स्नातक और शिक्षक कोटे से MLC की 8 सीटों पर चुनाव की घोषणा से पहले ही JDU में घमासान मच गया है। पार्टी के दो सीनियर लीडर आमने-सामने हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा के साथ नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने दोनों के बीच सुलह कराने की कोशिश
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अब मोकामा से जदयू विधायक अनंत सिंह ने खुलकर ऐलान कर दिया है कि वे पटना स्नातक चुनाव में नीरज कुमार की जमानत जब्त करवा देंगे। पलटवार करते हुए नीरज कुमार ने कहा-

जमानत लिखने तो आता नहीं है वे मुझे चुनाव क्या हराएंगे।

इस बीच अनंत सिंह ने अपने एक पुराने दुख का भी जिक्र किया। कहा कि मेरे घर में नीरज कुमार ने AK-47 रखवा कर गिरफ्तार कराया। जेल भिजवाया। इस आरोप में कितनी सच्चाई है, इसे समझने के लिए पढ़िए पूरी कहानी…

तारीख-16 अगस्त 2019 । समय-सुबह 3.15 बजे। जगह- बाढ़ का नदावां गांव।
बाढ़ थाना के तत्कालीन SHO संजीत कुमार को गुप्त सूचना मिली कि मोकामा विधायक अनंत सिंह के पैतृक घर, नदावां गांव में अवैध हथियार और विस्फोटक छिपाकर रखे गए हैं। इसे कहीं ले जाने की तैयारी है।
पुलिस ने इस सूचना पर टीम बनाई। इसके बाद सुबह 4:30 बजे नदावां गांव में दबिश दी। अनंत सिंह के घर पर ताला लगा था। पूछताछ में पता चला कि घर की देखरेख सुनील राम करता है। उसी के पास घर की चाबी है। पुलिस ने सुनील राम को पकड़ा और घर खुलवाया।
बाढ़ थाने में दर्ज FIR के मुतबिक घर के एक कमरे में लोहे की अलमारी थी। इसके पीछे पीले रंग का प्लास्टिक बैग रखा था। इसमें AK-47 राइफल, उसका मैगजीन, 26 जिंदा कारतूस और 7.62mm के दो हैंड ग्रेनेड बरामद किए गए।
FSL की जांच में AK-47 पूरी तरह सही पाया गया। कारतूस जिंदा थे। इसी FIR में इस बात का भी जिक्र है कि रेड के समय अनंत सिंह न्यायिक हिरासत में थे।

FIR में आर्म्स एक्ट और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम (Explosive Substances Act) के साथ UAPA की धारा-13 भी लगाई गई थी। जांच का जिम्मा DSP स्तर की अधिकारी लिपि सिंह ने संभाला। लिपी सिंह आरसीपी सिंह (उस वक्त जदयू के सीनियर नेता) की बेटी हैं। हालांकि FIR में दर्ज UAPA एक्ट का चार्जशीट में जिक्र नहीं किया गया।
कोर्ट में केस का ट्रायल शुरू हुआ। 3 साल बाद ट्रायल कोर्ट ने 14 जून 2022 को अनंत सिंह और सह-आरोपी सुनील राम को दोषी ठहराया। 21 जून 2022 को सजा सुनाई गई। आर्म्स एक्ट और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धाराओं में दोनों को 10-10 साल की सजा सुनाई गई।

ट्रायल कोर्ट में सजा मिलने के बाद अनंत सिंह ने पटना हाईकोर्ट में अपील की। 14 अगस्त 2024 को पटना हाईकोर्ट के जस्टिस चंद्र शेखर झा ने अनंत सिंह और सुनील राम दोनों को बरी कर दिया।
ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित नहीं कर सका।
हाईकोर्ट ने कई गंभीर कमियां गिनाईं
1. घर की चाबी और ताला जब्त नहीं किया गया
पुलिस का दावा था कि घर बंद था और सुनील राम के पास चाबी मिली, जिससे घर खोला गया। लेकिन चाबी और ताला दोनों जब्त नहीं किए गए। हाईकोर्ट ने इसे महत्वपूर्ण कमी माना और कहा कि इससे रेड की शुरुआत पर ही संदेह पैदा होता है।
2. स्वतंत्र गवाह नहीं जुटा पाई पुलिस
पुलिस के अनुसार गांव के लोग स्वतंत्र गवाह बनने को तैयार नहीं हुए। इसके बाद दो रिजर्व पुलिसकर्मियों को गवाह बनाया गया। हाईकोर्ट ने कहा कि ये दोनों वास्तव में बिहार पुलिस के रिजर्व फोर्स के कांस्टेबल थे। इसलिए उन्हें स्वतंत्र गवाह नहीं माना जा सकता। उनकी गवाही जांच के दौरान भी दर्ज नहीं की गई थी। वे ट्रायल में पहली बार गवाह बने।
3. अनंत सिंह को हथियारों की जानकारी थी, यह साबित नहीं हुआ
कोर्ट ने कहा कि हथियार किसी ऐसे घर से मिलना, जिसे अनंत सिंह का पैतृक घर बताया गया, अपने-आप में यह साबित नहीं करता कि अनंत सिंह को उन हथियारों के वहां होने की जानकारी थी।
आर्म्स एक्ट की धारा 35 के संदर्भ में हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन को यह दिखाना जरूरी था कि अनंत सिंह को हथियारों की मौजूदगी की जानकारी थी। कोर्ट को ऐसा पर्याप्त सबूत नहीं मिला।

अब,पहली बार अनंत सिंह और नीरज कुमार ने एक-दूसरे को जवाब दिया है, दोनों के बयान पढ़िए..
नीरज ने मुझे फंसा कर जेल भेजा- अनंत सिंह
नीरज सिंह पर बयान देते हुए अनंत सिंह ने कहा, 'नीरज के जीतने से किसी को क्या फायदा है। इसमें पार्टी का सिंबल भी नहीं मिलता है। इन्होंने मेरे साथ ललन सिंह का विरोध किया। जब मेरा विरोध किया तब पार्टी ने कुछ नहीं किया। इसके कारण हम दूसरी पार्टी में गए, निर्दलीय लड़े। पार्टी हम दोनों का नार्को टेस्ट कराए। सच सब सामने आ जाएगा। नीरज को हराने के लिए हम अपना पूरा काबू लगाएंगे। नीरज कुमार की हार तय है।
जमानत लिखने नहीं आता, जब्त क्या कराएंगे- नीरज कुमार
इनको जमानत लिखने आता है, जो जमानत जब्त करा देंगे। नार्को टेस्ट कराने का अधिकार कोर्ट को है। नीरज कुमार को दम लगाने की जरूरत नहीं है। जदयू का कार्यकर्ता दम लगाता है। इन लोगों की बोली पर कोई भरोसा नहीं है। ऐसे लोगों की राजनीति में कोई वजूद नहीं है। ये लोग पार्टी बदलने वाला लोग है। हम क्रिमिनल नहीं हैं। राजनीति में क्रिमिनल पर प्रहार हैं।
क्या नीरज की जीत के लिए अनंत जरूरी हैं?
सीनियर जर्नलिस्ट अरुण पांडेय कहते हैं, 'ये ग्रेजुएट का चुनाव है। इसमें आम वोटर्स की बहुत बड़ी भूमिका नहीं रह जाती है। नीरज कुमार के लिए अनंत सिंह न मजबूरी हैं और न जरूरी हैं। बस डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की जा रही है कि क्षेत्र में कोई गलत मैसेज न जाए।’
‘पार्टी के भीतर नेता के प्रति नाराजगी का मैसेज नहीं जाना चाहिए। पार्टी एकजुटता का मैसेज देना चाहती है। अनंत सिंह की अपनी छवि है। मोकामा को लेकर दोनों का अपना-अपना खुन्नस है।’

पटना स्नातक में नीतीश कुमार का गृह जिला नालंदा भी
87,921 वोटरों वाले पटना स्नातक विधान परिषद क्षेत्र में पटना, नालंदा, नवादा जिले आते हैं। नालंदा नीतीश कुमार का गृह जिला है।
इस क्षेत्र में 26 विधानसभा सीटें (पटना की 14, नालंदा की 7 और नवादा की 5) शामिल हैं, जिसमें से 2025 विधानसभा चुनाव में NDA 22 सीटें जीता था।
यहां नीरज कुमार लगातार 2008 से चुनाव जीत रहे हैं। अगर इस बार हारे तो NDA खासकर JDU के खिलाफ गलत मैसेज जाएगा। विपक्षी पार्टियां इसे नीतीश कुमार के किले में हार के तौर पर देखेंगी। जिसका पार्टी के मनोबल पर असर पड़ सकता है।