ABS vs EBD Braking: बरसात के मौसम में सुरक्षित ड्राइविंग के लिए ABS और EBD तकनीक काफी काम आते हैं। आइए जानते हैं कि यह कैसे काम करते हैं और इमरजेंसी ब ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संक्षेप में पढ़ें
ऑटो डेस्क, नई दिल्ली। मानसून के मौसम में सड़कों पर फिसलन बहुत ही बढ़ जाती है। ऐसे में तेज बारिश के दौरान अचानक ब्रेक लगाने पर गाड़ी के फिसलने का खतरा काफी बढ़ जाता है। इमरजेंसी ब्रेकिंग के समय गाड़ी के हादसों से बचाने के लिए ABS और EBS जैसी तकनीक अहम भूमिका निभाती है। आइए समझते हैं कि बारिश के मौसम में कौन कितना सुरक्षित है।
कैसे कार करता है ABS?
बारिश में जब आप अचानक जोर से ब्रेक मारते हैं तो टॉयर लॉक हो सकते हैं। इससे गाड़ी सड़क पर फिसलने लगती है और स्टीयरिंग कंट्रोल खत्म हो जाता है। ABS स्पीड सेंसर्स की मदद से यह समझ जाता है कि कौन सा पहिया लॉक होने वाला है और यह एक सेकंड में कई बार ब्रेक छोड़ता और लगाता है। पहिए लॉक ने होने की वजह से गाड़ी फिसलती नहीं है और ड्राइवर इमरजेंसी में गाड़ी को किसी दूसरी डायरेक्शन में मोड़ कर हादसे से बच सकता है।
EBD कैसे काम करता है?
क्या आप जानते हैं कि गाड़ी का वजन हर पहिए पर एक जैसा नहीं होता। बारिश में जब सड़क गीली होती है तो हर टायर की पकड़ अलग-अलग हो सकती है। EBD गाड़ी की रफ्तार, मोड़ और वजन के हिसाब से यह तय करता है कि किस पहिए को कितने ब्रेक प्रेशर की जरूरत है। अगर पीछे का हिस्सा भारी है या कोई टायर ज्यादा फिसलने वाली जगह पर है तो EBD वहां सही मात्रा में ब्रेक तक पावर भेजता है जिससे बैलेंस न बिगड़े।
इमरजेंसी में कौन बेस्ट?
सच में ABS और EBD एक-दूसरे के खिलाफ नहीं है बल्कि मिलकर काम करते हैं। EBD यह तय करता है कि किस पहिए पर कितना ब्रेक लगाना है और ABS यह तय करता है कि ब्रेक लगाने के दौरान पहिया लॉक होने से बचा रहे। भीगी सड़कों पर अगर सिर्फ ABS हो तो गाड़ी रुक जाएगी लेकिन थोड़ा बैलेंस बिगड़ सकता है। लेकिन जब ABS के साथ EBD भी होता है गाड़ी कम दूरी में बिना फिसले और बैलेंस के साथ रुक जाती है।
मानसून के मौसम में सुरक्षित ड्राइविंग के लिए दोनों ही तकनीकों, ABS और EBD का एक साथ होना सबसे ज्यादा सुरक्षित माना जाता है।
यह भी पढ़ें- TATA Harrier EV vs Vinfast VF7: रेंज, पावर, फीचर्स और कीमत के मामले में कौन सी SUV है बेस्ट?