बीड़ पापड़ स्थित खसरा नंबर 7/2 की 2.9087 हेक्टेयर जमीन को रीको ने 70 साल पहले अपना बताकर उद्योग बसाए, उस जमीन को अब वन भूमि बताकर एनजीटी ने खाली कराने का आदेश दे दिया। इससे विश्वकर्मा इंडस्ट्रियल एरिया की 50 इकाइयों के करोड़ों रुपये का निवेश, हजारों
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उधर, उद्यमियों का सवाल है कि जमीन रीको ने दी, रिकॉर्ड रीको ने बनाया, फिर गलती का खामियाजा उद्योग क्यों भुगतें? यदि रीको ने समस्या का समाधान नहीं किया तो हम आत्मदाह को मजबूर हो जाएंगे। इसका जिम्मेदार रीको होगा। क्योंकि, रीको ने उद्यमियों से एनजीटी में अपना मामला खुद निपटाने को कहा है। ऐसे में यदि जमीन वापस ली गई तो वे सड़क पर आ जाएंगे। उधर, विश्वकर्मा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने पीड़ित करीब 50 उद्यमियों को राहत के लिए रीको से विधिक और प्रशासनिक कदम उठाने का आग्रह किया है।
पीड़ित उद्यमी जुगल अग्रवाल का कहना है कि एनजीटी के आदेश के बाद खसरा नंबर 7/2 की स्थिति साफ होना जरूरी है। हमने रीको की प्रक्रिया और सरकारी रिकॉर्ड पर भरोसा कर यहां निवेश किया है। इसलिए यदि जमीन के रिकॉर्ड में कोई कमी है, तो उसकी जिम्मेदारी उद्योगों पर नहीं डाली जानी चाहिए। रीको को अपनी जिम्मेदारी लेते हुए वन विभाग के साथ वनभूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ानी चाहिए और जरूरी वैकल्पिक वन भूमि देकर खसरा नंबर 7/2 को दुरुस्त कराना चाहिए। जब तक मामले में न्यायिक स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक संबंधित उद्यमियों के खिलाफ बेदखली, सीलिंग या ध्वस्तीकरण जैसी कार्रवाई पर पुनर्विचार किया जाए। खसरा नंबर 7/2 से जुड़े राजस्व, वन और रीको के अभिलेखों का संयुक्त परीक्षण कराया जाए।
एनजीटी ने माना वन क्षेत्र, 30 दिन में कब्जा लौटाने का आदेश
एनजीटी ने खसरा नंबर 7/2 के एक बड़े हिस्से को वन क्षेत्र माना है। एनजीटी ने कहा है कि वन भूमि का गैर-वानिकी उपयोग आवश्यक पूर्व स्वीकृति के बिना नहीं किया जा सकता। वहीं, इस खसरे की भूमि के रीको के पक्ष में वैध हस्तांतरण का पर्याप्त आधार रिकॉर्ड में नहीं दिया गया। एनजीटी ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक को उन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने और विभागीय जांच के निर्देश दिए हैं, जिनके कार्यकाल में यह हुआ। गृह विभाग को वन विभाग को जरूरी प्रशासनिक और सुरक्षा सहायता देने को भी कहा गया है।
उद्यमियों के हितों का ध्यान रखें, कार्रवाई रोकें
“पीड़ित उद्यमियों ने रीको से आवंटित भूखंडों पर निवेश किया है। ऐसे में मामले की स्थिति स्पष्ट होने तक उद्यमियों के हितों को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई के संबंध में उचित निर्णय लिया जाना चाहिए।”— अरुण कुमार गुप्ता, अध्यक्ष, विश्वकर्मा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
उद्योगों को हटाया तो करोड़ों का निवेश बर्बाद
“सरकार से हमको राहत नहीं मिली तो हमारे पास कुछ नहीं बचेगा। यदि उद्योगों को हटाया गया तो करोड़ों रुपये का निवेश तो बर्बाद होगा ही, हजारों श्रमिकों का रोजगार जाएगा। उद्यमी सड़क पर आ जाएंगे। बैंकों का करोड़ों रुपया भी फंस जाएगा।” — पुष्पकुमार स्वामी, महासचिव, विश्वकर्मा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
पहले पहाड़ी पर होटल बनाने की तैयारी, फिर भूखंडों की नीलामी रद्द
रीको का एक और कारनामा भी सामने आया है। रीको ने बस्सी के पास दौलतपुरा में पहाड़ी के एक हिस्से में होटल के लिए जमीनों की ऑक्शन के लिए टेंडर मांगने के बाद अंतिम तिथि से पहले नीलामी रद्द कर दी। ऐसे में यह सवाल खड़ा होता है कि यदि नीलामी हो गई होती तो विश्वकर्मा क्षेत्र के पीड़ित उद्यमियों की तरह ही नीलामी में भूखंड खरीदने वाले उद्यमी संकट में फंस जाते। क्योंकि, इस जमीन के आवंटन से राजस्थान की हिल्स पॉलिसी का उल्लंघन संभव था। इसको लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एनजीटी में जाने की तैयारी कर ली थी। बता दें, रीको के ऑक्शन के तहत 7 प्लॉट पर होटल के लिए 500 से अधिक आवेदन आ चुके थे।
एनजीटी के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे: रीको
“रीको द्वारा एनजीटी के फैसले के तहत जमीन के चिह्नीकरण के लिए जयपुर कलेक्टर और वन विभाग से अनुरोध किया गया है, ताकि जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। साथ ही एनजीटी के आदेश के खिलाफ रीको ने विधिक राय के आधार पर सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने तथा एनजीटी में रिव्यू पिटीशन दायर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।” — सुरेश कुमार ओला, एमडी, रीको