October 21, 2026

सिविल सर्जन कार्यालय में फाइल चोरी करते पकड़ा गया निलंबित लिपिक, 8 साल तक दो जगह से उठाता रहा वेतन

Bihar News: औरंगाबाद में दो संस्थानों से करीब आठ वर्षों तक वेतन लेने के आरोप में निलंबित लिपिक कृष्ण प्रसाद वर्मा को पुलिस ने सिविल सर्जन कार्यालय से सरकारी दस्तावेज निकालते हुए गिरफ्तार किया है. मंगलवार को दुर्गापूजा की छुट्टी के दौरान वह कार्यालय के अंदर मौजूद थे और फाइलों को खंगाल रहे थे. सूचना मिलने पर नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और उन्हें दो थैलों में रखे सरकारी दस्तावेजों के साथ पकड़ लिया.

निलंबित होने के बावजूद कार्यालय पहुंचा लिपिक

जानकारी के अनुसार, मंगलवार को दुर्गापूजा की छुट्टी होने के कारण सिविल सर्जन कार्यालय बंद था. इसी दौरान कृष्ण प्रसाद वर्मा कार्यालय पहुंचे और अंदर से गेट बंद कर सरकारी फाइलों को खंगालने लगे. इसकी जानकारी विभागीय अधिकारियों को हुई तो उन्होंने तत्काल नगर थाना पुलिस को सूचना दी.

नगर थानाध्यक्ष के नेतृत्व में पुलिस पदाधिकारी सुरेंद्र कुमार सिंह मौके पर पहुंचे. पुलिस ने कार्यालय के अंदर से कृष्ण प्रसाद वर्मा को पकड़ा. उनके पास मौजूद दो थैलों की जांच की गई, जिसमें सरकारी दस्तावेज मिले. पुलिस ने सभी दस्तावेजों को जब्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है.

कृष्ण प्रसाद वर्मा पर पहले से ही एक ही अवधि में दो अलग-अलग संस्थानों से नौकरी और वेतन लेने का आरोप है. इस मामले की शिकायत पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह ने जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा से की थी. शिकायत के बाद डीएम ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की थी.

जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद मामले की दोबारा जांच भी कराई गई. दूसरी जांच कमेटी में लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी जयप्रकाश नारायण, जिला पंचायती राज पदाधिकारी इफ्तेखार अहमद और स्वास्थ्य विभाग के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी शामिल थे. दोनों जांच रिपोर्ट में कृष्ण प्रसाद वर्मा पर लगे आरोपों की पुष्टि हुई.

विभागीय जांच के अनुसार, कृष्ण प्रसाद वर्मा वर्ष 2005 से औरंगाबाद स्वास्थ्य विभाग में लिपिक के पद पर कार्यरत थे और नियमित वेतन प्राप्त कर रहे थे. इसी दौरान उन्होंने 20 नवंबर 2008 को भारत कोकिंग कोल लिमिटेड यानी BCCL में जूनियर ओवरमैन के पद पर भी योगदान दे दिया.

जांच के मुताबिक, वह 13 मार्च 2017 तक BCCL से भी वेतन लेते रहे. इस तरह करीब आठ वर्षों तक एक ही अवधि में स्वास्थ्य विभाग और BCCL से वेतन लेने का मामला सामने आया.

BCCL के पूर्वी झरिया क्षेत्र के महाप्रबंधक की ओर से सिविल सर्जन को भेजे गए पत्र में भी संबंधित जानकारी की पुष्टि की गई थी. पत्र के अनुसार, कृष्ण प्रसाद वर्मा 13 मार्च 2017 से BCCL में अनधिकृत रूप से अनुपस्थित हैं.

14 जुलाई को किया गया था निलंबित

दोनों जांच कमेटियों की रिपोर्ट के आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने 14 जुलाई को कृष्ण प्रसाद वर्मा को निलंबित कर दिया था. निलंबन के बाद उनका मुख्यालय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, गोह निर्धारित किया गया था.

इसके बाद सिविल सर्जन के निर्देश पर गोह के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. शिवशंकर प्रसाद ने 10 अक्टूबर को गोह थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई. इस मामले में गोह थाना कांड संख्या 278/26 दर्ज किया गया था.

दोहरी नौकरी के मामले में पहले से कार्रवाई का सामना कर रहे कृष्ण प्रसाद वर्मा पर अब सरकारी दस्तावेज निकालने का भी आरोप लगा है. सिविल सर्जन कार्यालय से दस्तावेज ले जाने के मामले में उनके खिलाफ दूसरी प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

सिविल सर्जन कार्यालय की ओर से नगर थाने को इस संबंध में पत्र भेजा गया है. पुलिस आवेदन के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई करेगी.

निलंबन के बाद मुख्यालय गोह निर्धारित होने के बावजूद कृष्ण प्रसाद वर्मा छुट्टी के दिन सिविल सर्जन कार्यालय तक कैसे पहुंचे, इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. कार्यालय का गेट अंदर से बंद था और उनके पास सरकारी दस्तावेज भी मिले हैं.

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि वह कार्यालय में किस तरह दाखिल हुए और जिन फाइलों को वह खंगाल रहे थे, उनका संबंध उनके खिलाफ चल रही विभागीय जांच से था या नहीं. इस मामले में किसी अन्य कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है.

फिलहाल पुलिस ने बरामद दस्तावेजों को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है. निलंबित लिपिक के खिलाफ पहले से दर्ज दोहरी नौकरी के मामले में भी आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है.