बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ के आह्वान पर शिक्षक दिवस के अवसर पर जिले के सैकड़ों शिक्षकों ने जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) कार्यालय के समक्ष एक दिवसीय अनशन पर रहकर सत्याग्रह आंदोलन किया। आंदोलन के माध्यम से शिक्षकों की विभिन्न लंबित समस्याओं के शी
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संघ के जिला अध्यक्ष संजीव कुमार कामत ने कहा कि राज्य के शिक्षक समय पर वेतन भुगतान, प्रोन्नति, पूर्ण वेतनमान एवं पुरानी पेंशन योजना लागू करने सहित विभिन्न मांगों को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं। नियोजित शिक्षक, विशिष्ट शिक्षक, विद्यालय अध्यापक, प्रधान शिक्षक एवं प्रधानाध्यापक को सप्तम पुनरीक्षित वेतनमान के तहत पे-बैंड-2 का पूर्ण वेतनमान 9300–34800 प्रदान किया जाए, पुरानी पेंशन योजना लागू की जाए तथा सभी प्रकार की प्रोन्नति एवं समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित किया जाए। प्रधान सचिव अवधेश कुमार झा ने कहा कि सरकार शिक्षकों की अलग-अलग कोटि, अलग-अलग नाम एवं अलग-अलग वेतन संरचना के स्थान पर एक नाम और एक समान वेतन लागू करे। कोषाध्यक्ष सुरेन्द्र प्रसाद यादव ने कहा कि यदि सरकार वित्त रहित शिक्षकों, मदरसा एवं संस्कृत विद्यालयों के शिक्षकों को वेतनमान दे सकती है, तो मुख्यधारा की शिक्षा व्यवस्था में कार्यरत नियोजित शिक्षकों, विशिष्ट शिक्षकों, विद्यालय अध्यापकों एवं प्रधान शिक्षकों को पूर्ण वेतनमान से वंचित रखना न्यायोचित नहीं है।
सरकार अविलंब सभी शिक्षकों के लिए 9300–34800 का वेतनमान लागू करे। प्रवक्ता राकेश कुमार चौधरी व वरीय उपाध्यक्ष लीलाधर पासवान ने कहा कि लगभग एक वर्ष पूर्व नियुक्त प्रधान शिक्षकों को अब तक वेतन संरक्षण का लाभ नहीं मिला है। वरीय सचिव मो. मुर्तजा व ललित नारायण ललन ने कहा कि विगत दो वर्षों से नियोजित शिक्षकों को महंगाई भत्ते का भुगतान नहीं किया गया है। वहीं विशिष्ट शिक्षक एवं विद्यालय अध्यापकों के विभिन्न प्रकार के एरियर, आवास भत्ता एवं महंगाई भत्ते के अंतर की राशि का भुगतान भी लंबित है। उपाध्यक्ष पाण्डव यादव एवं सचिव प्रेमचंद प्रसाद ने मकतब, मदरसा सहित उर्दू माध्यम के विद्यालयों में गुरुवार को हाफ-डे लागू करने की मांग सरकार एवं शिक्षा विभाग से की। उपाध्यक्ष सतीश चन्द्र प्रसाद एवं सुरेन्द्र कुमार यादव ने कहा कि लंबे समय से नियोजित शिक्षकों की सेवा पुस्तिकाओं का अद्यतन एवं संधारण नहीं किया गया है।