Updated On: Aug 07, 2026 | 10:50 AM IST
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सार
Human Trafficking: भाई की डांट से नाराज होकर घर से निकली मुजफ्फरपुर की 12वीं की छात्रा मानव तस्करों के जाल में फंस गई। 87 दिनों के नर्क के बाद पुलिस की SIT ने 52 मिनट के ऑपरेशन में उसे सुरक्षित बचाया।

पुलिस ने लड़की को बचा लिया। (सोर्स-सोशल मीडिया)
विस्तार
SIT Rescue Operation Bihar Girl Human Trafficking: कभी-कभी गुस्से में की एक छोटी सी गलती जिंदगी को ऐसे मोड़ पर खड़ा कर देती है जिसकी कल्पना भी डरावनी होती है। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक ऐसा ही मामला सामने आया है जहां भाई की डांट से नाराज होकर घर से निकली 12वीं की एक छात्रा मानव तस्करों के खूंखार जाल में फंस गई। अगले 87 दिनों तक उसे जो नर्क झेलना पड़ा, वह किसी भी संवेदनशील इंसान की रूह कंपा देने के लिए काफी है।
भाई की डांट और वो काली रात
घटना की शुरुआत 10 मई की रात को हुई थी जब गायघाट थाना क्षेत्र की रहने वाली छात्रा का अपने भाई से किसी बात पर विवाद हो गया। भाई की डांट से आहत होकर वह गुस्से में घर छोड़कर निकल गई और मुजफ्फरपुर जंक्शन पहुंच गई। स्टेशन पर अकेली बैठी रो रही छात्रा पर एक शातिर तस्कर की नजर पड़ी। उसने बड़ी ही सहानुभूति के साथ छात्रा से बात की और उसे कोलकाता में एक अच्छी नौकरी दिलाने का झांसा दिया। मासूम छात्रा उस ‘हमदर्द’ के पीछे छिपे भेड़िये को पहचान नहीं पाई और उसके साथ चल दी।
कोलकाता में सौदा और नशीली दवाओं का खेल
छात्रा ने पुलिस को अपनी जो आपबीती सुनाई वह दिल दहला देने वाली है। कोलकाता पहुंचते ही उसे बेच दिया गया। वहां उसे बंधक बनाकर रखा गया और विरोध करने पर उसे नशीली और बेहोशी की दवाएं दी जाती थीं। तस्करों ने न केवल उसका यौन शोषण किया, बल्कि उसे मानसिक और शारीरिक रूप से बुरी तरह प्रताड़ित भी किया। उसे कई-कई दिनों तक भूखा रखा जाता था। करीब एक महीने बाद, जब तस्करों का मन भर गया, तो उन्होंने उसे भागलपुर के एक रेड लाइट एरिया में दोबारा बेच दिया।
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SIT का गठन और एक ‘तस्वीर’ से मिला सुराग
इधर, 12 मई को छात्रा के भाई ने गायघाट थाने में अपहरण की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने एक विशेष जांच दल (SIT) और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) का गठन किया। पुलिस लगातार तकनीकी और मानवीय इनपुट के जरिए छात्रा की तलाश कर रही थी। इसी बीच पुलिस के हाथ एक ‘तस्वीर’ लगी जिसने इस पूरे केस का रुख मोड़ दिया। इस खुफिया जानकारी के आधार पर पुलिस की टीम भागलपुर जिले के इशीपुर बरहट थाना क्षेत्र के सिवानपुर गांव पहुंची।
52 मिनट का रेस्क्यू ऑपरेशन
पुलिस की टीम ने सीधे धावा बोलने के बजाय पहले 35 मिनट तक इलाके की रेकी की ताकि तस्करों को भागने का मौका न मिले। जैसे ही पुलिस ने ऑपरेशन शुरू किया, तस्करों में हड़कंप मच गया। करीब 52 मिनट तक चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे और घेराबंदी के बाद पुलिस ने छात्रा को सुरक्षित मुक्त करा लिया। इस दौरान पुलिस ने न केवल मुजफ्फरपुर की इस छात्रा को बचाया, बल्कि वहां से नालंदा जिले की एक अन्य अपहृत किशोरी को भी तस्करों के चंगुल से छुड़ाया।
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बड़े तस्करी नेटवर्क का खुलासा
एसडीपीओ पूर्वी अलय वत्स के अनुसार, यह किसी छोटे-मोटे गिरोह का काम नहीं, बल्कि एक संगठित अंतरराज्यीय मानव तस्करी नेटवर्क है। पुलिस अब उन कड़ियों को जोड़ रही है जो बिहार से लेकर कोलकाता तक फैली हुई हैं। फिलहाल बचाई गई दोनों लड़कियों को संरक्षण में रखकर उनकी काउंसलिंग की जा रही है। पुलिस का दावा है कि इस गिरोह के मास्टरमाइंड और अन्य सदस्यों को जल्द ही सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
यह घटना एक बड़ा सबक है कि सोशल मीडिया या अनजान जगहों पर मिलने वाली अनजान सहानुभूति अक्सर एक बड़ा खतरा साबित हो सकती है।
