October 8, 2026

AI की दुनिया में भी भेदभाव! महिला एजेंट को मिलते हैं पुरुषों से कम पैसे... समझिए ऐसा क्यों है?

AI को आमतौर पर एक ऐसी तकनीक माना जाता है, जो इंसानों की तरह भेदभाव नहीं करती. लेकिन एक नई स्टडी में सामने आया है कि AI को जब इंसान जैसा रूप और पहचान दी जाती है, तो लोग उसके साथ भी जेंडर के आधार पर अलग व्यवहार कर सकते हैं. यूनिवर्सिटी ऑफ लिमरिक के रिसर्चर्स ने पाया कि लोगों ने एक महिला जैसे दिखने वाले AI एजेंट को उसी काम के लिए पुरुष जैसे दिखने वाले AI एजेंट से कम पैसे दिए.

इस स्टडी में 189 लोगों ने वर्चुअल रियलिटी यानी VR ऑफिस में काम किया. उनके साथ पुरुष रूप वाले AI एजेंट जोनाह (Jonah) और महिला रूप वाली AI एजेंट जोहाना (Johanna) ने काम किया. दोनों AI एजेंट के पीछे एक ही तकनीक थी और दोनों ने एक जैसे काम किए. इसके बावजूद लोगों ने पुरुष AI एजेंट को महिला AI एजेंट से 10.25% ज्यादा पैसे दिए. रिसर्चर्स के मुताबिक, यह अंतर इसलिए खास है क्योंकि दोनों AI एजेंट की तकनीक और काम एक जैसे थे. यानी फर्क सिर्फ इस बात में था कि उन्हें पुरुष या महिला के रूप में पेश किया गया था.

पुरुष AI को ज्यादा इंसान जैसा माना

स्टडी में यह भी सामने आया कि लोगों को पुरुष AI एजेंट, महिला AI एजेंट की तुलना में ज्यादा इंसानों जैसा लगा. रिसर्चर्स का कहना है कि AI को इंसान जैसा दिखाने और उसकी पहचान तय करने से लोगों के मन में पहले से मौजूद सामाजिक सोच और जेंडर से जुड़े पूर्वाग्रह सामने आ सकते हैं. स्टडी में कई लोगों ने कहा कि उन्हें AI के महिला या पुरुष होने से कोई फर्क नहीं पड़ता. कई प्रतिभागियों ने ऐसे AI को पसंद किया, जो साफ तौर पर इंसान जैसा न लगे. इसके बावजूद लोगों ने इंसान जैसे और पुरुष रूप वाले AI को ज्यादा पैसे दिए. जब लोगों ने टेक्स्ट चैटबॉट या डेस्क रोबोट के साथ काम किया, तब भी इंसान जैसे दिखने वाले AI पर ज्यादा भरोसा किया गया और उसे ज्यादा पेमेंट मिला.

क्यों अहम है यह स्टडी?

AI एजेंट अब तेजी से ऑफिस और दूसरी नौकरियों में इस्तेमाल हो रहे हैं. IT कंसल्टिंग कंपनी Accelirate के मुताबिक, 2026 में करीब 80% कंपनियां AI एजेंट का इस्तेमाल कर रही हैं. ऐसे में AI को किस तरह डिजाइन किया जाता है, इसका असर लोगों के भरोसे और फैसलों पर पड़ सकता है. ब्रिटेन में पिछले साल पुरुषों और महिलाओं की औसत प्रति घंटे कमाई के बीच 6.9% का अंतर था. जब समान नौकरी, कौशल और अनुभव वाले पुरुषों और महिलाओं की तुलना की गई, तो यह अंतर करीब 1-2% बताया गया.

इस स्टडी के सह-लेखक डॉ. मैरी हाउसफेल्ड ने कहा कि लोग AI को निष्पक्ष मानते हैं, लेकिन उसकी डिजाइन और पहचान इंसानों में मौजूद पुराने पूर्वाग्रहों को सक्रिय कर सकती है. स्टडी Human-like and male? How AI assistant design relates to trust and monetary reward at work in VR नाम से फिनलैंड के वासा में इस हफ्ते होने वाली 14वीं Nordic Conference on Human-Computer Interaction में पेश की जाएगी. रिसर्चर्स का कहना है कि AI को डिजाइन करते समय सावधानी जरूरी है, ताकि पुरानी असमानताएं नई तकनीक में दोबारा न दिखाई दें.

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