसले फिलहाल लोकभवन की अनुमति पर निर्भर हो गए हैं।

बिना अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे

आदेश में कुलपति को निर्देश दिया गया है कि वे कुलाधिपति की पूर्व अनुमति के बिना विश्वविद्यालय मुख्यालय नहीं छोड़ेंगे। लोकभवन ने सभी निर्देशों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है।

आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय (एकेयू) में जांच समिति के गठन को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। बीते दिनों विश्वविद्यालय प्रशासन ने समिति के गठन की प्रक्रिया, अधिकार क्षेत्र और जांच की निर्धारित अवधि पर सवाल उठाते हुए राज्यपाल सचिवालय को पत्र भेजा था।

वहीं, कुलसचिव डॉ. नीरंजन प्रसाद यादव ने जांच समिति के समन्वयक और उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव पवन कुमार सिन्हा पर कथित अमर्यादित व्यवहार, आपत्तिजनक भाषा के प्रयोग और धमकी देने के गंभीर आरोप लगाए था।

कुलसचिव की ओर से भेजे गए पत्र में दावा किया गया है कि जांच के दौरान पवन कुमार सिन्हा ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों के साथ प्रशासनिक और संस्थागत मर्यादा के विपरीत व्यवहार किया। पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुलसचिव को “हाथ तुड़वाने की धमकी” जैसी कथित धमकीपूर्ण भाषा का सामना करना पड़ा था।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे गंभीर मामला बताते हुए संबंधित अधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग की थी।