Sarvam AI Vivek Raghavan Statement: ग्वालियर: Sarvam एआई के सह-संस्थापक डॉ. विवेक राघवन ने कहा है कि भारत के युवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में आगे बढ़ने और नई तकनीक विकसित करने की पूरी क्षमता है। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में भारतीय युवा एआई के केवल इस्तेमाल करने वाले नहीं बल्कि इसे बनाने वाले भी बनेंगे।
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गौरतलब आज शनिवार को डॉ. विवेक राघवन ग्वालियर के मशहूर और ऐतिहासिक सिंधिया स्कूल के 129वां स्थापना दिवस के मौके पर पहुंचे थे। इस दौरान IBC24 न्यूज चैनल से उन्होंने बातचीत की और कई सवालों के जवाब भी दिए। डॉ. राघवन ने कहा कि युवाओं को एआई से घबराने के बजाय इसे अपनाना चाहिए। वे इस तकनीक का इस्तेमाल करके अपने काम को बेहतर बना सकते हैं और नई संभावनाओं का लाभ उठा सकते हैं।
एआई के लिए अमेरिका-चीन पर निर्भर रहना ठीक नहीं
डॉ. राघवन ने कहा कि भारत के लिए अपनी एआई तकनीक विकसित करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि एआई के मामले में अमेरिका और चीन पर निर्भर रहना देश के लिए सही नहीं होगा। भारत में अपने एआई मॉडल और उससे जुड़ा पूरा सिस्टम बनाने की क्षमता मौजूद है, हालांकि इस दिशा में आगे बढ़ने में अभी थोड़ा समय लग सकता है।
भारत में एआई कंपनियों की संख्या बढ़नी चाहिए
Sarvam एआई के सह-संस्थापक ने कहा कि देश में एआई के क्षेत्र में ज्यादा कंपनियां सामने आनी चाहिए। इससे नई तकनीक विकसित करने की प्रक्रिया तेज होगी और भारत की क्षमता मजबूत होगी। उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि एआई को चुनौती के बजाय अवसर के रूप में देखें। नई तकनीक सीखकर और उसका सही इस्तेमाल करके युवा अपने काम की गुणवत्ता बढ़ा सकते हैं और भारत को एआई के क्षेत्र में आगे ले जाने में योगदान दे सकते हैं।
कौन हैं डॉ. विवेक राघवन? जानें उनके बारें में
डॉ. विवेक राघवन ने साल 1989 में दिल्ली के आईआईटी से बीटेक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने अमेरिका की कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल और कंप्यूटर इंजीनियरिंग में एमएस और पीएचडी की डिग्री हासिल की। वह भारत में आधार जैसी डिजिटल सुविधाओं को तैयार करने में भी अहम भूमिका निभा चुके हैं। उन्होंने UIDAI में चीफ प्रोडक्ट मैनेजर और बायोमेट्रिक आर्किटेक्ट के रूप में काम किया है।
डॉ. विवेक राघवन ने भारत में तकनीक के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण काम किए हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के लिए बनाए गए अनुवाद सॉफ्टवेयर SUVAS और जीएसटी नेटवर्क में धोखाधड़ी का पता लगाने वाले एआई मॉडल से जुड़ी परियोजनाओं में योगदान दिया है। इसके अलावा, उन्होंने नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के सलाहकार के रूप में भी काम किया है।
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वर्तमान में डॉ. विवेक राघवन का मुख्य उद्देश्य भारत के लिए अपनी एआई तकनीक विकसित करना है। वह Sarvam एआई के जरिए ऐसी तकनीक बनाने पर काम कर रहे हैं, जो हिंदी समेत भारत की अलग-अलग भाषाओं को समझ सके और उनमें काम कर सके। उनका लक्ष्य है कि भारत को एआई के लिए दूसरे देशों की तकनीक पर कम निर्भर रहना पड़े। अगस्त 2026 में उन्हें TIME मैगजीन की प्रमुख एआई हस्तियों में भी शामिल किया गया था।
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