October 13, 2026

इंदौर में ट्रैफिक सुधार पर हाईकोर्ट सख्त, पूछा-समाधान कहां है?: 92 में से सिर्फ 28 सिग्नल ITMS से जुड़े; ट्रैफिक पुलिस के 221 पद खाली - Indore News

इंदौर की बिगड़ती यातायात व्यवस्था, जर्जर सड़कों और पुराने न्यायालयीन आदेशों के पालन में देरी पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने नगर निगम और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। हाईकोर्ट ने पूछा कि शिकायतें दर्ज करना काफी नहीं, समाधान

.

मंगलवार को जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की बेंच के सामने सुनवाई में ट्रैफिक सिग्नलों के बीच समन्वय की कमी, पुलिस बल के रिक्त पद, पार्किंग की समस्या और निर्माणाधीन सड़कों की बदहाली जैसे मुद्दे उठे।

राजलक्ष्मी फाउंडेशन की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यातायात सुधार के लिए विभागों के बीच बेहतर तालमेल और जवाबदेही तय करने के सुझाव भी रखे गए।

92 में से सिर्फ 28 सिग्नल ITMS से जुड़े

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया और शिरीन सिलावट ने बताया कि शहर में कुल 92 ट्रैफिक सिग्नल हैं। इनमें 58 स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट और 34 नगर निगम के अधीन हैं, लेकिन केवल 28 सिग्नल ही इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) से जुड़े हैं।

अलग-अलग विभागों के सिग्नलों में तालमेल नहीं होने से वाहन चालकों को चौराहों पर बार-बार रुकना पड़ता है। इससे जाम और यात्रा में देरी होती है। सभी सिग्नलों को एकीकृत व्यवस्था से जोड़कर उनका समन्वित संचालन करने की जरूरत बताई गई।

इंदोर के चौराहे जहां ट्रैफिक सिग्नल भी नहीं दिखाई दिया।

इंदोर के चौराहे जहां ट्रैफिक सिग्नल भी नहीं दिखाई दिया।

221 पुलिसकर्मियों की कमी, 40 प्रवेश मार्गों पर बैरियर का सुझाव

यातायात पुलिस में स्वीकृत 881 पदों के मुकाबले 660 पुलिसकर्मी उपलब्ध होने की जानकारी दी गई। यानी 221 पद खाली हैं। पुलिस बल की कमी के कारण प्रमुख चौराहों, व्यस्त सड़कों और बाजारों में यातायात नियंत्रित करने में परेशानी होने का मुद्दा उठाया गया।

वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया ने शहर के करीब 40 प्रमुख प्रवेश मार्गों पर स्वचालित हाइड्रोलिक बैरियर लगाने का सुझाव दिया। अभी इन स्थानों पर भारी वाहनों के प्रवेश को नियंत्रित करने के लिए पुलिसकर्मी तैनात रहते हैं।

सुझाव के मुताबिक, बैरियर लगने से करीब 140 से 170 पुलिसकर्मियों को मुक्त कर शहर के भीतर प्रमुख चौराहों और व्यस्त मार्गों पर लगाया जा सकता है। यह नई भर्ती होने तक उपलब्ध पुलिस बल के बेहतर उपयोग का प्रस्ताव है।

311 एप पर शिकायतें दर्ज करना काफी नहीं

सड़कों पर गड्ढों और खराब सतह का मुद्दा उठने पर नगर निगम ने बताया कि 311 एप के जरिए क्षतिग्रस्त सड़कों की तस्वीरें अपलोड कर शिकायत दर्ज की जा सकती है। इस पर अदालत की चिंता यह रही कि शिकायत दर्ज करने की सुविधा से ही समस्या हल नहीं होती। वास्तविक कार्रवाई और समय पर मरम्मत भी जरूरी है।

नगर निगम से यह जानकारी मांगे जाने का मुद्दा उठा कि कितनी शिकायतें मिलीं, कितनों का निराकरण हुआ और कितनी लंबित हैं। यानी व्यवस्था की सफलता शिकायतों की संख्या से नहीं, बल्कि उनके समाधान से आंकी जानी चाहिए।

विजय नगर से देवास नाका तक सड़क की बदहाली

सुनवाई में विजय नगर चौराहे से देवास नाका तक सड़क की खराब स्थिति का मुद्दा भी रखा गया। बताया गया कि प्रस्तावित फ्लाईओवर के निर्माण के लिए सड़क के बीच का बड़ा हिस्सा खोदकर बैरिकेडिंग की गई है, जबकि निर्माण शुरुआती चरण में है। किनारे के रास्तों पर गड्ढे, धूल, कंकड़-पत्थर और निर्माण सामग्री फैली होने से परेशानी बढ़ रही है।

उचित वैकल्पिक मार्ग और सर्विस रोड नहीं होने से खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए जोखिम बढ़ने की बात कही गई। निर्माण के दौरान सड़क बाधित होने पर सुरक्षित और चलने योग्य वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने की जरूरत बताई गई।

इंदौर में 26 पार्किंग स्थल, दूसरे शहरों के आंकड़े भी रखे

सुनवाई में प्रस्तुत आंकड़ों के मुताबिक, इंदौर में 26 चिह्नित पार्किंग स्थल हैं। तुलना में नागपुर में 51, कानपुर में 42 और लखनऊ में 62 स्थल बताए गए। सीमित पार्किंग के कारण सड़कों पर अव्यवस्थित पार्किंग और यातायात में बाधा की समस्या उठाई गई। वाहनों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अतिरिक्त पार्किंग विकसित करने और अवैध पार्किंग पर नियंत्रण की जरूरत बताई गई।

2019 से लंबित याचिका, पुराने आदेशों के पालन पर सवाल

यह जनहित याचिका 2019 से विचाराधीन है। इसमें यातायात प्रबंधन, सिग्नलों के संचालन, पुलिस बल की तैनाती, अतिक्रमण हटाने और सड़क सुरक्षा से जुड़े मुद्दे उठाए जाते रहे हैं। सुनवाई में पूर्व में जारी निर्देशों पर हुई कार्रवाई की जानकारी का मुद्दा उठा। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि केवल योजनाओं और आश्वासनों के बजाय सुधार जमीन पर दिखाई देना चाहिए।

समन्वय अधिकारी नियुक्त करने का प्रस्ताव

राजलक्ष्मी फाउंडेशन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी को यातायात सुधार और हाईकोर्ट के आदेशों के पालन के लिए एकल समन्वय एवं पर्यवेक्षण अधिकारी बनाने का प्रस्ताव रखा गया। सुझाव दिया गया कि संबंधित विभाग रोजाना प्रगति रिपोर्ट दें, जिसमें पूरे हुए काम, लंबित कार्य, बाधाएं और उनके समाधान की समयसीमा दर्ज हो।

याचिकाकर्ता की ओर से 21 दिन का समय देने का सुझाव भी रखा गया, ताकि संबंधित विभागों से समन्वय कर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा सके और उसे अदालत के सामने पेश किया जाए।