लेबनान: 8.6 लाख विस्थापित घर लौटे, मगर मानवीय संकट बरक़रार
19 अगस्त 2026 शान्ति और सुरक्षा
संयुक्त राष्ट्र ने मंगलवार को आगाह किया कि दक्षिणी लेबनान में हिंसक टकराव के कारण विस्थापित हुए लगभग 8 लाख 60 हज़ार लाख लोग अपने घर लौट चुके हैं, लेकिन विस्थापन और मानवीय संकट की स्थिति अभी भी गम्भीर बनी हुई है.
नाज़ुक युद्धविराम
यह क्षेत्र वर्षों से हिंसक टकराव की मार झेल रहा है. इस साल मार्च में फिर भीषण लड़ाई शुरू होने के बाद से इसराइली हवाई हमलों में हज़ारों लोगों की मौत हुई है और 10 लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं.
अप्रैल से अब तक कई बार युद्धविराम की घोषणा हुई, लेकिन हिज़बुल्लाह और इसराइली बलों के बीच झड़पें जारी रही हैं.
सबसे हालिया युद्धविराम समझौता जून के अन्त में अमेरिका की मध्यस्थता में इसराइली और लेबनानी अधिकारियों के बीच हुआ. इसके तहत हिज़बुल्लाह को पूरी तरह निरस्त्र होना था और इसराइली बलों को दक्षिणी लेबनान से पूरी तरह हटना था.
इसके बावजूद हिंसा जारी है. बीते सप्ताहान्त इसराइली हवाई हमलों के बाद फिर विस्थापन बढ़ा और सैकड़ों परिवारों को उत्तर की ओर पलायन करना पड़ा.
विस्थापन संकट जारी
संयुक्त राष्ट्र के आँकड़ों के अनुसार, लगभग 3 लाख 60 हज़ार लोग अब भी विस्थापित हैं, जिनमें कम से कम 22 हज़ार लोग सामूहिक आश्रय स्थलों में रह रहे हैं.
कई लेबनानी नागरिक अब भी हिंसक टकराव से प्रभावित इलाक़ों में अपने घरों को नहीं लौट पा रहे हैं. भारी मलबे, बुनियादी ढाँचे को व्यापक नुक़सान और असुरक्षा के कारण स्वास्थ्य, जल व बिजली सेवाएँ बुरी तरह प्रभावित हुई हैं या कई जगह ठप पड़ी हैं.
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी, (UNHCR) के प्रवक्ता बाबर बलोच ने मंगलवार को विस्थापित परिवारों के लिए अस्थाई आवास की आवश्यकता पर ज़ोर दिया, ताकि वे अपने समुदायों के क़रीब रह सकें.
उन्होंने कहा, “मानवीय ज़रूरतें अब भी बहुत अधिक हैं. घरों, जल प्रणालियों, बिजली नेटवर्क, स्कूलों, स्वास्थ्य केन्द्रों, कृषि भूमि और सामुदायिक बुनियादी ढाँचे को व्यापक नुक़सान पहुँचा है, जिससे पुनर्बहाली में बाधा आ रही है.”
हालाँकि लगभग 8 लाख 60 हज़ार लोग लौट चुके हैं, लेकिन उनमें से बहुत से अपने क्षतिग्रस्त घरों में वापस नहीं जा सके हैं और आसपास के अस्थाई ठिकानों में रह रहे हैं.
कई परिवार अब भी किराए के मकानों या अस्थाई मेज़बानों के यहाँ रह रहे हैं और मलबा हटाए जाने, घरों की मरम्मत तथा सार्वजनिक सेवाओं की बहाली का इन्तज़ार कर रहे हैं.
व्यापक मानवीय ज़रूरतें बरक़रार
घरों, जल एवं बिजली प्रणालियों, कृषि भूमि, स्वास्थ्य केन्द्रों व अन्य बुनियादी ढाँचे को हुए गम्भीर नुक़सान के कारण लोगों की स्थाई वापसी और पुनर्बहाली अब भी मुश्किल बनी हुई है.
दक्षिणी लेबनान के कुछ हिस्सों में जल आपूर्ति के बुनियादी ढाँचे को हुए नुक़सान से 7 लाख से अधिक लोग अब भी प्रभावित हैं.
लेबनान सरकार, UNHCR समेत अन्य मानवतावादी संगठनों की मदद से प्रभावित लोगों को सुरक्षा, आश्रय, वित्तीय सहायता और मनोसामाजिक परामर्श उपलब्ध करा रही है.
मगर मानवतावादी एजेंसियाँ भी धन की भारी कमी से जूझ रही हैं, जिससे बड़े पैमाने पर प्रभावी सहायता पहुँचाने की उनकी क्षमता सीमित हो रही है.
63 करोड़ 99 लाख डॉलर की अन्तर-एजेंसी त्वरित अपील के तहत माँगी गई वित्तीय सहायता में से अब तक केवल 48 प्रतिशत धनराशि ही प्राप्त हुई है. वहीं, 2026 में लेबनान में UNHCR के अभियान के लिए आवश्यक 47 करोड़ 23 लाख डॉलर में से केवल 24 प्रतिशत धन ही उपलब्ध हो पाया है.
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