By Oneindia Staff
Published: Friday, July 31, 2026, 15:30 [IST]
Adani Energy Solutions: भारत में ऊर्जा क्षेत्र तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है। एक तरफ देश 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में काम कर रहा है, वहीं दूसरी ओर हरित हाइड्रोजन (Green Hydrogen), हरित अमोनिया (Green Ammonia), डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी नई अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा करने के लिए बिजली अवसंरचना (Power Infrastructure) का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। इसी कड़ी में अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड (AESL) को आंध्र प्रदेश में करीब 8,500 करोड़ रुपये की एक बड़ी अंतर-राज्यीय (Inter-State) ट्रांसमिशन परियोजना मिली है।
यह परियोजना सिर्फ एक बिजली ट्रांसमिशन लाइन नहीं है, बल्कि इसे भारत के भविष्य के ऊर्जा ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। इसका उद्देश्य विशाखापत्तनम (विजाग) क्षेत्र में प्रस्तावित ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया परियोजनाओं को मजबूत बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराना है। साथ ही तेजी से विकसित हो रहे डेटा सेंटर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को भी विश्वसनीय बिजली मिलेगी।
क्या है पूरा मामला?
अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड ने भारत सरकार के टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली (Tariff Based Competitive Bidding-TBCB) मॉडल के तहत यह परियोजना हासिल की है। कंपनी इस बोली प्रक्रिया में सबसे कम और प्रतिस्पर्धी बोली लगाने वाली कंपनी बनकर उभरी।
परियोजना का आधिकारिक नाम है- 'विशाखापत्तनम क्षेत्र, आंध्र प्रदेश में प्रस्तावित ग्रीन हाइड्रोजन/ग्रीन अमोनिया परियोजनाओं के लिए ट्रांसमिशन सिस्टम (फेज-I)' यह परियोजना देश में स्वच्छ ऊर्जा आधारित औद्योगिक विकास को गति देने के उद्देश्य से तैयार की गई है।
क्यों जरूरी है यह परियोजना?
भारत आने वाले वर्षों में ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में काम कर रहा है। ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए भारी मात्रा में बिजली की जरूरत होती है, जो पूरी तरह नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से आनी चाहिए। सरकारी अनुमान के मुताबिक विशाखापत्तनम क्षेत्र में प्रस्तावित ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया परियोजनाओं के लिए लगभग 4,500 मेगावाट बिजली की आवश्यकता होगी। इतनी बड़ी बिजली मांग को पूरा करने के लिए मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क जरूरी है। यही काम यह परियोजना करेगी।
किन क्षेत्रों को मिलेगा फायदा?
इस परियोजना से केवल ग्रीन हाइड्रोजन उद्योग को ही लाभ नहीं होगा, बल्कि कई अन्य क्षेत्रों को भी इसका फायदा मिलेगा। इनमें प्रमुख हैं...
- ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र
- ग्रीन अमोनिया उत्पादन इकाइयां
- AI आधारित डेटा सेंटर
- हाइपरस्केल डेटा सेंटर
- डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर
- औद्योगिक पार्क
- समुद्री लॉजिस्टिक्स और पोर्ट आधारित उद्योग
विशाखापत्तनम पहले से ही देश के प्रमुख बंदरगाहों में शामिल है। अब यहां डिजिटल और स्वच्छ ऊर्जा उद्योगों में बड़े निवेश की योजना है।
किस तरह का इंफ्रास्ट्रक्चर बनेगा?
- यह परियोजना विजाग पावर ट्रांसमिशन लिमिटेड नामक विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) के माध्यम से लागू की जाएगी।
- परियोजना के तहत कई बड़े बिजली ढांचे तैयार किए जाएंगे।
पेंडुर्थी में बनेगा अत्याधुनिक GIS सबस्टेशन
परियोजना के तहत पेंडुर्थी (विशाखापत्तनम) में 4×1500 MVA, 765/400 केवी GIS सबस्टेशन स्थापित किया जाएगा। GIS यानी Gas Insulated Substation कम जगह में अधिक क्षमता वाली आधुनिक तकनीक है, जिसका उपयोग बड़े शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है।
खम्मम-II में भी बनेगा हाई कैपेसिटी सबस्टेशन
इसके अलावा परियोजना में 3×1500 MVA, 765/400 केवी खम्मम-II सबस्टेशन भी बनाया जाएगा। ये दोनों सबस्टेशन मिलकर बड़े पैमाने पर बिजली ट्रांसमिशन सुनिश्चित करेंगे।
AESL के नेटवर्क में कितना इजाफा होगा?
इस परियोजना के पूरा होने के बाद अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस का ट्रांसमिशन नेटवर्क और मजबूत हो जाएगा।
कंपनी के मुताबिक-
- 1,582 सर्किट किलोमीटर (ckm) नई ट्रांसमिशन लाइनें जुड़ेंगी।
- 10,500 MVA नई ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता जुड़ेगी।
इसके बाद कंपनी का कुल नेटवर्क होगा-
| पैरामीटर | परियोजना के बाद |
|---|---|
| कुल ट्रांसमिशन नेटवर्क | 29,531 ckm |
| कुल ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता | 1,33,675 MVA |
यह विस्तार AESL को भारत की सबसे बड़ी निजी ट्रांसमिशन कंपनियों में और मजबूत स्थिति देगा।
क्या बोले कंपनी के CEO?
अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) कंदर्प पटेल ने कहा कि यह परियोजना भारत के ऊर्जा ढांचे को भविष्य के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभाएगी। उनके मुताबिक, यह परियोजना ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया उद्योग को मजबूत आधार देगी। विजाग क्षेत्र के उभरते डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को विश्वसनीय बिजली उपलब्ध कराएगी। औद्योगिक विकास और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को गति मिलेगी।
क्यों बन रहा है विजाग नया डिजिटल हब?
पिछले कुछ वर्षों में विशाखापत्तनम तेजी से डिजिटल निवेश का केंद्र बनकर उभरा है। यहां कई बड़ी कंपनियां-
- AI आधारित कंप्यूटिंग
- क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर
- हाइपरस्केल डेटा सेंटर
- डिजिटल स्टोरेज
- समुद्री डेटा कनेक्टिविटी
जैसे क्षेत्रों में निवेश कर रही हैं। डेटा सेंटर चौबीसों घंटे चलते हैं और उन्हें निर्बाध बिजली की आवश्यकता होती है। ऐसे में मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क उनकी सबसे बड़ी जरूरत है।
ग्रीन हाइड्रोजन आखिर है क्या?
ग्रीन हाइड्रोजन वह हाइड्रोजन है जिसे पानी के इलेक्ट्रोलिसिस के जरिए तैयार किया जाता है और इस प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाली बिजली पूरी तरह सौर, पवन या अन्य नवीकरणीय स्रोतों से आती है। इसके उत्पादन में कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन नहीं होता। इसी वजह से इसे भविष्य का स्वच्छ ईंधन माना जाता है।
ग्रीन अमोनिया क्यों महत्वपूर्ण है?
ग्रीन हाइड्रोजन को आगे प्रोसेस कर ग्रीन अमोनिया बनाया जाता है। इसका उपयोग होता है...
- उर्वरक उद्योग
- समुद्री ईंधन
- ऊर्जा भंडारण
- रसायन उद्योग
- निर्यात
भारत आने वाले वर्षों में ग्रीन अमोनिया का बड़ा निर्यातक बनने की योजना पर काम कर रहा है।
ट्रांसमिशन सिस्टम क्यों होता है सबसे अहम?
- किसी भी बिजली परियोजना में उत्पादन जितना महत्वपूर्ण होता है, उतना ही जरूरी उसका ट्रांसमिशन नेटवर्क भी होता है।
- यदि बिजली उत्पादन तो हो जाए लेकिन उसे उद्योगों तक पहुंचाने का मजबूत नेटवर्क न हो, तो पूरी परियोजना प्रभावित हो सकती है।
- यही कारण है कि सरकार अब बिजली उत्पादन के साथ-साथ ट्रांसमिशन अवसंरचना पर भी बड़े निवेश को प्राथमिकता दे रही है।
TBCB मॉडल क्या है?
टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली (TBCB) ऐसा मॉडल है जिसमें ट्रांसमिशन परियोजनाएं खुली प्रतिस्पर्धी बोली के जरिए निजी या सार्वजनिक कंपनियों को दी जाती हैं। इसका मकसद है...
- प्रतिस्पर्धा बढ़ाना
- लागत कम करना
- समय पर परियोजना पूरी करना
- उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ कम करना
AESL ने इसी प्रक्रिया के तहत यह परियोजना हासिल की है।
30 महीने में पूरा करने का लक्ष्य
कंपनी ने इस ट्रांसमिशन परियोजना को 30 महीनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा है। यदि तय समय में परियोजना पूरी होती है तो विजाग क्षेत्र में प्रस्तावित कई बड़े औद्योगिक निवेशों को समय पर बिजली उपलब्ध हो सकेगी।
आंध्र प्रदेश को कैसे मिलेगा फायदा?
यह परियोजना केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है। इससे पूरे राज्य की औद्योगिक क्षमता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। संभावित लाभ....
- ग्रीन हाइड्रोजन उद्योग को मजबूती
- बड़े निवेश आकर्षित होंगे
- रोजगार के नए अवसर
- डेटा सेंटर उद्योग का विस्तार
- बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ेगी
- औद्योगिक प्रतिस्पर्धा मजबूत होगी
- स्वच्छ ऊर्जा आधारित अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी
भारत के ऊर्जा संक्रमण में क्या है इसका महत्व?
भारत अगले दो दशकों में ऊर्जा क्षेत्र में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, हरित ईंधन, AI, डिजिटल सेवाओं और डेटा अर्थव्यवस्था के विस्तार के लिए केवल बिजली उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उच्च क्षमता वाले ट्रांसमिशन नेटवर्क की भी आवश्यकता होगी।
विशाखापत्तनम परियोजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे न केवल ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया जैसे भविष्य के उद्योगों को विश्वसनीय बिजली मिलेगी, बल्कि डेटा सेंटर, डिजिटल अवसंरचना और बंदरगाह आधारित औद्योगिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। परियोजना पूरी होने के बाद आंध्र प्रदेश के ऊर्जा ढांचे को मजबूती मिलने के साथ-साथ भारत के स्वच्छ ऊर्जा मिशन और औद्योगिक विकास को भी दीर्घकालिक समर्थन मिलने की उम्मीद है।