महात्मा गांधी के शांति और अहिंसा के विचारों को गांवों तक पहुंचाने के लिए राजस्थान में बनाया गया देश का पहला शांति एवं अहिंसा विभाग बजट और स्टाफ दोनों मोर्चों पर सिमटता दिख रहा है। विभाग की 2025-26 की वार्षिक प्रशासनिक रिपोर्ट के मुताबिक 2023-24 में इ
.
- राजस्थान में महात्मा गांधी के विभाग में 114 स्वीकृत पदों में सिर्फ 21 पर ही कर्मचारी
बजट ही नहीं, विभाग में कर्मचारियों की स्थिति भी कमजोर है। निदेशालय और जिला प्रकोष्ठों में कुल 114 पद स्वीकृत हैं, लेकिन केवल 21 पर कर्मचारी कार्यरत हैं और 93 यानी करीब 82% पद खाली हैं। जयपुर निदेशालय में 27 में 16 पद रिक्त हैं। सात संभागीय मुख्यालयों के प्रकोष्ठों में 35 में सिर्फ 3 पद भरे हैं, जबकि 32 खाली हैं। वहीं 26 जिला मुख्यालयों के प्रकोष्ठों में 52 पदों में सिर्फ 7 पर कर्मचारी हैं और 45 पद खाली हैं। गौरतलब है कि राजस्थान में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के दौरान 2019 में पहला शांति एवं अहिंसा प्रकोष्ठ बनाया गया था।
अक्टूबर 2022 में इसे अलग विभाग का स्वरूप दिया गया। इस गांधी जयंती पर राजस्थान की इस अनूठी सरकारी पहल के चार साल पूरे हो रहे हैं। इसके दो प्रमुख घटक शांति एवं अहिंसा निदेशालय और महात्मा गांधी विद्यापीठ : गांधी अध्ययन केंद्र हैं।
5 साल में ऐसे बदला बजट व खर्च
| वित्त वर्ष | बजट | व्यय राशि |
| 2021–22 | 73.62 | 0.77 |
| 2022–23 | 1531.51 | 439.39 |
| 2023–24 | 10944.04 | 1001.03 |
| 2024–25 | 498.29 | 330.33 |
| 2025–26* | 508.30 | 283.84 |
विभाग का काम क्या है?
विभाग का उद्देश्य गांधी के शांति-अहिंसा के सिद्धांतों और विचारों का प्रचार-प्रसार करना, गांधीवादी साहित्य को लोगों तक पहुंचाना, प्रशिक्षण और जन-जागरूकता कार्यक्रम चलाना और शांति, अहिंसा और सामुदायिक सद्भाव से जुड़ी योजनाएं तैयार करना है। इसके तहत गांधी अध्ययन के लिए सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और डिग्री पाठ्यक्रम शुरू करने व शोध कराने की भी योजना है।
2023-24 में ₹109.44 करोड़ मिले, खर्च सिर्फ 10.01 करोड़ बजट और वास्तविक खर्च में सबसे बड़ा अंतर 2023-24 में दिखता है। उस वर्ष ₹109.44 करोड़ का प्रावधान था, लेकिन विभाग ₹10.01 करोड़ ही खर्च कर पाया। यानी उपलब्ध बजट का करीब 9% ही खर्च हुआ। इसके बाद अगले वित्त वर्ष में बजट सीधे ₹4.98 करोड़ पर आ गया। 2024-25 में इसमें से ₹3.30 करोड़ खर्च हुए। 2025-26 में ₹5.08 करोड़ के मुकाबले 31 दिसंबर तक ₹2.84 करोड़ खर्च दर्ज है।
गांव तक नेटवर्क का दावा, स्टाफ जिला स्तर पर ही नहीं...विभाग की संगठनात्मक संरचना राज्य मुख्यालय से ग्राम पंचायत तक बनाई गई है। जिला, उपखंड, नगर निकाय, पंचायत समिति और ग्राम पंचायत स्तर तक शांति एवं अहिंसा प्रकोष्ठ की व्यवस्था बताई गई है। लेकिन जिला स्तर पर ही पद रिक्त हैं।