July 11, 2026

यह लगातार प्रताड़ना का मामला…महिला के ऑनलाइन उत्पीड़न पर कोर्ट ने आरोपी को जमानत देने से किया इनकार| Navbharat Live

यह लगातार प्रताड़ना का मामला…महिला के ऑनलाइन उत्पीड़न पर कोर्ट ने आरोपी को जमानत देने से किया इनकार

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सार

Online Harassment Case: मुंबई की सत्र अदालत ने महिला का ऑनलाइन उत्पीड़न करने वाले 43 वर्षीय आरोपी जयकुमार बिदीचंदानी की जमानत याचिका खारिज की। कोर्ट ने कहा- यह लगातार प्रताड़ना का मामला है।

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अदालत के आदेश की सांकेतिक फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया)

विस्तार

Mumbai Court Rejects Bail: मुंबई की एक सत्र अदालत ने ऑनलाइन उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार 43 वर्षीय व्यक्ति की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि यह एक बार की घटना नहीं, बल्कि लंबे समय से एक ही पीड़िता को निशाना बनाया जा रहा है।
अपने आदेश में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पी. ए. साबले ने कहा कि अगर आरोपी जयकुमार किशोर बिदीचंदानी को जमानत पर छोड़ा गया तो शिकायतकर्ता को आगे भी उत्पीड़न, धमकी या मानसिक आघात का सामना करना पड़ सकता है।

क्या हैं आरोप

माहिम पुलिस के अनुसार बिदीचंदानी पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत केस दर्ज है। अभियोजन ने बताया कि 13 मार्च से 10 अप्रैल 2026 के बीच आरोपी ने शिकायतकर्ता 29 वर्षीय महिला के ईमेल पते का इस्तेमाल कर उसे एक अश्लील वेबसाइट पर रजिस्टर कर दिया। इसके बाद उसे पोर्नोग्राफी से संबंधित अश्लील ईमेल मिलने लगे। इसी दौरान अलग-अलग लोगों के नाम से बनाए गए फेसबुक प्रोफाइल से महिला और उसकी रिश्तदार के खिलाफ अश्लील टिप्पणियां भी पोस्ट की गईं। पीड़िता ने कहा कि इन घटनाओं से उसे गंभीर मानसिक तनाव हुआ और उसकी सेहत भी प्रभावित हुई, जिसके बाद उसने माहिम पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

पहले भी दर्ज हैं 3 केस

अभियोजन के मुताबिक यह शिकायतकर्ता द्वारा बिदीचंदानी के खिलाफ दर्ज कराया गया चौथा मामला है। आरोप है कि पहले के आपराधिक मामलों के बावजूद आरोपी ने फर्जी ऑनलाइन आईडी, अश्लील संदेश और पोर्न साइटों पर रजिस्ट्रेशन के जरिए महिला को निशाना बनाना जारी रखा। जबकि जमानत मांगते हुए बचाव पक्ष ने कहा कि आरोपी को फंसाया गया है। उसका मोबाइल, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पहले ही जब्त किए जा चुके हैं, इसलिए हिरासत में पूछताछ की जरूरत नहीं है। अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलें खारिज करते हुए कहा कि सिर्फ बरामदगी पूरी होना जमानत का आधार नहीं हो सकता।

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पीड़िता के वकील की दलील

पीड़िता की ओर से एडवोकेट जोशुआ अभय पटनिगेरे ने कहा कि यह मामले अलग-अलग नहीं, बल्कि एक ही पीड़िता के खिलाफ लगातार उत्पीड़न का मामला है। उन्होंने कहा कि जमानत देने से पहले पीड़िता के सम्मान, सुरक्षा और बिना डर के जीने के अधिकार को ध्यान में रखा जाए। उन्होंने दलील दी कि पहले भी जब आरोपी को छूट मिली थी, तो उसने फिर से पीड़िता से संपर्क कर इसी तरह का व्यवहार शुरू कर दिया था।

क्या कहा अदालत ने

आरोपों की प्रकृति, जांच में एकत्र सामग्री, एक ही शिकायतकर्ता से जुड़े बार-बार के आरोप और पीड़िता की सुरक्षा को देखते हुए अदालत ने कहा कि यह मामला जमानत का नहीं है। इसके साथ ही जमानत याचिका खारिज कर दी गई।

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