July 23, 2026

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन ने जींद-सोनीपत रूट पर पांच दिन में 900 किमी का किया सफल सफर

July 24, 2026

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन ने जींद-सोनीपत रूट पर पांच दिन में 900 किमी का किया सफल सफर

नई दिल्ली : भारत की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित यात्री ट्रेन ने जींद-सोनीपत रेलखंड पर अपने शुरुआती संचालन में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। 17 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटन के बाद ट्रेन ने वाणिज्यिक सेवा के पहले पांच दिनों में लगभग 900 किलोमीटर की दूरी बिना किसी तकनीकी बाधा के पूरी की। इसके साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जिन्होंने हाइड्रोजन आधारित रेल तकनीक का सफल संचालन शुरू कर दिया है।

यह 10-कोच वाली अत्याधुनिक ट्रेन पारंपरिक डीजल इंजन की जगह दो 1,200 किलोवाट क्षमता वाली हाइड्रोजन-इलेक्ट्रिक प्रणोदन प्रणाली से संचालित होती है। ट्रेन में लगे फ्यूल सेल हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली उत्पन्न करते हैं, जिससे ट्रेन को ऊर्जा मिलती है। इस प्रक्रिया का एकमात्र उप-उत्पाद जलवाष्प और गर्मी है, इसलिए यह ट्रेन शून्य-उत्सर्जन (जीरो एमिशन) तकनीक पर आधारित है और पर्यावरण के लिए बेहद अनुकूल मानी जा रही है।

रेलवे के अनुसार, हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन से डीजल की खपत और कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आएगी। साथ ही महंगे जीवाश्म ईंधन के आयात पर निर्भरता भी घटेगी, जिससे देश के हरित परिवहन लक्ष्यों को मजबूती मिलेगी। यह परियोजना भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यात्रियों के लिए राहत की बात यह है कि आधुनिक तकनीक के बावजूद ट्रेन का किराया सामान्य डीजल मल्टीपल यूनिट (डीएमयू) ट्रेनों के बराबर रखा गया है।

यात्रियों को ₹10 से ₹25 के बीच टिकट उपलब्ध हो रहे हैं, जिससे स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन आम लोगों की पहुंच में बना हुआ है। ट्रेन के सुचारु संचालन के लिए जींद में स्वदेशी तकनीक से विकसित समर्पित हाइड्रोजन भंडारण एवं रीफ्यूलिंग सुविधा स्थापित की गई है। इससे ट्रेन के नियमित परिचालन और रखरखाव को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने में मदद मिल रही है। भारतीय रेलवे का मानना है कि जींद-सोनीपत मार्ग पर हाइड्रोजन ट्रेन की सफल शुरुआत भविष्य में देश के अन्य रेल मार्गों पर भी स्वच्छ ऊर्जा आधारित ट्रेनों के विस्तार का मार्ग प्रशस्त करेगी। यह परियोजना भारत को हरित, आधुनिक और आत्मनिर्भर परिवहन व्यवस्था की दिशा में नई पहचान दिलाने वाली पहल के रूप में देखी जा रही है।