July 12, 2026

मोशी कचरा डंप हादसा: खत्म हुआ 83 घंटे का महा-रेस्क्यू ऑपरेशन, मरने वालों की संख्या हुई 9, मलबे से आखिरी शव बरामद

Pune News: महाराष्ट्र के पुणे से सटे पिंपरी चिंचवाड़ इलाके के मोशी कचरा डिपो में पिछले चार दिनों से चल रहा महा-रेस्क्यू ऑपरेशन रविवार तड़के समाप्त हो गया. करीब 83 घंटे तक चले इस बेहद चुनौतीपूर्ण और खतरनाक खोजी अभियान के आखिरी चरण में रविवार रात लगभग 1 बजे अंतिम लापता कर्मचारी का शव बरामद किया गया. इसके साथ ही इस भीषण हादसे में जान गंवाने वाले लोगों की कुल संख्या बढ़कर 9 हो गई है.

प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, रविवार तड़के मलबे से निकाले गए आखिरी मृतक कर्मचारी की पहचान वामन कस्बे के रूप में हुई है. मलबे से शव बाहर निकालने के बाद उसे तुरंत पिंपरी के यशवंतराव चव्हाण मेमोरियल अस्पताल (YCMH) पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया. पीसीएमसी (PCMC) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आखिरी लापता कर्मचारी का शव मिलने के साथ ही सर्च ऑपरेशन पूरा हो गया है. मलबे में दबे या फंसे हुए सभी 23 लोगों का पता लगा लिया गया है.

कैंटीन में लंच कर रहे थे कर्मचारी, अचानक भरभराकर ढही इमारत

यह दिल दहला देने वाला हादसा बुधवार दोपहर करीब 1.30 बजे हुआ था, जब मोशी कचरा डिपो परिसर में स्थित वेस्ट-टू-एनर्जी (WTE) प्लांट के प्रशासनिक कार्यालय की तीन मंजिला इमारत (ग्राउंड प्लस टू) पर अचानक कचरे का एक विशाल पहाड़ फिसलकर गिर गया. जिस वक्त यह हादसा हुआ, उस समय अधिकांश कर्मचारी इमारत की पहली मंजिल पर स्थित कैंटीन में दोपहर का खाना (लंच) खा रहे थे.

जैसे ही कचरे के दबाव से इमारत ढहने लगी, 5 कर्मचारी किसी तरह वहां से भागने में सफल रहे. मलबे में कुल 23 लोग दब गए थे, जिनमें से दमकल और एनडीआरएफ की टीमों ने 14 लोगों को कड़ी मशक्कत के बाद जिंदा बाहर निकाल लिया, जबकि 9 लोगों को नहीं बचाया जा सका.

सेना और एनडीआरएफ ने संभाला मोर्चा, गैसों के रिसाव के बीच रेस्क्यू

इस बड़े पैमाने पर चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन में भारतीय सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), पीएमआरडीए (PMRDA) फायर ब्रिगेड, स्थानीय पुलिस और पीसीएमसी की आपदा प्रबंधन टीमों ने मिलकर काम किया. मलबे को हटाने के लिए जेसीबी, उत्खनन (Excavators) और उन्नत डिमोलिशन मशीनों को काम पर लगाया गया था. आंशिक रूप से ढही इमारत के अस्थिर ढांचे और कचरे के विशाल मलबे के कारण बचाव कार्य बेहद धीमा और खतरनाक था. टीम को कचरे से निकलने वाली मीथेन जैसी जहरीली गैसों और मलबे के दोबारा धंसने के खतरे के बीच काम करना पड़ा.

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तीन दिन में 650 mm बारिश बनी तबाही की वजह, उठ रहे गंभीर सवाल

प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, लगातार तीन दिनों तक हुई 650 मिलीमीटर (mm) से अधिक की मूसलाधार बारिश इस तबाही की मुख्य वजह बनी. भारी बारिश के कारण पानी कचरे के पहाड़ के भीतर रिस गया, जिससे मलबे के अंदर मीथेन और अन्य गैसों का दबाव बढ़ गया और कचरे का एक बहुत बड़ा हिस्सा फिसलकर सीधे प्रशासनिक भवन पर आ गिरा.

प्रबंधन पर खड़े हुए सवाल

इस हादसे ने 81 एकड़ में फैले मोशी कचरा डिपो के कचरा प्रबंधन, कचरे के ढेरों की स्थिरता और इस खतरनाक जगह के इतने करीब प्रशासनिक भवन के निर्माण की अनुमति देने में हुई कथित अनियमितताओं पर गंभीर कानूनी और प्रशासनिक सवाल खड़े कर दिए हैं. हालांकि नागरिक प्रशासन ने इसे एक प्राकृतिक आपदा करार दिया है, लेकिन मामले की जिम्मेदारी तय करने और यह जांचने के लिए एक उच्च स्तरीय विस्तृत जांच के आदेश दिए गए हैं कि क्या इस त्रासदी को रोका जा सकता था.

तन्वी गुप्ता

तन्वी गुप्ता

तन्वी गुप्ता मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला की रहने वाली हैं. स्कूल-कॉलेज धर्मशाला से करने के बाद शिमला में हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी से MMC की पढ़ाई की. मीडिया में 12 साल से ज्यादा का अनुभव है. चंडीगढ़, हैदराबाद में नौकरी करने के बाद फिलहाल दिल्ली में जॉब कर रही हैं. प्रिंट, टेलीविजन के बाद 2017 से डिजिटल मीडिया के लिए काम कर रही हैं. इससे पहले आजतक, न्यूज18, द ट्रिब्यून, ईटीवी भारत और इंडिया न्यूज सहित कुछ अन्य मीडिया संस्थानों में काम कर चुकी हैं. क्राइम, इतिहास और साइंस एक्सपेरिमेंट्स की खबरों में खास रूचि है. फिलहाल टीवी9 डिजिटल में बतौर असिस्टेंट न्यूज एडिटर काम संभाल रही हैं. नौकरी के अलावा खेल-कूद और घूमने फिरने में भी काफी दिलचस्पी है. नेशनल लेवल पर वॉलीबॉल और बैडमिंटन खेल चुकी हैं. साथ ही खो-खो खेल में भी स्टेट लेवल तक खेल चुकी हैं. इसके अलावा एनसीसी 'C' सर्टिफिकेट प्राप्त है. गाना सुनना तो पसंद है ही. लेकिन सिंगिंग का भी शौक रखती हैं. स्कूल और कॉलेज लेवल पर सिंगिंग में भी काफी पुरस्कार मिल चुके हैं.

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