Published: Saturday, July 25, 2026, 18:57 [IST]
Jantar Mantar Protest: देशभर में NEET परीक्षा में कथित धांधली को लेकर भड़के छात्रों के आंदोलन और 20 जुलाई को दिल्ली में हुए 'संसद चलो' मार्च पर पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब 93 पूर्व IAS, IPS, IFS और अन्य वरिष्ठ सिविल सेवकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को खुला पत्र लिखकर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की कड़ी निंदा की है।
संवैधानिक आचरण समूह (CCG) ने पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र न्यायिक जांच, गिरफ्तार छात्रों की रिहाई और परीक्षा सुधारों पर सरकार से तत्काल संवाद शुरू करने की मांग की है।
93 पूर्व नौकरशाहों ने उठाए पुलिस कार्रवाई पर सवाल
संवैधानिक आचरण समूह से जुड़े 93 पूर्व वरिष्ठ सिविल सेवकों ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को लिखे पत्र में कहा कि 20 जुलाई को 'संसद चलो' मार्च के दौरान छात्रों के साथ हुई पुलिस कार्रवाई बेहद चिंताजनक और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। पत्र पर पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, पूर्व चुनाव आयुक्त, दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों के हस्ताक्षर हैं। समूह का कहना है कि वह किसी राजनीतिक दल से जुड़ा नहीं है और केवल संविधान के मूल्यों की रक्षा के लिए आवाज उठा रहा है।
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पेलेट गन, टेजर और आंसू गैस के इस्तेमाल पर जताई चिंता
पत्र में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन, इलेक्ट्रिक बैटन (टेजर) और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया, जिससे कई छात्र गंभीर रूप से घायल हुए। एक छात्र की आंख और गर्दन के पास फंसे पेलेट निकालने के लिए सर्जरी तक करनी पड़ी। पूर्व अधिकारियों ने यह भी दावा किया कि कई पुलिसकर्मी बिना नेम प्लेट और कुछ सादे कपड़ों में प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज करते दिखाई दिए। उनके अनुसार निहत्थे छात्रों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई अस्वीकार्य है।
फेशियल रिकग्निशन और CRPF तैनाती पर भी सवाल
CCG ने पत्र में कहा कि संसद के आसपास फेशियल रिकग्निशन वैन की तैनाती और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की लाइव स्कैनिंग निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन हो सकती है। समूह ने सुप्रीम कोर्ट के पुट्टस्वामी फैसले का हवाला देते हुए इसे डर का माहौल बनाने वाला कदम बताया। साथ ही दंगा नियंत्रण उपकरणों के साथ CRPF की तैनाती पर भी सवाल उठाए गए। पत्र में कहा गया कि इस तरह की कार्रवाई JNU और जामिया मिल्लिया इस्लामिया में हुई घटनाओं की याद दिलाती है।
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न्यायिक जांच, छात्रों की रिहाई और परीक्षा सुधार की मांग
पूर्व अधिकारियों ने सरकार से पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराने, हिरासत में लिए गए छात्रों को तुरंत रिहा करने और सभी पुलिस मामलों को वापस लेने की मांग की है। साथ ही परीक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर छात्र संगठनों के साथ औपचारिक संवाद शुरू करने और भीड़ प्रबंधन की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करने की भी अपील की गई है। उनका कहना है कि छात्र शिक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों, पेपर लीक और प्रशासनिक विफलताओं के कारण सड़कों पर उतरे हैं, इसलिए उनकी आवाज को दमन से नहीं बल्कि संवाद से सुना जाना चाहिए।