September 21, 2026

हर बूथ पर 90 वोट बढ़ाने का टारगेट, अखिलेश का यूपी की 2 तिहाई सीट जीतने का क्या है प्लान?

हर बूथ पर 90 वोट बढ़ाने का टारगेट, अखिलेश का यूपी की 2 तिहाई सीट जीतने का क्या है प्लान?

वोट बढ़ाने का अखिलेश फॉर्मूलाImage Credit source: getty image

UP Election 2027 Strategy: उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से काफी पहले ही बूथ और वोटों का हिसाब शुरू हो गया है. सारी पार्टियां अभी से ही चुनाव की तैयारियों में लग गई है. इसी बीच समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने नई रणनीति बनाई है. हाल ही में अखिलेश यादव ने कार्यकर्ताओं के सामने हर बूथ पर 90 वोट बढ़ाने की बात कही है, एक विधानसभा में कुल 3000 बूथ होते हैं यानी हर सीट पर 27000 वोट बढ़ाने का लक्ष्य रखा है.

यह सिर्फ एक संख्या का खेल नहीं है, बल्कि 2027 के लिए सपा के संगठन को बूथ तक सक्रिय करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा को 111 सीटों पर जीत मिली थी, जबकि बीजेपी ने 255 सीटें जीती थीं. अब सपा के सामने एक तरफ अपनी जीती हुई सीटों को बचाने और दूसरी तरफ उन सीटों पर सेंध लगाने की चुनौती है, जहां पिछली बार हार का अंतर बहुत ज्यादा नहीं था.

क्या था 2022 की सीटों का आंकड़ा?

2022 के विधानसभा चुनाव में सपा की हार की बात करें, तो पार्टी को 144 सीटों पर हार की सामना 27 हजार से कम वोटों की वजह से मिली थी. वहीं 110 सीटें ऐसी थी, जहां पर 27 हजार से ज्यादा वोटों से पार्टी हारी थी. 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन को यूपी की 403 विधानसभा सीटों में से 224 पर बढ़त मिली थी. हालांकि, ये लोकसभा चुनाव के आंकड़े हैं और इन्हें सीधे 2027 विधानसभा चुनाव का नतीजा नहीं माना जा सकता.

Akhilesh Yadav Vote Formula

2022 का प्रदर्शन

क्या है अखिलेश यादव का फॉर्मूला?

  • हर विधानसभा में 27 हजार अतिरिक्त वोट जुटाने का लक्ष्य.
  • करीब 3 हजार बूथ मानें तो औसतन हर बूथ से 90 वोट बढ़ाने की जरूरत.
  • 2022 में सपा ने 111 विधानसभा सीटें जीती थीं.
  • 2024 लोकसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन को 224 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त मिली थी.

2022 का चुनाव सपा के लिए क्यों अहम?

सपा ने 2022 में 111 सीटें जीती थीं. बीजेपी 255 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी थी. अब सपा की रणनीति को समझने के लिए सिर्फ जीती हुई सीटों को देखना काफी नहीं है. पार्टी उन सीटों पर भी नजर रख रही है जहां पिछले चुनाव में वह जीत के करीब थी. आंकड़ों के मुताबिक, 144 ऐसी सीटें थीं जहां सपा 27 हजार से कम वोटों के अंतर से हारी थी. पार्टी का गणित यह है कि अगर कुछ सीटों पर हार का अंतर 27 हजार से कम था और वहां पार्टी अपने वोट में 27 हजार की बढ़ोतरी कर लेती है, तो ऐसी सीटों पर मुकाबले का समीकरण बदल सकता है.

बूथ स्तर पर क्यों है पूरा फोकस?

अखिलेश यादव के 27 हजार वाले लक्ष्य का एक बड़ा हिस्सा संगठन को बूथ तक सक्रिय करने से जुड़ा है. चुनाव में सिर्फ बड़े नेताओं की रैलियां और भाषण ही नहीं, बल्कि बूथ स्तर पर मतदाताओं तक पहुंचना भी महत्वपूर्ण होता है. हाल की रिपोर्टों के मुताबिक, सपा गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलित मतदाताओं के बीच अपना आधार बढ़ाने पर भी जोर दे रही है. यानी पार्टी की रणनीति पारंपरिक समर्थकों को बनाए रखने के साथ नए सामाजिक समूहों तक पहुंच बढ़ाने की भी है.

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बूथ के गणित की होगी रणनीति

दूसरी तरफ बीजेपी भी बूथ स्तर पर अपनी तैयारी मजबूत कर रही है. रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी करीब 18,900 ऐसे बूथों पर विशेष ध्यान दे रही है, जहां 2022 के विधानसभा चुनाव में वह जीती थी लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में उसके उम्मीदवार पीछे रहे. इससे साफ है कि 2027 की लड़ाई में बूथ का गणित दोनों प्रमुख दलों की तैयारियों का अहम हिस्सा बन रहा है.

Akhilesh Yadav

अखिलेश यादव की नई रणनीति

वोट बढ़ाने के लिए क्या-क्या पैंतरा?

  • अखिलेश यादव ने 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव के लिए सपा का वोट बढ़ाने का फॉर्मूला सामने रखा है. उन्होंने हर विधानसभा क्षेत्र में वोट बढ़ाने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए पार्टी कार्यकर्ताओं को उन परिवारों तक पहुंचने को कहा गया है, जिनके साथ उनके मुताबिक अन्याय या अत्याचार हुआ है. सपा ऐसे लोगों को पार्टी से जोड़ने की कोशिश करेगी.
  • अखिलेश ने इसके लिए टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल, घर-घर संपर्क और लोगों की समस्याएं सुनने पर जोर दिया है. पार्टी सिर्फ चुनाव के समय प्रचार करने के बजाय मतदाताओं के बीच लगातार पहुंच बनाने की कोशिश करेगी. कार्यकर्ता लोगों से उनकी परेशानियां समझेंगे और न्याय-सम्मान के मुद्दे पर उनसे बात करेंगे.
  • अखिलेश ने किसानों से जुड़े मुद्दों का भी जिक्र किया, जिसमें डीजल, पेट्रोल, खाद और कीटनाशक की बढ़ती लागत तथा फसलों की कीमत जैसे विषय शामिल हैं. इसके साथ ही सपा ने अपनी PDA रणनीति को भी आगे बढ़ाने का संकेत दिया है. पार्टी की 7वीं PDA ऑडिट रिपोर्ट भी बैठक में जारी की गई. इस तरह अखिलेश का फोकस संगठन, घर-घर संपर्क, टेक्नोलॉजी और अलग-अलग सामाजिक वर्गों तक पहुंच बढ़ाने पर है.

अंकिता पाण्डेय

अंकिता पाण्डेय

शिव की नगरी काशी से अपने करियर की शुरुआत करने वाली अंकिता पाण्डेय ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से पत्रकारिता में अपनी मास्टर्स की डिग्री पूरी की है.  पत्रकारिता में आने के लिए उन्होंने बनारस के लोकल न्यूज पेपर "काशीवार्ता" से अपनी शुरुआत की, बाद में दिल्ली जैसे महानगरी का रुख करते हुए उन्होंने TV9 भारतवर्ष में अक्टूबर साल 2023 से जुड़ी. आज वह इस ऑर्गनाइजेशन में बतौर सब-एडिटर काम कर रही हैं. क्राइम, एंटरटेनमेंट और अन्य सभी को न्यूज के साथ विजुअल तरीके से पेश करने में रुचि है. पत्रकारिता के अलावा कविताएं लिखना, फोटोग्राफी करना और म्यूजिक का भी शौक रखती हैं.

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