आनंद के पिता ट्रैक्टर चलाकर परिवार का खर्च चलाते थे. आर्थिक परेशानियों के बीच आनंद को स्कूल जाने के लिए रोजाना करीब 6 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था. सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और आगे बढ़ने का सपना देखा. आनंद की पढ़ाई का शुरुआती दौर काफी मुश्किल रहा.
इंजीनियरिंग कॉलेज के पहले सेमेस्टर में वह हर विषय में फेल हो गए. इस असफलता के बाद उन्होंने अपनी कमियों को समझने और अपनी दिशा बदलने पर ध्यान दिया. धीरे-धीरे उनकी रुचि एयरोस्पेस और रॉकेट टेक्नोलॉजी में बढ़ने लगी. उन्होंने इस क्षेत्र में काम करना शुरू किया और आगे चलकर स्पेस जोन इंडिया की स्थापना की. कंपनी के जरिए वह रॉकेट और अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में काम करने लगे.
पढ़ाई के लिए भी करनी होती थी मेहनत
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यह कहानी हममें से कई लोगों ने अपने घर के बुजुर्गों से सुनी है. वे अक्सर बताते हैं कि उनके स्कूल और कॉलेज के दिनों में पढ़ाई करना कितना मुश्किल हुआ करता था. कई बच्चों को मीलों पैदल चलना पड़ता था, नदियां पार करनी पड़ती थीं और कई बार नंगे पैर भी स्कूल जाना पड़ता था. कुछ ऐसी ही मुश्किल परिस्थितियों का सामना भारत के एयरोस्पेस उद्यमी आनंद मेगालिंगम ने भी अपने शुरुआती जीवन में किया. तमिलनाडु में पले-बढ़े आनंद को स्कूल जाने के लिए हर दिन करीब 6 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था. इन मुश्किलों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी.
कॉलेज और भी ज्यादा मुश्किल
स्कूल में कई मुश्किलों सामना करना पड़ा लेकिन आनंद के लिए कॉलेज जाना उससे भी ज्यादा कठिन हो गया. ऐसा इसलिए क्योंकि पहले सेमेस्टर में आनंद हर विषय में फेल हो गए. हालांकि, खेल के प्रति उनके प्यार ने उन्हें दोबारा मौका दिया. उनके इस जूनून ने उन्हें एक प्राइवेट कॉलेज में एडमिशन दिलाने में मदद की.
जहां उन्होंने वैमानिकी अभियांत्रिकी (Aeronautical Engineering) की पढ़ाई की. यही विषय आगे चलकर उनके जीवन की दिशा बदलने वाला साबित हुआ. कॉलेज के दौरान उन्होंने कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और पुरस्कार भी जीते. इसी दौरान उनके मन में यह विश्वास मजबूत हुआ कि अंतरिक्ष का क्षेत्र ही उनके लिए सही है. अपने इसी सपने और विश्वास के साथ आनंद मेगालिंगम ने दिसंबर 2021 में स्पेस जोन इंडिया की स्थापना की.
RHUMI-1 से मिली बड़ी पहचान
आनंद मेगलिंगम की कंपनी स्पेस जोन इंडिया ने RHUMI-1 मिशन के जरिए बड़ी उपलब्धि हासिल की. RHUMI-1 को हाइब्रिड रॉकेट तकनीक पर आधारित मिशन के तौर पर विकसित किया गया था. इसे 24 अगस्त 2024 को तमिलनाडु में चेन्नई के पास ईस्ट कोस्ट रोड से लॉन्च किया गया था. इस मिशन का उद्देश्य कम लागत वाली और दोबारा इस्तेमाल की जा सकने वाली रॉकेट तकनीक को बढ़ावा देना था. इस उपलब्धि ने आनंद और उनकी कंपनी को देश के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में पहचान दिलाई.
आज करोड़ों की कंपनी खड़ी कर चुके हैं
जिस परिवार के लिए कभी आर्थिक स्थिति बड़ी चुनौती थी, उसी परिवार से आने वाले आनंद ने आज एक बड़ी स्पेस-टेक कंपनी खड़ी कर दी है. विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक, स्पेस जोन इंडिया का मूल्यांकन करीब 800 करोड़ रुपये बताया गया है. आनंद की कहानी यह बताती है कि कॉलेज में मिली असफलता किसी व्यक्ति के पूरे करियर का फैसला नहीं करती. अगर व्यक्ति अपनी गलतियों से सीखकर सही दिशा में मेहनत करता रहे, तो मुश्किल हालात के बावजूद बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है.
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