8th Pay Commission latest news: भारत पेंशनर्स समाज ने 8वें वेतन आयोग के गठन की मांग करते हुए वित्त मंत्री को एक ज्ञापन सौंपा है। इसमें न्यूनतम पेंशन को 45,000 रुपये करने, साल में चार बार महंगाई भत्ता देने और फैमिली यूनिट की परिभाषा बदलने जैसी अहम मांगें शामिल हैं।
8th Pay Commission Pension: केंद्र सरकार के रिटायर्ड कर्मचारियों ने 8वें वेतन आयोग के गठन से पहले अपनी मांगों को लेकर आवाज तेज कर दी है। भारत पेंशनर्स समाज ने वित्त मंत्री को ज्ञापन सौंपकर जल्द से जल्द 8वें वेतन आयोग के गठन की मांग की है। संगठन ने पेंशनर्स की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए पेंशन, महंगाई राहत और फैमिली पेंशन से जुड़े कई बदलावों का प्रस्ताव रखा है।
न्यूनतम पेंशन ₹45,000 करने की मांग
पेंशनर्स समाज की सबसे बड़ी मांग न्यूनतम पेंशन को बढ़ाने को लेकर है। संगठन के मुताबिक वर्तमान में न्यूनतम पेंशन ₹9,000 प्रति माह है, जो मौजूदा महंगाई और रोजमर्रा के बढ़ते खर्चों को देखते हुए पर्याप्त नहीं है। इसलिए इसे बढ़ाकर ₹45,000 प्रति माह करने की मांग की गई है। संगठन का तर्क है कि न्यूनतम पेंशन किसी सरकारी कर्मचारी के न्यूनतम वेतन की कम से कम 50 फीसदी होनी चाहिए।
DA और DR में तिमाही संशोधन की मांग
पेंशनर्स ने महंगाई भत्ते यानी DA और महंगाई राहत यानी DR को लेकर भी महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। वर्तमान व्यवस्था में DA और DR में साल में दो बार संशोधन किया जाता है। संगठन का कहना है कि महंगाई तेजी से बदलती है, इसलिए पेंशनर्स को बढ़ती कीमतों से राहत देने के लिए DA और DR की समीक्षा हर तीन महीने में यानी साल में चार बार की जानी चाहिए।
फैमिली यूनिट का दायरा बढ़ाने का प्रस्ताव
ज्ञापन में फैमिली पेंशन से जुड़े नियमों में बदलाव की मांग भी की गई है। पेंशनर्स समाज चाहता है कि फैमिली यूनिट की परिभाषा को व्यापक बनाया जाए। इसमें केवल पति या पत्नी तक सीमित रहने के बजाय आश्रित माता-पिता, अविवाहित, विधवा या तलाकशुदा बेटियों और दिव्यांग बच्चों को भी शामिल करने का प्रस्ताव है। संगठन का कहना है कि ऐसे आश्रितों को उम्र या वैवाहिक स्थिति के आधार पर लाभ से बाहर नहीं किया जाना चाहिए।
रिटायर्ड कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा पर जोर
इन मांगों के पीछे मुख्य उद्देश्य रिटायर्ड कर्मचारियों और उनके परिवारों को बेहतर आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है। बढ़ती महंगाई के बीच पेंशनर्स का कहना है कि मौजूदा पेंशन और राहत व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है। खासकर उन बुजुर्गों के लिए पेंशन महत्वपूर्ण आय का साधन है, जिनकी नियमित कमाई का कोई दूसरा जरिया नहीं होता।
7वें वेतन आयोग के बाद अब 8वें पर नजर
7वें वेतन आयोग की सिफारिशें वर्ष 2016 में लागू हुई थीं। आम तौर पर वेतन आयोग की सिफारिशों को करीब 10 साल के अंतराल पर लागू किए जाने की परंपरा रही है। ऐसे में 8वें वेतन आयोग को लेकर कर्मचारियों और पेंशनर्स की उम्मीदें बढ़ी हुई हैं। अब देखना होगा कि सरकार पेंशनर्स समाज की इन मांगों पर क्या फैसला लेती है और 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है।