नेपाल में हाल ही में आई भीषण और विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है, जहां इस प्राकृतिक आपदा ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस भयंकर आपदा में अब तक 1200 से अधिक लोगों की जान जाने की दुखद खबरें सामने आ चुकी हैं, जिससे पूरा देश शोक और संकट के साये में जी रहा है। ऐसे तबाही और निराशा के माहौल के बीच नेपाल से एक ऐसी हैरान करने वाली और दिल को सुकून देने वाली खबर सामने आई है, जिसे किसी चमत्कार से कम नहीं आंका जा रहा है। बाढ़ आने के पूरे नौ दिन बीत जाने के बाद भी त्रिशूली नदी के पास स्थित एक हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की गहरी और खतरनाक सुरंग से दो मजदूरों को पूरी तरह जिंदा बाहर निकाल लिया गया है। इस अकल्पनीय रेस्क्यू ने एक तरफ जहां लापता लोगों के परिजनों में नई उम्मीद जगा दी है, वहीं दूसरी तरफ आपदा प्रबंधन टीमों के लिए भी यह एक ऐतिहासिक सफलता बन गया है। स्थानीय और प्रशासनिक अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, नेपाल भर में फैले करीब 12 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स से जुड़े लगभग 900 वर्कर्स इस भीषण आपदा के बाद से लापता बताए जा रहे हैं, और यह गंभीर आशंका जताई जा रही है कि इनमें से कम से कम 500 वर्कर पानी और मलबे से पटी इन विशाल सुरंगों के भीतर फंसे हो सकते हैं। ऐसे में त्रिशूली के इस प्रोजेक्ट से दो मजदूरों का सकुशल बाहर आना मौत के मुंह से जिंदगी को खींच लाने जैसा है, जिसके चर्चे आज न सिर्फ नेपाल बल्कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी हो रहे हैं।
बिना खाए-पिए और रोशनी के नौ दिन गुजारने वाले मजदूरों की पहचान, रसुवा में भोटेकोशी नदी का था तांडव
रसुवा जिले के अंतर्गत बहने वाली भोटेकोशी नदी में जब अचानक जलप्रलय आया और बाढ़ का पानी किनारों को तोड़ते हुए आगे बढ़ा, तो चारों तरफ हाहाकार मच गया था। इस भयानक सैलाब के बीच नेपाल सेना के जांबाज जवानों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए त्रिशूली-3 'ए' हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सिंचित सुरंग में फंसे मजदूरों की तलाश के लिए विशेष अभियान छेड़ा। लगातार एक हफ्ते से अधिक समय तक चले इस व्यापक रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान जब किसी के भी जीवित बचने की उम्मीदें लगभग समाप्त होने लगी थीं, तब बचाव दल को यह बड़ी सफलता हासिल हुई। अधिकारियों द्वारा दी गई आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, ये दोनों मजदूर सुरंग के मुख्य मुहाने से लगभग 170 मीटर की गहराई और दूरी पर फंसे हुए मिले थे। सुरंग से सुरक्षित बाहर निकाले गए इन दोनों साहसी मजदूरों की पहचान संजय साह और कबीर महर्जन के रूप में की गई है। घटना के तुरंत बाद सैन्य चिकित्सकों ने प्राथमिक जांच की और उन्हें बेहतर चिकित्सीय उपचार के लिए त्रिशूली स्थित नेपाल सेना की सुसज्जित बैरक में स्थानांतरित कर दिया। रेस्क्यू किए गए मजदूर कबीर महर्जन के भाई अमीर महर्जन ने प्रतिष्ठित समाचार एजेंसी एएफपी से बातचीत करते हुए अपनी भावनाओं को साझा करते हुए कहा कि वे बेहद खुश हैं और उनके सीने पर रखा कई टन का बोझ आखिरकार हल्का हो गया है। इसके अलावा कबीर महर्जन की पत्नी ने बीबीसी से हुई बातचीत में संतोष जताते हुए बताया कि जब उनके पति को सुरंग के अंधेरे गर्त से बाहर निकाला गया, तब वे पूरी तरह होश में थे और उन्हें तुरंत नेपाल की राजधानी काठमांडू स्थित प्रतिष्ठित छावनी मिलिट्री हॉस्पिटल ले जाने की मुकम्मल तैयारियां की जा रही थीं ताकि उनकी स्वास्थ्य निगरानी में कोई कोताही न बरती जा सके।
मौत की सुरंग में कैसे बची जान? 'एयर पॉकेट्स' के वैज्ञानिक चमत्कार ने बचाई संजय और कबीर की सांसे
विज्ञान और आपदा प्रबंधन के जानकारों के अनुसार, सुरंग के भीतर बिना खाए-पीए लगातार नौ दिनों तक इन मजदूरों के जिंदा बचे रहने के पीछे सबसे बड़ा वैज्ञानिक कारण 'एयर पॉकेट्स' यानी हवा की जेबों का बनना है। जब कभी भी विशाल भूमिगत हाइड्रोपावर सुरंगों या इंजीनियरिंग संरचनाओं का निर्माण किया जाता है, तो तकनीकी डिजाइन के तहत हवा के आवागमन और प्राकृतिक संचरण के लिए जगह-जगह कुछ खाली स्थान छोड़े जाते हैं, जिन्हें एयर पॉकेट्स कहा जाता है। बाढ़ का पानी जब अचानक सुरंग के भीतर दाखिल हुआ, तो इन विशेष स्थानों पर हवा का दबाव और ऑक्सीजन का एक सीमित भंडार कैद होकर रह गया, जिसकी बदौलत संजय साह और कबीर महर्जन जैसी जिंदगियों को सांस लेने के लिए प्राणवायु मिलती रही और वे मौत के इस चक्रव्यूह में भी टिके रहे। इस चमत्कारिक रेस्क्यू ऑपरेशन की सफलता के बाद नेपाल सेना और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल के हौसले काफी बुलंद हो गए हैं। बचाव दलों का अब यह मानना है कि यदि सुरंगों के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के प्राकृतिक एयर पॉकेट्स मौजूद होंगे, तो अंदर फंसे अन्य अभाग्य मजदूरों के भी जीवित मिलने की संभावनाओं से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता है। नेपाल की इस भीषण राष्ट्रीय आपदा के बीच यह रेस्क्यू ऑपरेशन देशवासियों के लिए एक उम्मीद की किरण बनकर उभरा है, और राहत टीमें अपनी जान जोखिम में डालकर अभी भी बाकी लापता लोगों की खोजबीन में पूरी मुस्तैदी से जुटी हुई हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा जिंदगियों को सुरक्षित बचाया जा सके।