Jul 31, 2026 04:15 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान
Anthropic ने खुलासा किया है कि उसके Claude AI मॉडल्स ने इंटरनल टेस्टिंग के दौरान गलती से तीन कंपनियों के सिस्टम तक पहुंच बना ली। कंपनी का कहना है कि यह कॉन्फिगरेशन की चूक थी।

Claude AI ने इंटरनल टेस्टिंग के दौरान गलती से तीन कंपनियों तक पहुंच बना ली।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में सुरक्षा को लेकर एक और बड़ा मामला सामने आया है। OpenAI के बाद अब AI कंपनी Anthropic ने स्वीकार किया है कि उसके Claude AI मॉडल्स ने इंटरनल साइबर सिक्योरिटी टेस्टिंग के दौरान गलती से तीन अलग-अलग कंपनियों के पावरफुल सिस्टम में गलत तरीके से एंटर कर लिया। कंपनी का कहना है कि यह किसी जानबूझकर किए गए साइबर अटैक का मामला नहीं था, बल्कि टेस्टिंग एनवायरनमेंट की कॉन्फिगरेशन में हुई चूक के चलते ऐसा हुआ।
Anthropic के मुताबिक, कंपनी ने 1.41 लाख से ज्यादा साइबर सिक्योरिटी टेस्ट सेशंस का रिव्यू किया। इसी दौरान पता चला कि अप्रैल से शुरू हुई तीन अलग-अलग घटनाओं में Claude Opus 4.7, Claude Mythos 5 और एक रिसर्च मॉडल इंटरनेट तक पहुंच गए और फिर अन्य कंपनियों के सिस्टम तक भी पहुंच बना ली।
इस वजह से हुई बड़ी गलती
कंपनी के अनुसार, AI मॉडल्स को एक कंट्रोल्ड (sandbox) इनवायरमेंट में टेस्ट किया जा रहा था, जहां उनका रियल इंटरनेट तक पहुंचना संभव नहीं होना चाहिए था। हालांकि टेस्टिंग पार्टनर के साथ हुई कॉन्फिगरेशन संबंधी गलती के चलते मॉडल्स को इंटरनेट एक्सेस मिल गया। इसके बाद उन्होंने कमजोर पासवर्ड, बिना ऑथेंटिकेशन वाले एंडपॉइंट और अन्य सामान्य सुरक्षा खामियों का फायदा उठाकर तीन अलग-अलग संगठनों के सिस्टम तक पहुंच बना ली।
दो कंपनियों को पता तक नहीं चला
Anthropic ने बताया कि प्रभावित तीन कंपनियों में से दो को इस सेंधमारी की जानकारी ही नहीं थी। कंपनी ने बाद में उन्हें इसकी सूचना दी, जबकि तीसरे संगठन से संपर्क करने की कोशिश जारी थी। हालांकि Anthropic ने सुरक्षा कारणों से इन कंपनियों के नाम पब्लिक नहीं किए हैं।
बता दें, रिपोर्ट में एक दिलचस्प घटना के बारे में भी बताया गया है। एक Claude मॉडल को जब यह एहसास हुआ कि वह किसी सिमुलेशन के बजाय वास्तविक कंपनी के सिस्टम पर काम कर रहा है, तो उसने खुद ही आगे की ऐक्टिविटी रोक दी। हालांकि दूसरे मामले में एक मॉडल ने वास्तविक सिस्टम होने का पता चलने के बावजूद अपनी एक्टिविटी जारी रखी।
OpenAI के बाद दूसरी बड़ी घटना
खुलासा ऐसे समय हुआ है जब हाल ही में OpenAI ने भी माना था कि उसके एक AI एजेंट ने टेस्टिंग के दौरान Hugging Face समेत कई बाहरी सिस्टम तक अनधिकृत पहुंच बना ली थी। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जैसे-जैसे AI मॉडल ज्यादा पावरफुल हो रहे हैं, उनकी टेस्टिंग और सुरक्षा व्यवस्था को भी उतना ही मजबूत बनाना होगा।
लेखक के बारे में
Pranesh Tiwari
प्राणेश वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां वे पिछले चार वर्षों से टेक्नोलॉजी सेक्शन का अहम हिस्सा हैं। खुद को दिल से लेखक और पेशे से पत्रकार मानने वाले प्राणेश के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में आठ वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने अपने पूरे करियर में साइंस और टेक्नोलॉजी की जटिलताओं को आम पाठकों के लिए सरल, सहज और रोचक भाषा में प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया है।
विशेषज्ञता और कार्यशैली
प्राणेश की विशेषज्ञता गैजेट्स, टेक इनसाइट्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे विषयों में है। वे तकनीकी बारीकियों और
कठिन शब्दावली को इस तरह प्रस्तुत करते हैं कि एक सामान्य पाठक भी तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया को आसानी से समझ सके। लेटेस्ट
गैजेट्स का रिव्यू करना और नए मोबाइल ऐप्स के फीचर्स को आजमाना उनके काम का पसंदीदा हिस्सा है। उनकी लेखन शैली में स्पष्टता,
रिसर्च और कहानी कहने का संतुलन देखने को मिलता है।
अब तक का सफर और उपलब्धियां
प्राणेश ने अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से की। इसके बाद उन्होंने न्यूजबाइट्स (NewsBytes) में
सीनियर टेक जर्नलिस्ट के रूप में काम किया, जहां उन्होंने तकनीकी रिपोर्टिंग में अपनी अलग पहचान बनाई। वे भारतीय जनसंचार
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लेखन और व्यक्तिगत रुचियां
पत्रकारिता के साथ-साथ प्राणेश एक संवेदनशील और रचनात्मक लेखक भी हैं। लॉकडाउन के दौरान उन्होंने ‘सिर्फ दोस्त: नए जमाने की
प्रेम कहानियां’ नामक लघुकथा संग्रह लिखा, जिसमें रिश्तों की बारीकियों को भावनात्मक रूप से प्रस्तुत किया गया है।
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चाहे वह किसी नए AI टूल की पड़ताल हो या किसी अनदेखी जगह की यात्रा.. प्राणेश का लक्ष्य हमेशा एक बेहतरीन कहानी बुनना ही होता है।
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