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जमीर अहमद / आदित्य शुक्ला | निघासन, लखीमपुर-खीरी23 घंटे पहले
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लखीमपुर खीरी में निघासन तहसील क्षेत्र के 37 परिवार 730 दिनों से बेघर हैं। 26 गांवों के करीब 35 हजार की आबादी पर हर साल की तरह इस बार भी बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। सबसे ज्यादा जसनगर और नया पिंड गांव के कई घर प्रभावित हैं, वहीं दोनों गांव के अब तक 2 घर कट चुके हैं। 2 साल पहले इन गांवों के 37 घर नदी में समा गए थे। अभी तक उन बाढ़ पीड़ितों को रहने के लिए जमीन नहीं मिल पाई हैं।
कटान से विस्थापित हुए 37 परिवार दो साल बाद भी झुग्गियों में रहकर गुजर बसर कर रहे हैं। दो साल से बेघर लोगों की हकीकत जानने दैनिक भास्कर टीम इन दोनों गांवों में पहुंची। बातचीत का लहजा सुनने के बाद एक बार फिर ग्रामीणों को लगा कि प्रशासनिक टीम शायद मदद के लिए आई है। हकीकत से परे दुर्व्यवस्थाओं के बीच रह रहे लोगों के हाथ अपने आप जुड़ गए। इसके बाद जो संवाद शुरू हुआ, उसे सुनकर उनके दुख का अहसास हुआ। हालात यह थे कि कई लोगों ने हाथ जोड़कर रोते हुए कहा– साहब किसी तरह रहने का इंतजाम करा दें।
उनकी अंगुलियां कांप रही थी और होठों से शब्द बड़ी मुश्किल से बाहर आ रहे थे। शायद यह महीनों से गुहार लगाते–लगाते थक गए थे। आंसू देखकर मन द्रवित हुआ, लेकिन भास्कर टीम ने अपने सवालों के बीच वहां की हकीकत जानी। जो सच सामने आया वो प्रशासनिक व्यवस्था में छेद ही छेद दिखा रहे थे। मुआवजे के अलावा इन्हें आज तक वो नहीं मिला, जिसकी उन्हें सबसे ज्यादा जरूरत थी। आशियाना… शायद धरती पर हर इंसान के लिए यह पहली प्राथमिकता होती है।
मोहाना नदी के कटान की 3 तस्वीरें…

इस साल अगस्त में मोहाना नदी का पानी जसनगर गांव के किनारे तक कटान करते हुए पहुंच गया है। गांव के लोग डरे हुए हैं। उनका कहना है कि हर साल बाढ़ का दंश झेलते हैं।

जसनगर गांव में नदी तेजी से कटान करते हुए आगे बढ़ रही है।

प्रशासन गांव किनारे बालू भरी बोरियों को लगाकर कटान रोकने की जद्दोजहद कर रहा है।
गांव के किनारे झुग्गी बनाकर रह रहे लोग
निघासन के 26 गांव मोहाना नदी के सीधे प्रभाव में आते हैं। इन 26 गांवों में दो गांव नया पिंड और जसनगर नदी के सबसे करीब बसा है। साल 2024 में नदी का जलस्तर बढ़ने से दोनों गांव भीषण कटान की जद में आ गए। बाढ़ आने से नया पिंड के 28 घर और जसनगर के 9 घर नदी की धारा में समा गए। साथ ही परिवारों की कई एकड़ कृषि योग्य भूमि भी समाप्त हो गई।
तबाही के बाद इन 37 परिवारों के कुछ लोग इधर-उधर गांव किनारे बस गए। करीब 28 से 30 परिवार के लोग अभी भी वहीं गांव किनारे झुग्गी बनाकर रह रहे हैं। इन सभी परिवारों को मकान कटने के बाद प्रशासन ने 1 लाख 20 हजार मुआवजा दिया था। वहीं कुछ पीड़ितों को जिनका जमीनों का कम नुकसान हुआ था, उन्हें 8 हजार रुपए मुआवजा मिला था।

बाढ़ पीड़ित गुरुवचन सिंह के बेटे वीर सिंह ने हाथ जोड़कर कहा- साहब आप ही हमारे रहने का इंतजाम करवा दें।
हाथ जोड़कर बाढ़ पीड़ित बोले- साहब रहने का इंतजाम करवा दें
नया पिंड गांव के रहने वाले गुरुवचन सिंह अपनी पत्नी और दो बेटों के साथ सड़क किनारे झुग्गी बनाकर रहते हैं। गुरुवचन का बेटा वीर सिंह अपनी दशा बताते हुए भावुक हो गया। वीर ने बताया कि यहां 2024 से कटान पीड़ितों की कोई सुनवाई नहीं हो रही हैं।
वहां से वापस लौटते समय वीर सिंह ने हाथ जोड़ते हुए हमसे कहा साहब आप ही हमारे रहने का इंतजाम करवा दें। गुरुवचन ने कहा कि हमें वृद्धा पेंशन ही दे दिया जाए, जिससे हम गुजर बसर कर सकें। हमारी स्थिति दिन प्रतिदिन बद्तर होती जा रही है।

तस्वीर में दिख रहे ये सभी लोग बाढ़ पीड़ित हैं, जिनका दो साल पहले मोहाना नदी के कटान में घर कट गया था।
झोपड़ी से टपकती है बारिश की बूंद, तेंदुए का भी डर
नया पिंड के रहने वाले भजन सिंह ने बताया कि हमारा घर बीते 2 साल पहले कटान में कट गया था। उसके बाद हमारे रहने को घर भी नही हैं। कई बार अधिकारी आते हैं, लेकिन वे दूसरे गांव से ही होकर चले जाते हैं। हम लोग 2 सालों से यहां रहे हैं। कोई पूछने वाला नहीं हैं। हम लोग सरकार के खिलाफ धरना देंगे। हमकों पैसा नहीं चाहिए बल्कि रहने को घर दे दिया जाए।
नया पिंड की रम्मो कौर ने बताया कि उनका घर मोहाना नदी में कट गया था। उनकी आंखों से कम दिखाई देता हैं। रम्मो भी हिंदू कौर की तरह ही सड़क किनारे झोपड़ी बनाकर रहती हैं। उन्होंने बताया कि बारिश में झोपड़ी से बूंदे टपकती हैं। मेहनत करके पेट पालते हैं। हमें अभी तक कोई मदद नही मिली। यहां तेंदुए घूमते रहते हैं। हर समय डर के साये में रहना पड़ता है। उनकी भी सरकार से जमीन की मांग हैं।

बाढ़ पीड़ित हिंदू कौर ने कहा- हम जहां रहते हैं, यहां से भी हमें भगाया जा रहा है। हमारी भी मदद होनी चाहिए।
रहने के लिए अब तक नहीं मिली जमीन
नया पिंड की ही रहने वाली हिंदू कौर मिली, जिनका घर 2 साल पहले मोहाना नदी की कटान में समा गया था। उन्होंने बताया कि हमारे पास रहने के लिए जमीन नहीं है। सड़क किनारे घास फूस की झोपड़ी बनाकर रह रहीं हैं। उनका कहना है कि यहां से भी हमें भगाया जा रहा है। सरकार हमारे लिए भी कुछ सोचे। हमारी भी मदद होनी चाहिए। हमें रहने के लिए स्थायी जमीन दिया जाए।
नया पिंड (खैरटिया) के ग्राम प्रधान प्रगट सिंह ने बताया कि मोहाना नदी लगातार कटान कर रही है। 2024 में करीब 28 घर बह गए थे। उससे पहले साल 2022 में पहले के बाढ़ पीड़ितों को ग्राम समाज की जमीन में पट्टा दिया गया था, लेकिन जमीन तराई क्षेत्र में होने से लोगों ने लेने से इनकार कर दिया। कटान की जानकारी जिले स्तर के अधिकारियों को कई बार पहुंचाई गई है।

जसनगर गांव के रहने वाले बूटा सिंह और चंदन ने बताया कि दो साल पहले की तरह इस बार भी कई घरों के कटने की संभवना दिख रही है।
गांव पर फिर से कटान का खतरा
जसनगर के रहने वाले चंदन ने बताया कि परियोजना के तहत जियो ट्यूब लगाए गए थे। वह जियोट्यूब नदीं की तेज धारा में बह गए। पूरी परियोजना का 5 साल का टेंडर था लेकिन ठोस काम न होने से सफल नही हो रहा है। केवल कटान के समय खानापूर्ति के लिए अधिकारी आते हैं और बोरी में रोड़ी भरवाकर चले जाते हैं। यहां कोई सुनने वाला नही है। ट्यूब बहने से कटान तेजी से शुरू हो गया है।
गांव के ही एक और ग्रामीण बूटा सिंह ने बताया कि कटान जारी है। गांव पर खतरा मंडरा रहा है। पिछले साल भी इसी तरह से कटान हुआ था। कई घरों के कटने की संभवना साफ दिख रही है। लेकिन कोई सांसद, विधायक देखने नही आया। सबको मुआवजा मिलता है। लेकिन किसानों की सैकड़ो एकड़ खेत कट जाने के बाद भी कोई मुआवजा नही मिल रहा है।


दो साल पहले समाए थे 37 घर
दो साल पहले 2024 में मोहाना नदी में दो गांव नया पिंड और जसनगर में सबसे ज्यादा तबाही मचाई थी। बाढ़ और कटान से लोगों को अपना गांव छोड़ देना पड़ा। नेपाल की पहाड़ियों में हुई बारिश से जुलाई के महीने में मोहाना नदी का जलस्तर बढ़ गया। इससे इन 26 गांवो के लोगों की फसलें और जमीनें बर्बाद हुई। नदी के किनारे बसे सबसे करीब गांव जसनगर और नया पिंड के 37 घर नदी की कटान में कट गए।
इन गांव के लोगों को सिर्फ अभी तक घरों का मुआवजा मिला। वहीं इनके पास रहने के लिए आज भी कोई जमीन नही है। 2024 तक नया पिंड गांव में कुल घर 88 घर थे, लेकिन कटान की चपेट में आकर इस गांव के 28 घर कट गए। वहीं उसी साल जसनगर के 9 घर कट गए थे। इन कटान पीड़ितो में जगदीश, हरीश कुमार, श्रीराम, श्यामपाल, नत्थू, धर्मेंद्र कुमार, रामवृक्ष, शिवभगवान और सियाराम शामिल हैं।
इन कटान पीड़ितों को भी प्रशासन ने नुकसान के अनुसार मुआवजा दिया। इन दोनों गांव के कटान पीड़ितों का कहना है कि जब तक हमें जमीनें नहीं दी जाएंगी। तब तक हम मुआवजे में मिले रुपए का क्या करेंगे। जसनगर में 2011 जनगणना के अनुसार 460 परिवार रहते है। जिनमें 40 घरों पर इस साल भी 2024 जैसी कटान की स्थिति बनती नजर आ रही है।

दो साल पहले आए बाढ़ की देखिए तस्वीरें…

दो साल पहले 2024 में मोहाना नदी के बाढ़ की चपेट में पूरा जसनगर और नया पिंड गांव आ गया था।

उस दौरान दोनों गांवों की सैकड़ो एकड़ फसलें बाढ़ के दौरान बर्बाद हो गई।

बाढ़ के दौरान खेतों के बीच से ट्रैक्टर ले जाता युवक।
कई एकड़ खेत नदी में समाए
बीते दो सालों में कई बीघे खेत कटान की जद में आ गए। खेत नष्ट होने से वहां के लोगों के लिए आर्थिक संकट की स्थिति आज तक बनी है। दो साल पहले 2024 में जसनगर में 16 जुलाई को चार किसानों रामनिवास की 1.5 एकड़, शिवपाल महतिया की तीन बीघा, दीपक दुबे की तीन बीघा और पारसनाथ की एक एकड़ जमीन नदी में समा गई।
इन चार किसानों की करीब 3.5 एकड़ जमीन कटान की भेंट चढ़ी। 27 जुलाई को कामता, तुलाराम, बालकराम, छुटकन्ना, रामनिवास, दीपक, तुंगनाथ, कल्लू, बनवारी, शकील और जगदीश समेत 20 से अधिक किसानों के खेत नदी में समा गए। इसी तरह सितंबर के महीने में पड़ोसी गांव कश्यपनगर में कई एकड़ जमीनें कटान की भेट चढ़ गई।
इस साल भी बाढ़ की चपेट में नया पिंड और जसनगर
निघासन का नया पिंड गांव और जसनगर इस बार भी मोहाना नदी के कटान की चपेट में है। साल 2024 में दोनों गांवों के 37 घर नदी में समा गए थे। इस बार फिर से नदी ने कटान शुरु कर दिया है। गांव के चारों तरफ नदी का पानी पहुंच चुका है। बाढ़ का पानी गांव में आने से लोगों के पलायन की स्थिति बन चुकी है।
बाढ़ की स्थिति जानने के लिए भास्कर टीम को नाव में बैठकर नया पिंड जाना पड़ा। ग्रामीणों ने बताया कि मोहाना नदी गांव के पास लगातार कटान कर रही है। दोनों गांवों में इस साल 24 अगस्त तक गांव के 2 घर कटान की जद में आ चुके हैं। दो साल पहले नदी ने भयंकर तबाही मचाई थी। इस बार भी कुछ वैसी स्थिति ही नजर आ रही है।

नया पिंड गांव में इस बार बाढ़ का पानी पहुंच गया है। ग्रामीणों और बच्चों को नाव से आवागमन करना पड़ रहा है।
बच्चियों ने कहा- नाव से जाना पड़ रहा स्कूल
इस साल भी अगस्त महीने में नया पिंड गांव में बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। गांव में पहुंचने पर नया पिंड की 12 साल की छात्रा सिमरन कौर ने बताया कि घर के आगे पानी भरा हुआ है। नाव से स्कूल जाना पड़ रहा है। डूबने से लेकर जंगली जानवरों का खतरा बना हुआ है। वहीं एक और 13 साल की छात्रा आसू ने बताया कि पानी भरा हुआ है। हम स्कूल नही जा पा रहे हैं। बाढ़ आने पर हमारे घर के दरवाजे तक पानी पहुंच जाता है।
रेलवे ट्रैक के किनारे तक पहुंचा नदी का पानी
जसनगर गांव के किनारे से गुजरी रेलवे लाइन पर भी बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते प्रशासन को दोबारा युद्धस्तर पर रोड़ी भरी बोरियां अभी से ही लगवा देनी चाहिए। यदि रेलवे ट्रैक तक पानी पहुंचा, तो फिर बहुत नुकसान होगा। पिछले साल भी बाढ़ से हमारी फसलें बर्बाद हुई थी। इस साल भी कुछ ऐसी स्थिति ही दिख रही है। अधिकारी सिर्फ दौरा करने आते हैं। उनके दौरे का कोई सकारात्मक परिणाम बाढ़ से निपटने के लिए हम सभी को आज तक नही मिल पाया।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव किनारे नदी की गहराई करीब साथ से 70 फुट है और विभाग ने परियोजना के तहत जो जियो ट्युब लगाए गए थे, वे नदीं में समा रहे हैं। जियोट्यूब को बचाने के लिए जौ गैवियान डाले जा रहे है। इसका पता ही नही चल रहा है। कटान शुरु होने के बाद प्रशासन ने मिट्टी और बालू भरी बोरियों को लगाना शुरु किया है। अब सवाल यह है कि इतने वजन भरे जियोट्यूब नही टिके, तो बोरियों से कैसे कटान रुक सकता है। कटान रोकने के लिए स्थायी कार्य होना जरूरी है।

नदी के कटान से गांव के लोग डरे हैं कि कहीं दो साल पहले की तरह इस बार भी घर कटान की जद में न आ जाए।

नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद प्रशासन ने गिट्टी और बालू भरकर बोरियों को नदी किनारे लगाना शुरू किया है।
रोड़ी और बालू भरी बोरियों से कटान रोकने का प्रयास जारी
जसनगर के नंद लाल ने बताया कि नदी कटान कर रही है। परियोजना का कोई असर नही हुआ। पिछले साल 5 से 7 घर कट गए थे। इस बार दो घर और कटने की कागार पर है। कटान रुकने का नाम नही ले रहा है। जसनगर के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि सुरेश ने बताया कि इस बार दो घरों का आधा हिस्सा कट गया है। उन्होंने लगातार जिला प्रशासन तक बात पहुंचाई है कि गांव कटान की जद में है। अधिकारियों ने गांव का दौरा भी किया है। जब नदी की धारा का वेग कम होगा शायद तभी कटान रुकेगा।
सिंचाई विभाग के एक्सईएन करन पाल सिंह ने बताया कि परियोजना तट बंध के पास कटान रोकने लिए बनाई गई थी। इसकी स्वीकृति 2024-2025 में हुई थी। कुल 3.79 करोड़ की परियोजना थी, जिस पर काम हुआ है। उन्होनें बताया कि कटान को रोकने के लिए रोड़ी और बालू भरी बोरियां नदी किनारे लगाई जा रही है।
कटान रोकने के लिए 3.79 करोड़ की आई परियोजना
2024 में हुई तबाही के बाद प्रशासन ने सक्रिय होकर मोहाना का कटान रोकने के लिए 2025 में सिंचाई विभाग ने 1600 मीटर लंबी जियोट्यूब परियोजना पर 3.79 करोड़ रुपए खर्च किए। परियोजना में जसनगर, कश्यपनगर और नया पिंड में कटान रोकने के लिए जियोट्यूब बैग लगाए थे, जो इस साल नदी की धारा में बह गए। जियोट्यूब बहने से नदी का कटान फिर से शुरु हो गया। अब सवाल यह है कि करोड़ो खर्च होने के बाद भी परियोजन के तहत लगे जियोट्यूब बैग कैसे नदी में समा गए।
जियोट्यूब बहने के बाद जसनगर में फोहारी बाबा क्षेत्र के पास नदी की धारा कटान करते हुए कृषि भूमि को निगलते हुए आबादी की ओर बढ़ रही है। 2011 जनगणना के अनुसार जसनगर में कुल 460 घर है, जिसमें 2412 लोगों की आबादी है। गांव के 40 घर नदी के करीब होने की वजह से कटान की स्थिति में है। अब तक 2 घर कट चुके हैं। मोहाना नदी के कटान से जसनगर गांव के लोग डरे हुए हैं। गांव के लोगों का सवाल यही है कि इतनी बड़ी परियोजना होने के बाद भी कटान नही रुक पाया।

26 अगस्त को नेपाल में आए बाढ़ से निघासन एसडीएम और सिचाई विभाग के अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा किया।
कटान पीड़ितों के लिए जमीन की तलाश जारी
बाढ़ प्रभावित इन क्षेत्रों को लेकर निघासन ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि अमनदीप सिंह ने बताया कि हमारे इलाके के नया पिंड गांव में मोहाना नदी कटान कर रही है। 2024 में पहले ही 28 घर कट चुके हैं। हमारा पूरा प्रयास है कि वहां कोई ठोस कार्य कराया जा सके। 26 अगस्त को नेपाल में आए बाढ़ से निघासन एसडीएम और सिचाई विभाग के अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा किया।
एसडीएम यदुवीर सिंह ने कहा नया पिंड गांव के कटान पीड़ितों के लिए जमीन तलाश की जा रही है। जल्द ही उन्हें सुरक्षित स्थान पर जमीन देकर बसाया जाएगा। जसनगर गांव को कटान से बचाने के लिए सिंचाई विभाग सक्रिय है। वहां पर बोरियों में रोड़ा डालकर कटान रोकने की प्रक्रिया जारी है।

विधायक शशांक वर्मा ने कहा कि मोहाना नदी के कटान को रोकने के लिए तिकुनिया गुरुद्वारा से जसनगर और खैरटिया तक लगातार बचाव कार्य कराए जा रहे हैं।
कटान रोकने के लिए युद्धस्तर पर काम जारी
निघासन विधायक शशांक वर्मा ने कहा कि मोहाना नदी के कटान को रोकने के लिए तिकुनिया गुरुद्वारा से जसनगर और खैरटिया तक लगातार बचाव कार्य कराए जा रहे हैं। जसनगर में तेज बहाव के कारण जियो ट्यूब के सिंकिंग की जानकारी मिलने के बाद बोरियों में रोड़ा डालकर कटान का असर कम करने का काम युद्धस्तर पर किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बुधवार को 300 क्विंटल रोड़ा डाला गया और आगे भी काम जारी है।
विधायक ने कहा कि पिछले दो-तीन वर्षों से फ्लड फाइटिंग के जरिए जसनगर और कौड़ियाला घाट गुरुद्वारा क्षेत्र को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। नया पिंड में इस बार कटे घरों के प्रभावितों को बारिश खत्म होने के बाद सुरक्षित जगह पर जमीन उपलब्ध कराकर मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत बसाने का प्रयास किया जाएगा।
हर साल 26 गांवों में आती है बाढ़
बीते 13 सालों से हर साल निघासन क्षेत्र के इन 26 गांवो की करीब 35 हजार की आबादी के लोग बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं। लोगों की फसलें बर्बाद होती हैं। वहीं कई एकड़ भूमि कट जाती है। इन गांवो में 2 गांव जसनगर और नया पिंड में बाढ़ और कटान की वजह से अब तक सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। इस साल भी नया पिंड गांव के चारों तरफ पानी पहुंच चुका है। वहीं जसनगर के 40 घर जो नदी के सबसे करीब है।
इनमें 2 घर कट चुके हैं, तो बचे 38 घर कटान की स्थिति में हैं। नेपाल के पहाड़ी इलाकों में होने वाली मानसूनी बारिश का सीधा असर मोहाना नदी के जलस्तर पर पड़ता है। इस प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए प्रशासन ने जियोट्यूब जैसे परियोजनाओं को यहां लगवाया, लेकिन वह करोड़ो की परियोजना सफल होती नहीं नजर आ रही हैं। इस बार नदी के बढ़ते जलस्तर और दो गांवो में हो रही कटान को देखकर अन्य गांवो के लोगों की भी परेशानी बढ़ने लगी है।
बाढ़ आने से चौगुर्जी, जसनगर, नया पिंड, बेला परसुआ, रननगर जैसे गांवो के लोगों का आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता है। हालांकि प्रशासन ने दावा किया है कि बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए समय रहते सारे इंतजाम किए जा रहे हैं। पिछले साल भी बाढ़ ने लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया था। बाढ़ के दौरान इन गांवो का आपसी संपर्क मार्ग टूट जाता है। एक से दूसरे गांव जाने के लिए स्थानीय लोग नाव का सहारा लेते हैं।
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