Aug 04, 2026 11:14 am ISTलाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
मुख्य बातें
- 8वें वेतन आयोग के सामने रेलवे सीनियर सिटीजंस वेलफेयर सोसाइटी (RSCWS) ने पेंशन और वेतन व्यवस्था से जुड़ी 8 प्रमुख मांगें रखी हैं
- आयोग फिलहाल विभिन्न संगठनों से सुझाव ले रहा है और अंतिम सिफारिशें 2027 में सरकार को सौंपे जाने की संभावना है
- आइए इसकी डिटेल्स जानते हैं

8वें वेतन आयोग में रेलवे पेंशनर्स की मांगों ने बढ़ाई हलचल।
केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए गठित 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को बने अब करीब 9 महीने हो चुके हैं। इस दौरान आयोग ने दिल्ली, ओडिशा और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में विभिन्न कर्मचारी संगठनों और पेंशनर्स के प्रतिनिधियों से चर्चा की है। आने वाले दिनों में नई दिल्ली में तीन दिवसीय बैठक आयोजित की जाएगी, जिसके बाद सितंबर में चेन्नई, पुडुचेरी और चंडीगढ़ में भी विचार-विमर्श होगा। इसी बीच रेलवे सीनियर सिटीजंस वेलफेयर सोसाइटी (RSCWS) ने आयोग को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है, जिसमें पेंशन और वेतन व्यवस्था से जुड़ी 8 प्रमुख मांगें रखी गई हैं। इन मांगों का उद्देश्य रिटायर कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा बढ़ाना और भविष्य की पेंशन व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाना है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।
RSCWS का कहना है कि मौजूदा वेतन संरचना में भत्तों (Allowances) का हिस्सा काफी अधिक है, जबकि पेंशन का निर्धारण मुख्य रूप से बेसिक पे (Basic Pay) के आधार पर किया जाता है। चूंकि अधिकांश भत्ते पेंशन में शामिल नहीं होते, इसलिए रिटायरमेंट के बाद कर्मचारियों की आय में अचानक बड़ी गिरावट आ जाती है। इसी वजह से संगठन ने मांग की है कि 8वें वेतन आयोग में बेसिक वेतन का हिस्सा बढ़ाया जाए और वेतन संरचना में बेसिक पे और भत्तों के बीच बेहतर संतुलन बनाया जाए, ताकि सेवानिवृत्ति के बाद भी कर्मचारियों की आय सुरक्षित रह सके।
सोसाइटी ने यह भी कहा है कि रिटायरमेंट के बाद हाउस रेंट अलाउंस (HRA), ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA) और कई अन्य भत्ते बंद हो जाते हैं, लेकिन घर का किराया, इलाज, यात्रा और रोजमर्रा के खर्च लगातार बढ़ते रहते हैं। ऐसे में कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो जाती है। इसलिए आयोग से अनुरोध किया गया है कि वेतन संरचना तैयार करते समय इन वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखा जाए, ताकि पेंशनर्स को वित्तीय कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
भत्तों की दोबारा समीक्षा करे 8वां वेतन आयोग
ज्ञापन में उन कर्मचारियों का मुद्दा भी उठाया गया है, जो दुर्गम क्षेत्रों, जोखिमपूर्ण स्थानों या खास तकनीकी जिम्मेदारियों वाले पदों पर काम करते हैं। RSCWS का कहना है कि 7वें वेतन आयोग के दौरान कई भत्तों का विलय या समाप्ति कर दी गई थी, जिससे ऐसे कर्मचारियों में असंतोष पैदा हुआ। संगठन ने मांग की है कि 8वां वेतन आयोग इन भत्तों की दोबारा समीक्षा करे और कठिन परिस्थितियों में काम करने वाले कर्मचारियों को उचित आर्थिक लाभ दिया जाए।
अन्य अलाउंस के समीक्षा की भी मांग
इसके अलावा RSCWS ने HRA और ट्रांसपोर्ट अलाउंस की नियमित समीक्षा की भी मांग की है। संगठन का कहना है कि महंगाई, बढ़ते मकान किराए और परिवहन खर्च को देखते हुए इन भत्तों को समय-समय पर संशोधित किया जाना चाहिए। साथ ही इन्हें महंगाई (Inflation) या किसी उपयुक्त इंडेक्स से जोड़ने का सुझाव दिया गया है, ताकि अगले वेतन आयोग तक इनकी वास्तविक क्रय शक्ति बनी रहे।
रेलवे सीनियर सिटीजंस वेलफेयर सोसाइटी (RSCWS) की 8 प्रमुख मांगें
| RSCWS द्वारा उठाया गया मुद्दा | 8वें वेतन आयोग से मांग | RSCWS का तर्क |
|---|---|---|
| कम पेंशन आधार (Lower Pension Base) | बेसिक वेतन का हिस्सा बढ़ाया जाए | पेंशन मुख्य रूप से बेसिक पे पर आधारित होती है, जबकि अधिकांश भत्ते इसमें शामिल नहीं होते। |
| भत्तों पर अधिक निर्भर वेतन संरचना | बेसिक वेतन और भत्तों के बीच संतुलन बनाया जाए | इससे सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभ बेहतर और सुरक्षित होंगे। |
| रिटायरमेंट के बाद आय में कमी | कुल वेतन संरचना को मजबूत किया जाए | रिटायरमेंट के बाद भी आवास, परिवहन और स्वास्थ्य जैसे खर्च जारी रहते हैं। |
| बढ़ती हाउसिंग लागत | HRA (हाउस रेंट अलाउंस) की समय-समय पर समीक्षा हो | मौजूदा HRA दरें वास्तविक खर्चों के अनुरूप नहीं हैं। |
| यात्रा खर्च में बढ़ोतरी | ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA) की समीक्षा की जाए | कर्मचारियों को बढ़ती यात्रा लागत के अनुसार उचित मुआवजा मिलना चाहिए। |
| कठिन और चुनौतीपूर्ण पोस्टिंग | कठिन क्षेत्रों से जुड़े भत्तों में बढ़ोतरी की जाए | ऐसे स्थानों पर कार्यरत कर्मचारियों को अतिरिक्त खर्च और कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। |
| विशेष और जोखिमपूर्ण जिम्मेदारियां | संबंधित विशेष भत्तों की समीक्षा की जाए | जोखिमपूर्ण और विशेषज्ञ कार्यों के लिए उचित आर्थिक लाभ मिलना चाहिए। |
| भत्तों की क्रय शक्ति में गिरावट | भत्तों में संशोधन को महंगाई (Inflation) से जोड़ा जाए | इससे कर्मचारियों की क्रय शक्ति बनी रहेगी और महंगाई का असर कम होगा। |
RSCWS का मानना है कि 8वें वेतन आयोग की वेतन और भत्ता व्यवस्था सरल, पारदर्शी और आवश्यकता आधारित होनी चाहिए। इससे न केवल वर्तमान कर्मचारियों को लाभ मिलेगा, बल्कि लाखों पेंशनर्स की आर्थिक सुरक्षा भी मजबूत होगी। संगठन ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसकी सभी मांगों का उद्देश्य कर्मचारियों और पेंशनर्स दोनों के हितों के बीच संतुलन बनाना है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि RSCWS की ये केवल सिफारिशें हैं। 8वां वेतन आयोग अभी विभिन्न संगठनों से सुझाव ले रहा है और अंतिम फैसला केंद्र सरकार ही करेगी। मौजूदा जानकारी के अनुसार आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट मई-जून 2027 तक सरकार को सौंप सकता है। इसके बाद सरकार जिन सिफारिशों को मंजूरी देगी, वही देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स पर लागू होंगी। ऐसे में सभी की नजर अब 8वें वेतन आयोग की आगामी बैठकों और अंतिम सिफारिशों पर टिकी हुई है।
