September 23, 2026

72वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार: रवि राज मुर्मू को संथाली फिल्म ‘आंगेन’ के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार - Jamshedpur (East Singhbhum) News

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जमशेदपुर38 मिनट पहले

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गैर-फीचर फिल्म श्रेणी में ‘सर्वश्रेष्ठ नवोदित निर्देशक’ के सम्मान से नवाजा

करीम सिटी कॉलेज के जनसंचार विभाग (सत्र 2011-14) के पूर्व छात्र रवि राज मुर्मू को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया। गुजरात के एकता नगर (केवड़िया) में आयोजित भव्य समारोह में रवि को उनकी संथाली फिल्म ‘आंगेन’ के लिए गैर-फीचर फिल्म श्रेणी में ‘सर्वश्रेष्ठ नवोदित निर्देशक’ (बेस्ट डेब्यू डायरेक्टर) का पुरस्कार दिया गया। रवि की इस उपलब्धि से न केवल जमशेदपुर, बल्कि पूरे झारखंड के कला और सिनेमा जगत में जश्न का माहौल है। जानकारों के अनुसार, क्षेत्रीय भाषा की फिल्म को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलना संथाली सिनेमा के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

जमशेदपुर... करीम सिटी कॉलेज के पूर्व छात्र ने देश के सबसे बड़े सिनेमा मंच पर लहराया परचम संथाली लोक-संस्कृति और संघर्ष को बड़े पर्दे पर उतारा ‘आंगेन’ में रवि राज ने संथाली समाज की जीवनशैली, समृद्ध परंपराओं और रोजमर्रा के जमीनी संघर्ष को संजीदगी से पेश किया है। फिल्म भाषा और स्थानीय परिवेश की बारीकियों को मजबूती से सामने लाती है। रवि की यह सफलता नए विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जुड़कर बड़े सपने देखने की प्रेरणा देगी।

खास बातचीत : ‘अपनी लोक-संस्कृति पर भरोसा रखें राष्ट्रीय सम्मान हासिल करने के बाद रवि राज ने दैनिक भास्कर से अपनी यात्रा और सोच साझा की... राष्ट्रपति के हाथों सम्मान: “यह क्षण शब्दों से परे है। देश की राष्ट्रपति और वह भी झारखंड की मिट्टी से जुड़ी शख्सियत के हाथों सम्मान मिलना मेरे और पूरे संथाली समाज के लिए ऐतिहासिक व भावुक पल है।” फिल्म का विचार और उद्देश्य: “‘आंगेन’ मेरी अपनी जड़ों की पुकार है। मैं संथाली समाज की संस्कृति, भाषा और अनकहे संघर्षों को सामने लाना चाहता था ताकि हमारी विरासत को पहचान मिले।” सफलता का श्रेय: “इसका पूरा श्रेय मेरी पूरी टीम और सहयोगियों के अथक प्रयास को जाता है। यह पुरस्कार अकेले मेरा नहीं, हम सबका है।” युवाओं को संदेश: “अपनी माटी और लोक-संस्कृति की कहानियों पर भरोसा रखिए। अगर आपकी कहानी में ईमानदारी है, तो भाषा कभी बाधा नहीं बन सकती।”

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